कर्ज के बोझ से आखिर कब तक यूं ही मरते रहेंगे अन्नदाता

कर्ज के बोझ से आखिर कब तक यूं ही मरते रहेंगे अन्नदाता
Farmers Suicide

जून महीने में ही यूपी में किसानों की खुदकुशी के कई मामले आये सामने

अखिलेश त्रिपाठी
वाराणसी
. सोमवार को यूपी के कुशीनगर में गरीबी के बोझ तले किसान परिवार ने सामूहिक रूप से जहर खा लिया। घटना में किसान पिंटू और उसकी पत्नी चंदा की मौत हो गई, जबकि उसके दो बेटे जीवन मौत से जूझ रहे हैं। प्रदेश में किसानों की खुदकुशी का यह मामला नया नहीं है, आये दिन हमारे किसान अपनी जान दे रहे हैं। जून महीने में ही यूपी में किसानों की खुदकुशी के कई मामले सामने आये। देश में तो किसानों की खुदकुशी का आंकड़ा और भी भयावह है।

क्यों मौत को गले लगा रहे हैं किसान ?
हर जगह किसानों का एक ही हालत है कि या तो वो कर्ज के बोझ तले दबे हैं या फिर उनकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। बैंक से कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों को जब अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा तो मजबूरन किसान मौत को गले लगा लेते हैं । खेती की बढ़ती लागत और कृषि उत्पादों की गिरती क़ीमत किसानों की निराशा की सबसे बड़ी वजह है ।

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यूपी के कुशीनगर में किसान ने पूरे परिवार के साथ खाया जहर, दो की मौत


योगी सरकार में किसानों की खुदकुशी के मामले:
1. कुशीनगर में किसान ने गरीबी के बोझ तले किसान पिंटू ने परिवार के साथ खाया जहर, किसान और उसकी पत्नी की मौत
2. महोबा में किसान रामश्री ने कर्ज के बोझ के तले दबकर की खुदकुशी
3. कौशांबी में किसान रामबाबू ने आर्थिक तंगहाली के चलते फांसी लगा आत्महत्या कर लिया
4. कानपुर में कर्ज नहीं चुका पाने की स्थिति देखकर शिव कुमार ने खुदकुशी कर ली।
5. आगरा में किसान राजेश ने फसली ऋण नहीं चुका पाने की हालत में मौत को गले लगा लिया ।
6. मथुरा में किसान वीरेन्द्र ने आलू की खेती में हुए ​नुकसान के बाद ट्रेन से कटकर दी जान
7. झांसी में किसान  प्रमोद पटेल ने कर्ज अदायगी का कोई रास्ता निकलता नहीं देख जहर खाकर दी जान
8. लखीमपुर खीरी में किसान प्रभजोत ने कर्ज नहीं चुका पाने की हालत में मौत को गले लगाया।


यूपी में कई बड़े कर्जदार

देश के 10 बड़े कर्जदार राज्यों में उत्तर प्रदेश का पहला स्थान है।  प्रदेश के 79,08,100 किसान परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। यूपी के कुल 2.30 करोड़ किसानों में से 92.5 फीसद यानी 2.15 करोड़ किसान लघु व सीमांत श्रेणी में हैं। इनमें से 86.68 लाख लघु व सीमांत किसानों ने बैंकों से फसली ऋण ले रखा है। हालांकि योगी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में ही लघु व सीमांत किसानों को कर्जमाफी की सौगात देते हुए उनका एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ कर दिया था। मगर इस घोषणा से महज 86 लाख से अधिक लघु व सीमांत किसानों को लाभ होगा, जिन्होंने बैंकों से फसली ऋण ले रखा है ।  

पिछले कई सालों से राज्य और केंद्र सरकार किसानों की कर्ज माफी करती आ रही है, बावजूद इसके किसानों की खुदकुशी का मामला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। कर्ज माफी भी किसानों की खुदकुशी रोकने का स्थायी समाधान नहीं दिख रहा है, ऐसे में जरूरत है सरकार को चाहिये कि वह कर्ज माफी के साथ- साथ किसानों के आय बढ़ाने के विकल्प तलाश करे ।
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