scriptGold plate will be installed on inner walls of Kashi Vishwanath Garbha Griha | अब काशी विश्वनाथ मंदिर की ये दीवारें भी दमकेंगी स्वर्णिम आभा से | Patrika News

अब काशी विश्वनाथ मंदिर की ये दीवारें भी दमकेंगी स्वर्णिम आभा से

काशी विश्वनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण का एक चरण जरूर पूरा हो गया है काशी विश्वनाथ धाम के रूप में। लेकिन मंदिर को और भव्य स्वरूप देने का काम अभी जारी है। धीर-धीरे इन कार्यों को मूर्त रूप देने की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में अब बाबा के गर्भ गृह को स्वर्णिण आभा देने की तैयारी है।

वाराणसी

Published: January 13, 2022 04:09:02 pm

वाराणसी. काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण भले ही हो गया हो, पर मंदिर परिसर को और भव्य स्वरूप देने की कवायद जारी है। मंदिर की बाहरी दरो-दीवारों को खूबसूरती का रंग देने के बाद अब बाबा के गर्भ गृह को स्वर्णिम आभा से दमकाने की तैयारी है।
काशी विश्वनाथ मंदिर
काशी विश्वनाथ मंदिर
बाबा विश्वनाथ के गर्भ गृह की बाहरी दीवारों पर पहले से लगा है सोने का पत्तर

बाबा विश्वनाथ के गर्भ गृह की बाहरी दीवारों पर पहले से ही सोने के पत्तर लगे हैं। मंदिर की बाहरी दीवारें व शिखर को महाराजा रणजीत सिंह ने स्वर्णमंडित कराया था। बीच में मंदिर प्रशासन की अदूरदर्शिता के चलते उन पर एनामल पेंट लगा दिया गया था जिससे उसकी चमक फीकी पड़ने लगी थी। लेकिन विश्वनाथ धाम के निर्माण के दौरान विशेषज्ञों की सलाह पर उस एनामल पेंट को हटा कर फिर से उन दीवारों को दमका दिया गया है।
अब गर्भ गृह की भीतरी दीवारों पर स्वर्ण पत्तर लगाने की कवायद

अब काशी विश्वनाथ के गर्भ गृह की भीतरी दीवारों पर स्वर्ण पत्तर लगा कर उसे भी दमकाने की तैयारी है। दरअसल इसके लिए दक्षिणी भारत के एक स्वर्ण व्यवसायी ने पहल की है। वह दक्षिण भारतीय पिछले मंदिर आया था, तभी गर्भगृह की भीतरी दीवारों को स्वर्णिम आभा देने की इच्छा जताई थी। तब उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र प्रमुख, कमिश्नर दीपक अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी इच्छा प्रकट की थी।
कमिश्नर की पहल पर कार्रवाई शुरू

अब कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने गर्भगृह की भीतरी दीवारों स्वर्ण पत्तर लगाने की कार्रवाई के तहत नाप-जोख शुरू कर दिया गया है। सर्वे आदि की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। इसकी पुष्टि मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने भी की है।
बीएचयू के विशषज्ञ कर चुके हैं मनाही

वैसे बताया जा रहा है कि काफी पहले गर्भगृह के भीतर स्वर्ण पत्तर लगाने की पहल की गई थी। स्टीमेट भी बन गया था। लकिन तब आईआईटी बीएचयू के विशेषज्ञों ने यह कह कर ऐसा करने से मना कर दिया था कि मंदिर की आंतरिक दीवारें सोने के पत्तर चढ़ाने काबिल नहीं हैं। सोने का पत्तर लगाने से जो अतिरिक्त भार पड़ेगा वो ये प्राचीन दीवारें सहन नहीं कर पाएंगी।

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