अक्षय तृतीय पर न करें खरीदारी, काशी के ज्योतिषी ने बताई ये बड़ी वजह...

Ajay Chaturvedi

Publish: Apr, 17 2018 04:40:36 PM (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India
अक्षय तृतीय पर न करें खरीदारी, काशी के ज्योतिषी ने बताई ये बड़ी वजह...

बोले बीएचयू के ज्योतिषी ज्योतिष दृष्टिकोण से सही नहीं है खरीदारी व नए काम शुरू करने का प्रावधान। करें केवल पूजन अर्चन और दान।

वाराणसी. अक्षय तृतीया को लेकर आम जनमानस में हैं कई भ्रांतियां। इस दिन को लोगों ने नवीन कार्य शुरू करने, रत्न, धातु की खरीदारी, बर्तन और आभूषणों की खरीदारी का दिन बना दिया है। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। इस तरह का कोई ज्योतिषीय प्रमाण नहीं हैं। ये कुछ लोगों का व्यावसायिक प्रोपेगेंडा मात्र है। अक्षय तृतीया के महत्व को कुछ लोगों द्वारा गलत तरीके से परिभाषित कर दिया गया है। इस दिन पूजन अर्चन करने, स्नान दान का ही विशेष महात्म्य है। यह कहना है काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रो.विनय कुमार पांडेय का।


प्रो पांडेय बताते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन लोग अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सफाई कर उसे अच्छी तरह सजाते हैं । इस दिन बर्तनों और आभूषणों की दूकानों पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। इसी दिन के दिन जमीन, प्रॉपर्टी, कार खरीदने और किसी जगह इन्वेस्ट करने के साथ नए बिजनेस की शुरुआत करने को शुभ माना जाता है। परन्तु ये भेड़चाल ज्योतिषीय द्रष्टिकोण से सही नहीं है। हमारे वैश्य समाज ने व्यापारिक लाभ कामना से गलत रूप में परिभाषित कर समाज को गुमराह कर अंधाधुंध खरीदारी को प्रलोभित किया। उन्होंने सलाह दी है कि अंधाधुंध खरीददारी के बोझ से बचें।

 

बीएचयू ज्योतिष विभाग के प्रो विनय कुमार पांडेय

उऩ्होंने बताया कि अक्षय तृतीया पर बन रहे हैं कई दुर्लभ योग , है महापुण्यप्रदा। 'दुर्लभा बुधवारेण' तृतीया बुधवार के योग होने से महापुण्यप्रदा है, सुबह से रात तक कई शुभ संयोग बन रहे हैं। लेकिन बचें अंधाधुंध खरीदारी से। बताया कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हर साल अक्षय तृतीया आती है, जो इस बार 18 अप्रैल बुधवार को है। इस बार अक्षय तृतीया पर सुबह से रात तक कई शुभ संयोग बन रहे हैं। लक्ष्मी योग, विमल योग, एवं सर्वार्थसिद्धियोग का विशिष्ट संयोग बन रहा है। यः करोति तृतीयायां कृष्णं चन्दनभूषितम्। वैशाखस्य सिते पक्षे स यात्यच्युतमन्दिरम्।। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन कोई भी काम किया जाए वह शुभ होता है। गंगा स्नान, यव से होम, यव का दान, स्वयं यव का खाना, सम्पूर्ण पापों का नाश करता है। जो इस दिन भगवान कृष्ण को चन्दन से अलंकृत करता है,वह वैकुण्ठ जाता है। ज्योतिषी लोग आगामी वर्ष की तेजी मंदी जानने के लिए इस दिन सब प्रकार के अन्न,वस्त्र आदि व्यावहारिक वस्तुओं और व्यक्ति विशेषों के नामों को तौलकर उनकी न्यूनाधिकता से भविष्य का शुभाशुभ मालूम करते हैं।

यही तृतीया परशुराम की जयन्ती है। प्रदोष काल मे परशुराम भगवान को पूजनकर निम्न मंत्र से अर्घ्य देवें जमदग्निसुतो वीर क्षत्रियान्तकरप्रभो। गृहाणार्घ्य मया दत्तं कृपया परमेश्वर।। लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे की वजह क्या है? दरअसल अक्षय का मतलब है जिसका कभी क्षय न हो यानी कभी कम ना होने वाला। हिंदू मान्यताओं में दो तरह के प्रतीकों की कल्पना की गई है- एक, जो खत्म हो जाते हैं या मारे जाते हैं। कौरव-पांडव, रावण और कंस आदि सभी खत्म हो गए। दूसरे, वो जो कभी नष्ट नहीं होते, जिनका कभी क्षरण नहीं होता। भागवत में अक्षय वट का उल्लेख है। ऐसा माना गया है कि जब पूरी सृष्टि खत्म होगी और सारी पृथ्वी जलमग्न हो जाएगी, तब भी बरगद का वह पेड़ (अक्षय वट) खड़ा रहेगा। और उस पर एक नन्हें शिशु के रूप में भगवान कृष्ण, उस प्रलय की स्थिति से निर्विकार अपने दाएं पैर का अंगूठा चूस रहे होंगे।

दिन अक्षय कैसे?
कोई खास दिन या तिथि अक्षय कैसे हो सकती है। तिथि तो हमेशा बदलती रहती है। इसके बारे में युधिष्ठिर ने कृष्ण से पूछा, तो कृष्ण ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक काम करेंगे, उसका पुण्य कभी खत्म नहीं होगा। मान्यता है कि इसी दिन महाभारत की लड़ाई खत्म हुई थी और द्वापर युग समाप्त हुआ था। इसी मान्यता के कारण अक्षय तृतीया को ऐसा मौका माना जाता है, जिस दिन किया जाने वाला हर काम शुभ होगा और मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होगी।

 

 

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