डीएलडब्ल्यू निगमीकरण: आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी

डीएलडब्ल्यू निगमीकरण: आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी
निगमीकरण के विरोध में आंदोलित डीरेका कर्मचारी

Ajay Chaturvedi | Updated: 30 Jun 2019, 02:51:06 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

-6 दिन से चल रहा आंदोलन
-प्रधानमंत्री पर लगा रहे गंभीर आरोप
- रेलवे से म्यूचुअल ट्रांसफर करा कर डीरेका आने वाले ठगा महसूस कर रहे
-महिला कर्मचारी भी कदम से कदम मिला कर कर रहीं विरोध प्रदर्शन
-रेल ट्रैक जाम करने की चेतावनी

वाराणसी. डीजल रेल इंजन कारखाना के निगम में परिवर्तित करने के विरोध में परिसर में मानों आग लग गई है। कर्मचारी आर-पार के मूड में हैं। उन्हें यह निजीकरण किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं है। पिछले छह दिन से परिसर अशांत है। हर दिन आंदोलन का नया स्वरूप सामने आ रहा है। शनिवार को वो रवीद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय जाने को निकले तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें परिसर में ही रोक दिया। इसके बाद कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। जब उन्हें डीरेका के मेन गेट से आगे नहीं बढ़ने दिया गया, तब उऩ्होंने मेन गेट पर ही पांच घंटे तक प्रदर्शन किया। तीखी धूप में भी कर्मचारियों की सरकार विरोधी नारेबाजी गूंजती रही। प्रदर्शन में काफी संख्या में महिला कर्मचारी भी शामिल थीं। कर्मचारियों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से शांतिपूर्वक जुलूस रोके जाने पर सवाल किया और इसे अलोकतांत्रिक करार दिया।

शनिवार सुबह कारखाने के पूर्वी गेट से काफी संख्या में डीरेकाकर्मी काला झंडा व बांहों पर काली पट्टी बांधकर चले। उनमें कई महिला कर्मचारी भी शामिल थीं। मेन गेट बंद देख कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ गया। नेताओं के समझाने पर वे शांत हुए और वहीं बैठ गए। इस दौरान कर्मचारियों ने एक एंबुलेंस को रास्ता देकर अपनी संवेदनशीलता दिखाई। कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें जनसंपर्क कार्यालय तक जाने दिया जाए लेकिन मौके पर पहुंचे एडीएम सिटी विनय प्रताप सिंह व एसपी सिटी दिनेश सिंह ने कर्मचारियों को समझाया।

बता दें कि यहां ऐसे कर्मचारियों की तादाद कम नहीं जिन्होंने अपने घर के समीप आने के लालच में रेलवे से म्यूच्युवल ट्रांसफर करा लिया। अब वो खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वजह कि अब तक वो केंद्रीय कर्मचारी थे लेकिन निगमीकरकण के बाद वो सरकारी कर्मचारी नहीं रह जाएंगे।
की गेट मीटिंग

 

डीरेका कर्मचारियों का कहना है कि रेल मंत्रालय के आदेश के तहत 100 दिनों में डीरेका समेत रेलवे के सभी सातों उत्पादन इकाइयों एवं रेलवे का समस्त कारखानों के निगमित करने का तुगलकी आदेश निर्गत किया है यह विरोध उसी के लिए है। इस विरोध प्रदर्शन का तरीका पूरी तरह लोकतांत्रिक है। वो बांह में काली पट्टी बांध कर काम भी कर रहे हैं। कर्मचारी क्लब में बैठक से लेकर गेट मीटिंग तक हो रहा है। हर कर्मचारी आंदोलित है।

 

निगमीकरण के विरोध में आंदोलित डीरेका कर्मचारी

आंदोलन के चौथे दिन कारखाने का सायरन बजते ही हजारों की संख्या में डीरेका कर्मी पूर्वी गेट पर एकत्रित हुए जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिला कर्मी भी मौजूद थीं। जुलूस में महिला कर्मचारी हाथों में काला झंडा एवं निगमीकरण के विरोध में हाथों में तख्तियां लेकर सरकार विरोधी एवं निगमीकरण के विरोध में नारेबाजी करते हुए चल रही थीं। जुलूस प्रशासन भवन के समक्ष पहुंच कर प्रदर्शन सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए मेंस कांग्रेस ऑफ डीएलडब्लू के महामंत्री राजेश कुमार ने कहा कि चौकीदार तो देश की चौकीदारी करते करते पूजीवादियों की चौकीदारी करने लगा जिसमें कर्मचारियों में घोर निराशा का माहौल है, जिसे यूनियन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

हिंद मजदूर सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी डॉ प्रदीप शर्मा ने कहा कि यह पूर्ण रूप से पूंजीवादी समर्थित सरकार है जो किसी भी कीमत पर आम कर्मचारियों के हित में कभी भी काम नहीं कर सकती है। जिस देश के प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में अंतर हो देश का इससे बड़ा दुर्भाग्य और कुछ नहीं हो सकता है लेकिन भारत सरकार के निगमीकरण के प्रयासों को एआईआरएफ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। जरूरत पड़ी तो रेल का चक्का जाम करने का काम किया जाएगा।

डीएलडब्लू मेंस यूनियन के अमित यादव ने कहा कि जिस प्रकार से सरकार तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो घर घर से महिलाएं और बच्चे भी सड़क पर उतरने का काम करेंगे।

डीएम भट्ट ने कहा कि डीरेका बनारस की शान है जिसे किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा।

मेंस कांग्रेस के उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने जो वादा किया था कि डीरेका का निगमीकरण नहीं किया जाएगा अगर वह उसका अनुपालन नहीं कर पाते हैं तो कर्मचारियों की पत्नियां उन्हें चूड़ी भेजकर सम्मानित करने का भी काम करेंगी।

रेल मजदूर यूनियन के कोषाध्यक्ष सुशील कुमार सिंह ने कहा कि भारत सरकार जिस प्रकार से सरकारी संपत्तियों को पूंजीवादियों के हाथों में धीरे-धीरे सौंपने का काम कर रही है वह निराशाजनक है इसे हम सभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

डीएलडब्लू मजदूर संघ के दीपेश पांडेय ने कहा कि रेलवे कारखाने के निगमीकरण के मुद्दे को लेकर कर्मचारी बहुत दुखी व मर्माहत हैं।

डी एल डब्यूीरे मजदूर संघ के अखिलेश राय ने रेल चक्के को जाम करने की चेतावनी भी दी साथ ही साथ कर्मचारियों का आह्वान किया कि अगर कर्मचारियों की मांगों को न सुना गया तो दिल्ली बैठे नेताओं को यहां की औरतें चूड़ियां भेजेंगी।

एससी-एसटी एसोसिएशन के अध्यक्ष रूप सिंह मीणा ने कहा कि सरकार के निगमीकरण का फैसला समाज के दलित पिछड़े वर्ग के अधिकारों पर कुठाराघात है।
ओबीसी एसोसिएशन के महामंत्री हरिशंकर यादव ने सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध किया।

सभा में प्रमुख रूप से डीएलडब्लू मेंस यूनियन, मेंस कांग्रेस आफ डीएलडब्लू, डीएलडब्लू मजदूर संघ, रेल मजदूर यूनियन, एससी-एसटी एसोसिएशन, ओबीसी एसोसिएशन के महामंत्री गण एवं यूनियनो के पदाधिकारीयों ने भी सभा को संबोधित किया। सभा के अंत में संयुक्त सचिव कर्मचारी परिषद वी डी दुबे ने सरकार के निगमीकरण के फैसले के विरोध में लंबी लड़ाई लड़ने का आह्वान किया और क्षेत्रीय लोगों को भी इस आंदोलन से जुड़ने का आग्रह किया, जिनकी रोजी-रोटी डीरेका से जुड़ी है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रही दुर्गा ने कहा कि भारत सरकार महिलाओं को दुर्गा स्वरूप में आने का चुनौती न दें। मंच का संचालन कर्मचारी परिषद के सदस्य नवीन सिन्हा ने किया। मंच पर कर्मचारी परिषद के सदस्य विनोद सिंह, प्रदीप यादव, आलोक वर्मा के सा‍थ कृष्णव मोहन तिवारी, राजेंद्र पाल, विजय सिंह, अजय कुमार, अविनाश पाठक, अखिलेश राय, शशांक मिश्रा, राधा बल्ल,भ त्रिपाठी, रवि सिंह, नरेंद्र भंडारी व अरविंद प्रधान मौजूद रहे।

 

डीरेका कर्मचारियों को पीएम संसदीय कार्यालय जाने से रोकने को तैनात पुलिस

निकाली बाइक रैली
इससे पूर्व कर्मचारियों ने डीरेका बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले शुक्रवार को कारखाने के पूर्वी द्वार से बाइक रैली निकाली। बाइक रैली में हजारों की संख्या में डीरेका कर्मी हाथों में काला झंडा एवं बांहों पर काली पट्टी बांधकर चल रहे थे, जिसमें महिलाएं भी सैकड़ों की संख्या में मौजूद रही।

रैली कारखाने के पुर्वी द्वार से चलकर प्रशासन भवन से होते हुए सिनेमा हॉल, ईस्ट कॉलोनी होते हुए प्रशासन भवन चौराहे से होते हुए भुलनपुर के रास्ते पश्चिमी उपनगर जलालीपट्टी का भ्रमण करने के उपरांत कर्मचारी क्ल ब पर समाप्त हो गई । रास्ते में कर्मचारी आवासों से महिलाएं एवं बच्चों ने रैली आते ही सरकार विरोधी एवं निगमीकरण विरोधी नारों के साथ रैली में शामिल महिला एवं पुरुषों का हौसला बुलंद किया।

रैली के समापन के उपरांत यह सभा में तबदील हो गई जिसमें सभी यूनियन के महामंत्री डीएलडब्लू मेंस यूनियन से अरविंद श्रीवास्तव डीएलडब्लू रेल मजदूर यूनियन से राजेंद्र पाल डीएलडब्लू मजदूर संघ से कृष्ण मोहन तिवारी मेंस कांग्रेस आफ डीएलडब्ल्यू से आलोक वर्मा एससी/एसटी एसोसिएशन से सरदार सिंह ओबीसी एसोसिएशन से हरिशंकर यादव ने अपने विचार व्यक्त किए। सभा की अध्यक्षता संयुक्त सचिव डीएलडब्लू बीडी दुबे ने किया। रैली एवं सभा का नेतृत्व प्रमुख रूप से विनोद सिंह, अजीमुल हक , नवीन सिन्हात , प्रदीप यादव ,अरविंद प्रधान, सुशील सिंह, रवि सिंह, राकेश पांण्डे य, पन्नालाल, मृत्युंजय सिंह, दीपेश पांण्डे,य, रोहित शर्मा, रूप सिंह मीणा ,अमित कुमार, अरविंद यादव इत्यादि ने किया । डीरेका बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य अरविंद श्रीवास्तव महामंत्री डीएलडब्लू मेंस यूनियन में बताया 29 जून को दोपहर में एक बजे प्रधानमंत्री कार्यालय में रैली निकालकर पत्रक दिया जाएगा।

 

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned