Hanuman Jayanti: काशी में फीका रहा हनुमान जयंती का उत्सव, संकट मोचन मंदिर पहुंचे गिनती के श्रद्घालु

Hanuman Jayanti: कोरोना संकट के चलते बीते साल की तरह इस बार भी वाराणसी में हनुमान जयंती का उत्सव फीका रहा। कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता के चलते संकटमोचन मंदिर में गिनती के श्रद्घालुओं ने दर्शन किये, काफी श्रद्घालु बाहर से ही मत्था टेककर चले गए। हनुमान ध्वजा यात्राएं भी नहीं निकलीं। संकटमोचन संगीत समारोह भी सीमित ही होगा।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी.

Hanuman Jayanti: बजरंगबली का उत्सव, बजरंग बली का दिन यानि मंगलवार, पर न मंदिर में श्रद्घालओं की वो भीड़ और न वो उत्सव का माहौल। बीेते साल की तरह इस साल भी धर्म नगरी वाराणसी में हनुमान जयंती का उत्सव कोरोना संक्रमण के खौफ और खामोशी में कहीं खो गया। कोरोना के खौफ के चलते श्रद्घालुओं ने घरों में रहकर बजरंगबली की पूजा अर्चना की तो कोविड प्रोटोकाॅल के प्रतिबंधों की वजह से भी मजबूरन दूर रहना पड़ा। खुद संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र कोरोन पाॅजिटिव होने के बाद आईसोलेट हैं। मंदिर में आम दिनों से भी बेहद कम गिने-चुने सिर्फ वही लोग पहुंचे जिनके पास तीन दिन पुरानी आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट थी। ऐसे भी श्रद्घालु रहे जो मंदिर के बाहर से ही मत्था टेककर चले गए। भव्य शोभायात्रा के बजाय प्रतीकात्मक हनुमान ध्वजा लेकर दो लोग पहुंचे और पूजा अर्चना कर परंपरा का निर्वाह किया। श्रद्घालु उदास रहे और शोभायात्रा निकालने वालों के दिल में भी आयोजन न कर पाने की टीस रही। हर किसी की हनुमान जयंती पर एक ही प्रार्थना रही, 'नासै रोग हरै सब पीरा...'


मंगलवार को बनारस के सबसे बड़े हनुमान मंदिर 'संकटमोचन मंदिर' से श्रद्घालुओं का हुजूम गायब था। सुबह 05.30 बजे आरती के बाद खुल जाने वाला मंदिर का कपाट नाइट कर्फ्यू के प्रतिबंध की वजह से सुबह सात बजे खोला गया। कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट दिखाने पर गिनती के लोग दर्शन-पूजन के लिये मंदिर में गए। जिनके पास रिपोर्ट नहीं थी वो बाहर से ही मत्था टेककर वापस चले गए। 10.30 बजे भाेग के लिये मंदिर बंद हुआ और फिर 11.20 से 12.15 और तीन बजे से रात आठ बजे तक खुला। इस दौरान धर्मसंघ और भिखारीपुर से निकलने वाले विशाल शोभायात्रा की जगह समिति के दो लोग छोटी ध्वजा लेकर पहुंचे और प्रतिकात्मक रूप से परंपरा का निर्वाह किया।


धर्मसंघ से निकलने वाले जुलूस के आयोजकों में से एक सुरेश तुलस्यान ने बताया कि लाल लंगोटा लाल निशान जय बजरंगी जय हनुमान के जयकारे के साथ हर साल हनुमान जयंती पर भव्य हनुमान ध्वजा यात्रा निकलती है। पर यह दूसरा साल है जब शोभायात्रा नहीं निकली है। उन्होंने बताया कि धर्मसंघ से हनुमान ध्वजा प्रभातफेरी समिति वाराणसी द्वारा शहरी क्षेत्र और भिखरीपुर से भी एक भव्य ध्वजा यात्रा निकलती है, जिसमें रथ, पालकी और भव्य झांकियां होती हैं। इनमें हुजुम उमड़ता है। उन्होंने बताया कि इस बार हमने हनुमान ध्वजा यात्रा को स्थगित कर ऑनलाइन हनुमान जन्मोत्सव का आयोजन किया है।


प्रतिबंधों को देखते हुए हनुमान जयंती के ऑनालाइन आयोजन किये गए। हनुमान जयंती से जुड़ा सबसे बड़ा आयोजन छह दिवसीय संकटमोचन संगीत समारोह इस बार ऑलाइन के साथ ऑफलाइन भी होगा पर उसमें सिर्फ 50 लोग श्रोता के रूप में मौजूर रह पाएंगे। महंत पं. विश्वंभरनाथ मिश्र ने बताया कि पिछली बार से अलग इस बार मंदिर परिसर में एक से छह मई तक संगीत समारोह का आयोजन कोविड प्रोटोकाॅल और गाइडलाइन को पूरा करते हुए होगा। दो स्थानीय कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। इसमें 50 ऐसे श्रोता भी होंगे। कालाकारों और श्रोताओं के लिये तीन दिन पुराना आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट जरूरी होगी। बताया कि इसके लिये वार्ता जारी है।


काशी की परंपराओं के जानकार साहित्यकार अत्रि भारद्वाज बताते हैं कि हनुमान जी संगीत प्रेमी और संगीत ज्ञाता थे। इसीलिये उनकी जयंती पर संगीत समारोह आयोजित किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठान विशेष होता है। दो से तीन दिन की भजन संध्या, फिर छह दिनों तक संकटमोचन संगीत समारोह होता है। पूरी रात संगीत प्रेमी संगीत की स्वरलहरियों के साथ डूबते उतराते रहते हैं। पर पिछले दो साल से सब सूना है। उन्होंने बताया कि पं. भीमसेन जोशी, जयराज, हरी प्रसाद चौरसिया, राजन साजन, गुलाम अली जैसे देश-विदेश के ख्यातिलब्ध संगीत कलाकार इसका हिस्सा बन चुके हैं।

रफतउद्दीन फरीद
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