पाकिस्तान की ऊपरी ताकतें नहीं चाहती कि मोदी का नूर चमके

पाकिस्तान की ऊपरी ताकतें नहीं चाहती कि मोदी का नूर चमके
ghulam ali in varanasi

गजल सम्राट गुलाम अली ने कहा सुरों के जरिए आए हैं प्यार बांटने, विरोध के सवाल पर जानिए क्या कहा पाकिस्तान कलाकार ने

वाराणसी. पाकिस्तान में कुछ ऊपरी ताकतें ऐसी हैं जो नहीं चाहती कि दोनों देशों के बीच संबंध में मिठास आए। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नूर विश्व फलक पर चमके, कुछ लोगों को यह बर्दाश्त नहीं। गौरतलब है कि बीते वर्ष वाराणसी आए गुलाम अली ने कहा कि था मोदी में वह नूर दिखता है जो दोनों देश के बीच मोहब्बत पैदा करते हैं। दोनों देश में सिर्फ दीवारें हैं लेकिन दीवार के दोनों तरफ अपने ही भाई-बंधु हैं।
 संकट मोचन संगीत समारोह में शिकरत करने आए पाकिस्तान के गजल सम्राट गुलाम अली ने सोमवार को नदेसर स्थित एक तारांकित होटल में मीडिया से बातचीत में कहा कि हिंदूवादी संगठनों द्वारा विरोध किए जाने के सवाल पर कहा कहा कि हर घर में चार बर्तन होंगे तो आपस में टकराएंगे ही। अच्छे लोगों का काम अच्छा करना है और खराब लोगों का खराब। मोहब्बत जितना बढ़ेगा दोनों मुल्क के आवाम के लिए उतना ही अच्छा होगा। मेरा विरोध करने वालों को यहीं कहना चाहूंगा कि चार दिन की जिंदगी है प्यार-मोहब्बत से गुजार लो। मैं तो लाहौर में गाता हूं लेकिन उसे अमेरिका में भी सुना जाता है। 

कलाकार को आतंक से कोई लेना-देना नहीं
पठानकोठ में हुए हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर गुलाम अली ने कहा कि आतंकी घटनाओं में किसी कलाकार की भूमिका नहीं है। मैं तो कलाकार हूं और मेरी कोशिश है ं कि सुरों को सरहद न बांटे। मेरा काम लोगों के बीच प्यार-मोहब्बत बांटना है, मेरा गला साठ साल से संगीत गा रहा है। गुलाम अली उस सवाल को टाल गए जब उनसे पूछा गया कि भारतीय कलाकारों को फिर क्यों पाकिस्तान अपने मुल्क में आने से रोकता है जबकि उनकी कोशिश भी दोनों देशों के बीच प्यार बांटने की होती है। 

राजनीति की बातें क्यों
 विरोध के बीच काशी पहुंचे गुलाम अली मीडिया से बातचीत के दौरान कुछ पल के लिए झुंझला गए और कहा कि यह पहली बार हो रहा है कि मुझसे संगीत से अधिक राजनीति के बारे में पूछा जा रहा है। मुझे राजनीति में न घसीटें, मुझसे गीत-संगीत के बारे में ही पूछें।
 
सुरक्षा के घेरे में रहे गुलाम अली
पाकिस्तानी कलाकार के हो रहे विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन ने गुलाम अली की सुरक्षा के बाबत तगड़े इंतजाम कर रखे थे। यहां तक कि मीडिया से बातचीत के दौरान भी सुरक्षाकर्मी घेरा बनाए रखे थे। शिवसेना व हियुवा की ओर से विरोध-प्रदर्शन के एलान पर खुफिया तंत्र ने नदेसर स्थित होटल के भीतर व बाहर अपना जाल बिछा रखा था। 
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