दुष्कर्म पीडि़ता को गोद में उठाकर डीएम ने पहुंचाया घर

दुष्कर्म पीडि़ता को गोद में उठाकर डीएम ने पहुंचाया घर
vijay kiran anand dm varanasi

माता-पिता और ग्रामीण पीडि़ता को लेकर बैठे थे धरने पर

वाराणसी. शिव नगरी काशी के कलेक्टर ने मंगलवार को एक ऐसी मिसाल पेश कि जो उन अधिकारियों के लिए सबक है जो महिलाओं व जनसामान्य से बदसलूकी से पेश आते हैं। समाजसेवा से जुड़े अपने सराहनीय कार्यों के लिए चर्चित आइएएस व वाराणसी के डीएम विजय किरण आनंद मंगलवार को अपने माता-पिता व ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठी नाबालिग दुष्कर्म पीडि़ता को अपनी गोद में लेकर उसे घर तक पहुंचाया। पीडि़ता को अपने पिता से भी वह स्नेह नहीं मिला जो कुछ पलों में एक पिता की तरह डीएम विजय किरण आनंद ने दिया।

दरअसल मामला एक नाबालिग के साथ दुराचार, इंसाफ और एक जनप्रतिनिध के दुव्र्यवहार के चलते उपजे आक्रोश से जुड़ा है। डीएम विजय किरण आनंद ने समझदारी के साथ इस पूरे मामले को इस तरीके से सुलझाया कि सबका गुस्सा शांत हो गया। 

वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के कठिरांव गांव की ग्यारह साल की मासूम लड़की के साथ उसी के पड़ोस में रहने वाले मिनहाज खान ने बीते शुक्रवार को एक कब्रिस्तान के समीप दुराचार करने के बाद फरार हो गया। बेदर्दी के साथ हुए शारीरिक शोषण की शिकार पीडि़ता अगले दिन माता-पिता के साथ थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मेडिकल व अन्य कागजी कार्रवाई के बाद फरार चल रहे आरोपी को मंगलवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। इसकी जानकारी पीडि़ता के परिजनों को नहीं थी और वह प्रकरण में सुस्ती का आरोप लगाते हुए और मुआवजा की मांग को लेकर ग्रामीणों के साथ मंगलवार सुबह फूलपुर-कठिरांव चौराहे पर चक्काजाम कर दिए। 

धरना-प्रदर्शन की जानकारी होते ही पुलिस मौके पर आई। पुलिस ने परिजनों को बताया कि आरोपी गिरफ्तार हो चुका है लेकिन इसी बीच ग्राम प्रधान हैदर अली ने आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी जिससे ग्रामीण भड़क उठे। मामला बिगड़ गया और बात लोकल पुलिस के हाथ से निकल गई। दुष्कर्म का मामला धीरे-धीरे धार्मिक होने लगा जिसकी सूचना मिलते ही डीएम विजय किरण आंनद, एसएसपी आकाश कुलहरि मय फोर्स मौके पर आए। 

जिलाधिकारी ने पीडि़ता के परिजनों की बात सुनी और पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद और आरोपी के खिलाफ रासुका में कार्रवाई का आश्वासन दिया। माता-पिता और ग्रामीणों को आश्वस्त करने के बाद मौके पर मौजूद पीडि़ता को अपनी गोद में लेकर उसके घर की ओर चल दिए। आगे-आगे डीएम और पीछे-पीछे ग्रामीण। ग्रामीण डीएम के इस व्यहार से अचंभित थे, उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि जिले का सबसे बड़ा अधिकारी उनकी बेटी को अपनी बेटी की तरह गोद में लेकर ऐसा स्नेह देने की कोशिश कर रहा है जिससे उनकी बेटी उस खौफनाक मंजर को कुछ पल के लिए भूल सके। 
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned