पीएम मोदी की इच्छानुसार संवरने लगी काशी

Ajay Chaturvedi

Publish: Sep, 16 2017 03:35:42 (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. प्रधानमंत्रनरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अब पीएम का पहला सपना साकार होता दिखने लगा है। आलम यह कि जमीन तो जमीन आसमान भी खुला-खुला दिखने लगा है। यह सब है आईपीडीएस की बिजली तारों को भूमिगत करने की योजना के चलते। पुरानी काशी के कई हिस्सों को देखने से लगता ही नहीं कि कल तक यहां बिजली के तारों के जंजाल भी थे। कुछ भी नहीं दिख रहा। सिर्फ एक खंभा और उसके होल्डर से लटकता एक एलईडी बल्ब। जिन इलाकों में आईपीडीएस ने काम पूरा कर लिया है वहां की सड़कें रात को पूरा रास्ता दुधिया रोशनी में जमगमा उठता है। लेकिन उससे कहीं ज्यादा सुकून देने वाला होता है कि कहीं तार दिख ही नहीं रहे। अब तो लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि बिजली के बाद टेलीफोन के तारों को भी पूरी तरह से भूमिगत कर दिया जाए।

 

बता दें कि प्रधानमंत्री बनने के पहले ही जब नरेंद्र मोदी जब काशी आए थे तो उन्होंने बिजली के तारों के जंजाल को देख कर कहा था कि सरकार बनी तो बिजली के तारों को भूमिगत किया जाएगा। यह वाकया 2014 मई का है। इसके बाद जब केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार वजूद में आई तो इस पर काम शुरू हुआ। यह दीगर है कि आईपीडीएस के तहत बिजील के तारों को भूमिगत करने का काम शुरू होते होते 2016 आ गया। यानी दो साल बीत गए। इस पर तमाम तरह की नुख्ताचीनी भी शुरू हो गई। लेकिन आईपीडीएस ने फरवरी 2016 काम शुरू कर दिया। कहा गया कि पहले पुरानी काशी के बिजली के तारों को भूमिगत किया जा ना था। यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2017 तक पूरा करना था लेकिन बीच में तत्कालीन केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल ने इसकी मियाद घटा कर सितंबर 2017 कर दी थी। इस दौरान विभाग काम तो करता रहा पर काम की गति धीमी रही। सड़कों की खोदाई, ट्रैफिक डायवर्जन, ट्रैफिक लोड आदि के चलते काम में दिक्कत आ ही रही थी तभी सावन आ गया जिसके चलते करीब महीने भर तक काम स्थगित रहा। ऐसा आईपीडीएस के नोडल अधिकारी अनिल वर्मा का तर्क है। लिहाजा शासन की ओर से उन्हे और तीन महीने का समय मिल गया। यानी अब यह काम हर हाल मे दिसंबर 2017 तक पूरा करना है।

 

इस दौरान आईपीडीएस ने सबसे पहले कबीर नगर, दुर्गाकुंड, साकेत नगर, संकट मोचन क्षेत्र में बिजली के तारों को भूमिगत कर नई तकनीक के लैंप पोस्ट लगा दिए। उसके बाद आदमपुर, काशी स्टेशन वाले क्षेत्र में यह काम पूरा हुआ। लेकिन आमजन हों या बाहर से आने वाले पर्यटक व तीर्थयात्री जब वे लहुराबीर-गोदौलिया मार्ग पर चल रहे हैं तो वो चौंक जा रहे हैं। उन्हें एक बारगी सहज विश्वास ही नहीं हो रहा कि हम उसी काशी में हैं जहां कभी तारों का जंजाल कदम-कदम पर दिखता था। लहुराबीर से बेनियाबाग तक तो सड़क पर आईपीडीएस के तहत लैंप पोस्ट लगा दिए गए हैं। पुराने बिजली के खंभे हटा दिए गए हैं। बिजली के तार अब दिख नहीं रहे तो सड़कें भी खुली-खुली नजर आने लगी हैं तो आकाश भी खुला खुला नजर आने लगा है। जहां तक गलियों में इस योजना को मूर्त रूप देने का मामला है तो अनिल वर्मा बताते हैं कि सावन के दिनों मे जो एक महीने का समय खाली गया उसकी वजह से काम में थोड़ा विलंब हुआ है। सावन में इन गलियों में काम करना मना था, वैसे भी काम हो भी नहीं सकता था। उस दौरान बाबा विश्वनाथ के दर्शनार्थियों का ऐसा सैलाब होता है कि काम नहीं हो सकता। अब इन गलियों में काम शुरू करने जा रहे हैं और दिसंबर तक पुरानी काशी के किसी गली व किसी सड़क पर बिजली के तार नजर नहीं आएंगे। गलियो का काम 15 दिन में शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों से वार्ता के बाद अब अन्य क्षेत्रों के बिजली के तारों और खंभो को हटाने के लिए शट डाउन लिया जाने लगा है। ऐसे में काम तेजी से चल रहा है।

 

एक काम तो आईपीडीएस ने कर दिया है कि जमीन के ऊपर तो सब कुछ बढिया-बढ़िया सा नजर आने लगा है। लेकिन यह जरूर है कि आईपीडीएस के कर्मचारियों ने अगर ध्यान दिया होता, मानक के अनुसार काम किया जाता और मानक के अनुरूप सड़कों की खोदाई कर बिजली के तार जमीन के अंदर डाले जाते तो कहीं ज्यादा बेहतर होता। सतही तौर पर काम करने के चलते कई इलाकों में महज तीन से चार इंच की गहराई पर ही केबिल डालने से लोगों में दहशत भी है। सावन में ही भेलूपुर इलाके में कई दुर्घटनाएं हुई जिसमे की सांढ़ तो कहीं कुत्तों की मौत हो गई। यही वजह है कि काशी के लोगों को जहां बिना तार वाले इलाकों को देख कर खुशी हो रही है तो वहीं भूमिगत केबिल की याद कर वे सिहर उठ रहे हैं। लेकिन अभ तो जो काम होना था वह काम हो चुका है। इतना ही नहीं जल्दबाजी में कुछ ऐसे काम भी हुए हैं कि लोगों के दरवाजों के सामने ही आईपीडीएस के खंभे लगा दिए गए हैं जिससे लोगों का घर में आना-जाना मुश्किल हो गया है। इन कमियों को गर दूर किया गया होता तो शायद यह सबसे अच्छी योजना होती। वैसे स्मार्ट सिटी काशी की ओर यह एक कदम कमतर नहीं।

 

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned