पूर्व कुलपति डॉ लालजी सिंह की अंत्येष्टि से भी दूरी बनाई BHU के दिग्गजों ने

डीएनए फिंगर प्रिंट के जनक डॉ लालजी सिंह का पार्थव शरीर पंच तत्व में विलीन। काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर हुई अंत्येष्टि।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 11 Dec 2017, 10:12 PM IST

वाराणसी. इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि डीएनए फिंगर प्रिंट के जनक और पूर्व कुलपति डॉ लालजी सिंह की अंत्येष्टि से भी बीएचयू के दिग्गज दूर ही रहे। उन्हें कहीं बाहर भी नहीं जाना था। बस चंद कदम पर काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर ही उनकी अंत्येष्टि सोमवार की शाम हुई। लेकिन इस मौके पर बीएचयू से गिने चुने लोग ही पहुंचे उसमें भी ज्यादातर पूर्व अधिकारी ही नजर आए। शाम करीब सात बजे डॉ सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैत्रिक गांव केलवारी, जौनपुर से काशी लाया गया। यहां मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि हुई। मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र अभिषेक सिंह ने दी।

डॉ लालजी सिंह की

बता दें कि डॉ सिंह का रविवार की रात करीब 10 बजे बीएचयू के सर सुदर लाल चिकित्सायलय में निधन हो गया था। दरअसल वह रविवार की शाम अपने एक शादी समारोह में शरीक होने जौनपुर से बनारस आए थे। शादी में शरीक होने के बाद वह हैदराबाद जाने के लिए बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे कि उनके सीने में दर्द की शिकायत हुई। आननःफानन में हवाई अड्डे पर ही उनका प्राथमिक उपचार किया गया। लेकिन हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें बीएचयू भेज दिया गया था। बीएचयू अस्पताल में उन्हें आईसीयू मे रखा गया, इलाज शुरू हुआ लेकिन चिकित्सकों के प्रयास कामयाब न हो सके और रात करीब 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। देर रात ही पार्थिव शरीर उनके पैत्रिक गांव केलवारी,जौनपुर ले जाया गया जहां डॉ सिंह के निधन की खबर लगते ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। रविवार को दोपहर बाद पैत्रिक गांव से शवयात्रा निकली जो शाम करीब सात बजे मणिकर्णिका घाट पहुंची। यहां पूरे विधि विधान से पद्मश्री डॉ सिंह का अंतिम संस्कार किया गया।

डॉ लालजी सिंह की

अंत्येष्टि में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह, पूर्व चीफ प्रॉक्टर डॉ सुरेंद्र सिंह, छात्र अधिष्ठाता डॉ एमपी सिंह, पूर्व कुलसचिव डॉ केपी उपाध्याय, विश्वविद्यालय की सेवा से अलग हो चुके न्यरो सर्जन डॉ विविके शर्मा, सरसुंदर लाल चिकित्सालय के पूर्व एमएस डॉ द्विवेदी, महिला महाविद्यालय की कुछ शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।

डॉ लालजी सिंह की

बता दें कि डॉ सिंह अगस्त 2011 से अगस्त 2014 तक बीएचयू के कुलपति रहे। हैदराबाद स्थित कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र के निदेशक पद पर भी उन्होने काम किया। वह देश के नामी जीवविज्ञानी रहे। सेक्स निर्धारण का आणविक आधार, डीएनए फिंगरप्रिंट, वन्य जीव संरक्षण, रेशमकीट जीनोम विश्लेषण, मानव जीनोम एवं प्राचीन डीएनए अध्ययन आदि उनके रुचिकिर विषय रहे। महज 45 वर्ष की अवस्था में उनके 230 शोध प्रबंध प्रकाशित हुए। डॉ सिंह का नाम उन गिने चुने कुलपतियों में लिया जाता है जिन्होने बतौर कुलपति बीएचयू से पूरा वेतन नहीं लिया। वह तो संस्थापक पंडित महामना मदन मोहन मालवीय की व्यवस्था है कि बिना वेतन यहां कोई काम नहीं करेगा। ऐसे में टोकन मनी के रूप में डॉ सिंह महज हर महीने एक रुपये बतौर वेतन लेते रहे।

डॉ सिंह ने बीएचयू से बायो टेक्नॉलजी में मास्टर डिग्री हासिल की। वह गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे। उन्होंने बीएचयू से ही पीएचडी की और एसोसिएट प्रोफेसर बने। कोलकाता विश्वविद्यालय व लंदन जाकर डीएनए फिंगर प्रिंट पर शोध किया। देश के न्यायालयों में फिंगर प्रिंट को मान्यता दिलाई। दस वर्षों तक विदेश में काम करने के बाद लौटे तो हैदराबाद में सीडीएफडी के कार्यकारी निदेशक बने। अपनी जन्मस्थली कलवारी जौनपुर में जीनोम फाउंडेशन की स्थापना की। देश के अत्याधुनिक उपकरणों से लैस 360 बेड वाला बीएचयू का ट्रामा सेंटर आप के ही कार्यकाल में बना। डॉ सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट था बोनमैरो ट्रांसप्लांटेशन की सुविधा प्रदान करना जो आज ट्राम सेंटर परिसर में है।

ये डॉ लालजी सिंह ही थे जिन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियो के लिए 24 घंटे साइबर लाइब्रेरी की सुविधा मुहैया कराई। जिस सुविधा को उनके उत्तराधिकारी प्रो जीसी त्रिपाठी ने छीन लिया। इसके लिए विद्यार्थियों ने आंदोलन शुरू किया जो 2014 से 2017 तक अनवरत जारी रहा। जो सुविधा छात्र-छात्राओँ के अध्ययन, शोध के लिए दी गई उस पर उनके उत्तराधिकारी ने कहा कि साइबर लाइब्रेरी में विद्यार्थी पोर्न फिल्म देखते हैं। डॉ सिंह द्वार साइबर लाइब्रेरी की सुविधा देने के पीछे एक मजेदार कहानी भी परिसर में प्रचलित है। एक दिन जब वह रात के वक्त अपने वाहन से परिसर के बाहर से आ रहे थे कुछ छात्र लैंप पोस्ट के नीचे अध्ययन कर रहे थे। तब उन्होंने इसका कारण पूछा तो छात्रों ने बिजली संकट बताया। इसके बाद ही उन्होंने तय किया कि ऐसे सारे छात्रों को 24 घंटे लाइब्रेरी की सुविधा दी जाएगी और वह भी साइबर लाइब्रेरी के रूप में।

समाजवादी छात्रसभा ने निकाला कैंडिल मार्च दी श्रद्धांजलि

समाजवादी छात्र सभा ने निकाला कैंडिल मार्च

महामना के कर्मलोक इस विश्वविद्यालय में पढ़ें ,यहां के कुलपति रहे और यहीं आखरी सांस लेने वाले बीएचयू के कुलपति डॉ लालजी सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए समाजवादी छात्रसभा ने बिड़ला छात्रावास से सिंह द्वार तक कैंडिल मार्च निकाला। छात्रों का कहना था कि डॉ सिंह इस महान विश्वविद्यालय के छात्र और संरक्षक दोनों रहें। वह अपने दोनों ही दायित्वों के लिए सदैव याद किये जाएंगे। श्रद्धांजलि देने व कैंडिल मार्च में आशुतोष सिंह यीशु, बिट्टू, सिद्धार्थ, आकाश, गौरव, सौरभ, आशुतोष त्रिपाठी प्रशांत, क्षितिज, सितेश, समीर, रवि, विशाल, अखिलेश, शिवानंद, पवन, संटू आदी शामिल रहे।

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