अगर विवाह में आ रही बाधा तो गुरुवार को कर लें ये उपाय, आर्थिक तंगी से भी मिलेगा छुटकारा

अगर विवाह में आ रही बाधा तो गुरुवार को कर लें ये उपाय, आर्थिक तंगी से भी मिलेगा छुटकारा
Thursday Vrat

Sarweshwari Mishra | Publish: Sep, 20 2018 09:42:31 AM (IST) | Updated: Sep, 20 2018 04:12:07 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

अगर कुंवारी कन्या की कुंडली में गुरू दोष है तो बृहस्पति व्रत को पूरे भक्ति-भाव से करे तो उसकी सारी मनोकामना पूर्ण हो सकती है और गुरू दोष दूर हो जायेगा|

वाराणसी. हिंदू धर्म में हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। उसी तरह गुरुवार के व्रत का कुंवारी कन्याओं पर विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि अगर कुंवारी कन्या इस व्रत को पूरे भक्ति-भाव से करें तो उसकी सारी मनोकामना पूर्ण हो सकती है और उसका गुरू दोष खत्म होता है। जिस कन्या की शादी में बाधाएं आती है उसे गुरुवार का व्रत अवश्य करना चाहिए।


आर्थिक तंगी में होता है सुधार
गुरुवार का व्रत करने वाले जातकों को जीवन में कई लाभ महसूस होते हैं। जहां एक ओर उनकी आर्थ‍िक स्थिति में सुधार होता है, वहीं उनकी सेहत भी अच्छी रहती है। ऐसे लोगों को समाज में सम्मान मिलता है और नाते-रिश्तेदारों से भी अच्छे संबंध बने रहते हैं।
गुरुवार का व्रत करने से व्यक्ति को सारे सुखों की प्राप्ति होती है। लेकिन व्रत करने वाले जातक को व्रत के दौरान कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए।

 


व्रत करते समय इन बातों का रखें ख्याल
1. यह ध्यान रखना चाहिए कि इस दिन बाल न कटाएं और ना ही दाढ़ी बनवाएं।
2. कपड़े और बाल न धोएं। साथ ही घर को धोए या पोछे नहीं। घर से कबाड़ बाहर निकालना भी इस दिन वर्जित माना जाता है।
3. नमक का प्रयोग न करें।
4. भगवान विष्णु को जो फल चढ़ाएं, उन्हें दान कर दें।
5. लक्ष्मी और नारायण दोनों की साथ में पूजा करें। आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

ऐसे करें व्रत, ये है विधि
गुरुवार के दिन सुबह स्‍नान करके बृहस्‍पति देव की पूजा करें। पूजन में पीली वस्तुएं, पीले फूल, चने की दाल, मुनक्का, पीली मिठाई, पीले चावल और हल्दी चढ़ाएं. इस दिन केले के पेड़ की भी पूजा की जाती है। कथा पढ़ते और पूजन के समय सच्‍चे मन से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें। जल में हल्दी डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाएं और केले की जड़ में चने की दाल और मुनक्का चढ़ाएं। इसके बाद दीपक जलाकर पेड़ की आरती करें। गुरूवार के व्रत में दिन में एक समय ही भोजन करना चाहिए। पूजन के बाद भगवान बृहस्पति की कथा सुननी चाहिए।

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