scriptGyanvapi Masjid Vajukhana in Nine Locker CRPF On Security Varanasi | ज्ञानवापी मस्जिद: नौ तालों में कैद वजूखाना, दो शिफ्टों में निगरानी कर रहे CRPF जवान, महंतो का नया दावा | Patrika News

ज्ञानवापी मस्जिद: नौ तालों में कैद वजूखाना, दो शिफ्टों में निगरानी कर रहे CRPF जवान, महंतो का नया दावा

Gyanvapi Masjid Update: ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर के अंदर वजूखाने और वजू के स्थान पर 9 ताले लगाकर उसे सील कर दिया है। यहां सीआरपीएफ तैनात कर दी गयी है। इसी बीच महंत का एक नया दावा आ गया।

वाराणसी

Updated: May 18, 2022 03:11:39 pm

काशी में ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को लेकर चलकर जिला न्यायालय में बुधवार को अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। वाराणसी के अधिवक्ता हड़ताल पर हैं। सुनवाई को लेकर कोर्ट की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। वकीलों ने 20 मई को भी हड़ताल पर रहने की बात कही है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश के बाद वाराणसी के जिलाधिकारी ने ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर के अंदर वजूखाने और वजू के स्थान पर 9 ताले लगाकर उसे सील कर दिया है। यहां सीआरपीएफ तैनात कर दी गयी है। और 24 घंटे का पहरा बैठा दिया गया है। इस बीच सर्वे में मिले शिवलिंग जैसी आकृति को लेकर विवाद जारी है। विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने शिवलिंग को परिषद को सौंपने की मांग की है। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि जो शिवलिंग मिला है वह असली नहीं है। असली शिवलिंग मंदिर में सुरक्षित है।
Kashi Vishwanath Mandir and Gyanvapi Campus
Kashi Vishwanath Mandir and Gyanvapi Campus
20 को भी जारी रहेगी अधिवक्ताओं का स्ट्राइक

वाराणसी में अश्विनी कुमार, अधिवक्ता ने कहा- उत्तर प्रदेश के सचिव ने अधिवक्ताओं को अमर्यादित शब्द बोले हैं इसलिए वाराणसी के अधिवक्ता बुधवार को स्ट्राइक पर हैं और इसके मद्देनजऱ 20 मई को भी स्ट्राइक रहेगी। अधिवक्ता को अराजक तत्व से संबोधित करना बहुत बड़ी बात है।
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कड़ी की गई वजूखाने की सुरक्षा

वजू के उस स्थान पर छोटा सरोवर है, उसे भी सील कर दिया गया है। क्योंकि यह इलाका पहले से लोहे के बेरिकेड और जालों से घिरा हुआ है। वजूखाने की सुरक्षा में सीआरपीएफ के दो जवानों की ड्यूटी, शिफ्ट के हिसाब से चौबीस घंटे लगायी गयी है। हर शिफ्ट में दो-दो जवान डटे रहेंगे। हर शिफ्ट में मंदिर सुरक्षा के प्रमुख डिप्टी एसपी रैंक के सुरक्षा अधिकारी और सीआरपीएफ के कमांडेंट औचक निरीक्षण करेंगे।
शिवलिंग को न्यास परिषद को सौंपने की मांग

इस बीच ज्ञानवापी परिसर विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। आलमगीर मस्जिद के सर्वे के दौरान मिली शिवलिंग जैसी आकृति को विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद को सौंपने की मांग परिषद के अध्यक्ष नागेंद्र पांडे पांडेय ने की है। उनका कहना है कि फैसला आने तक वजूखाने में मिला शिवलिंग काशी विश्वनाथ न्यास परिषद की सुपुर्दगी में सौंप दिया जाए।
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जहां शिवलिंग मिला वो वजूखाना कैसे?

प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और मुस्लिम पक्ष उस आकृति को फव्वारा बता रहा है। जबकि वादी पक्ष और हिंदू जनमानस उसे शिवलिंग करार दे रहा है। नागेंद्र पांडेय का कहना है कि जहां बाबा विश्वेश्वर का शिवलिंग मिला वो स्थल 'वजूखाना' कैसे हो सकता है?
काशी विश्वनाथ के महंत का दावा, असल शिवलिंग मंदिर में सुरक्षित

इस बीच सोशल मीडिया पर काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत का एक दावा काफी वायरल हो रहा है। मंदिर के महंत राजेंद्र तिवारी ने दावा किया है कि प्राचीन शिवलिंग को उनके पुरखे औरंगजेब के कालखंड में बचाने में कामयाब हुए थे और वह आज भी काशी विश्वनाथ मंदिर में सुरक्षित है और उसी की पूजा होती है। ज्ञानवापी में क्या मिला? इस के सवाल पर महंत कहते हैं कि पहले तो हर पत्थर को शिवलिंग नहीं कहा जाना चाहिए, जबतक मैं इसे देख न लूं इसके बारे में कुछ कह नहीं सकता। महंत का कहना है कि ज्ञानवापी के ऐतिहासिक मंदिर का तम्लीक-नामा (संपत्ति का कानूनी कागजात) दाराशिकोह द्वारा दिया गया था जो कि हमारे पूर्वजों के नाम से है, वह आज भी मेरे पास मौजूद है।
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ज्ञानवापी मामले को देखेगा पर्सनल लॉ बोर्ड

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की वर्चुअल मीटिंग में तय हुआ है कि ज्ञानवापी मस्जिद केस को बोर्ड टेक ओवर करेगा। इसके लिए एक लीगल कमेटी बनेगी यही कमेटी मामले की पैरवी करेगी। ज्ञानवापी विवाद को लेकर मुस्लिम पक्ष राष्ट्रपति से भी मुलाकात करेगा। इसके अलावा मथुरा और अन्य महत्वपूर्ण मस्जिदों के मामलों में भी पर्सनल लॉ बोर्ड पैरवी करेगा। इस संबंध में ऐतिहासिक मस्जिदों में जुमे की नमाज के दौरान लोगों को जागरूक किया जाएगा। बोर्ड की मीटिंग में असदुद्दीन ओवैसी, राबे हसनी नदवी समेत तमाम सदस्य मौजूद रहे। एआईएमपीएलबी के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद बनारस, मस्जिद है और रहेगी। उन्होंने कहा कि 1937 के दीन मोहम्मद बनाव राज्य सचिव मामले में अदालत ने मौखिक गवाही और दस्तावेजों में यह निर्धारित किया गया है कि पूरा परिसर ही मुस्लिम वक्फ बोर्ड के स्वामित्व के पास है और मुस्लमानों को इसमें नमाज अदा करने का हक है।

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