UPSC TOPPER डॉ.अार्तिका शुक्ला ने पत्रिका से साझा किया सक्सेस मंत्र

upsc topper का पत्रिका के साथ पहला interview

Devesh Singh
वाराणसी. काशी की बेटी डॉ.अार्तिका शुक्ला व उनके परिवार के वर्षों की मेहनत मंगलवार को सार्थक हो गयी। यूपीएससी में देश में चौथे स्थान व यूपी में टॉप करने वाली डॉ.अार्तिका ने पत्रिका के संग खास बातचीत की। इस दौरान वह काफी उत्साहित नजर आयीं। साथ ही भविष्य की योजनाओं पर भी खुल कर बात की।
मंगलवार को ही डॉ.अार्तिका बनारस पहुंची हैं। उन्हें यूपीएससी के रिजल्ट की जानकारी हुई तो खुशी से झूम उठीं। डॉ.अार्तिका ने कहा कि माता-पिता व भाई के सहयोग से यह मुकाम मिला है। पिता डॉ.बृजेश शुक्ला चिकित्सक हैं और आईएमए के पूर्व सचिव भी रह चुके हैं। माता लीना एक गृहणी हैं जिन्होंने सफलता पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।
वर्ष 2012 में भाई ने भी यूपीएससी की परीक्षा पास की
डॉ.अार्तिका के भाई उत्सव शुक्ला भी बहुत मेधावी छात्र है और वर्ष 2012 में यूपीएससी की परीक्षा पास की है। वर्तमान समय में भाई गुवाहाटी में असिस्टेंट ऑपरेशन मैनेजर पद पर तैनात है। डॉ.अार्तिका को सबसे अधिक खुशी इस बात की है कि भाई ने ही उन्हें यह राह दिखायी । भाई खुद आईएएस निकाल चुका है और उसने ही डॉ.आर्किता को पढ़ाया है, जिससे वह आज इस मुकाम पर पहुंची हैं।
डिजीटल में काम करना चाहती हैं डॉ.अार्तिका
डॉ.अार्तिका शुक्ला ने पत्रिका से खास बातचीत में कहा कि डिजीटल इंडिया, अॅानलाइन क्षेत्र में बहुत काम होना बाकी है। आईएएस बनने के बाद इस क्षेत्र में काम करना चाहती हैं, जिससे अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके।
एक साल से फेसबुक से बनायी दूरी
डॉ.अार्तिका शुक्ला को आईएएस बनने का इतना शौक था कि उन्होंने एक साल से फेसबुक से दूरी बना ली थी। अधिकतर समय व पढ़ाई में देती थी, जिसके चलते आज सफलता का नया मुकाम हासिल किया है।
मेहनत से पढ़ो तो सब मिलता है
डॉ.अार्तिका ने कहा कि यदि मेहनत के साथ पढ़ाई की जाये तो जीवन में सभी सपने पूरे होते हैं। पिछले चार माह से वह पीजीआई चंडीगढ़ से अवकाश पर हैं क्योंकि उनका एक ही मकसद आईएएस बनना है जो अब पूरा हुआ है। डॉ.आर्तिका ने कहा कि दिन भर पढऩे के बजाए कुछ ही घ्ंाटे अध्ययन किया जाये। 
मां से सीखा खाना बनाना
डॉ.अार्तिका ने कहा कि उनका अधिकांश समय नई दिल्ली में बीता है। मां से खाना बनाना सीखा है अब खाने बनाने में रूचि हो गयी है। आज जो भी मिला है वह मां ने ही दिया है। डॉ.अार्तिका को नॉवेल पढऩे का बहुत शौक है।

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Devesh Singh
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