UP Election- BJP में बड़े पैमाने पर बगावत के संकेत

UP Election- BJP में बड़े पैमाने पर बगावत के संकेत
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जानिये कहां क्या चल रहा पार्टी में, क्यों मिल रहे बगावत के संकेत...

डॉ. अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा में बड़े पैमाने पर बगावत के संकेत मिल रहे हैं। खास तौर पर सीटिंग एमएलए के स्तर पर बगावत की तैयारी है। वजह एक है इन सभी सीटिंग विधायकों को पार्टी नेतृत्व की ओर से इस बात के संकेत मिले हैं कि उन्हें 2017 के चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा। इसे लेकर केवल विधायक ही नहीं उनके समर्थकों के साथ वे लोग भी बगावत के मूड में हैं जो अपना दावा तो पेश कर रहे हैं पर पार्टी उन्हें तवज्जो नहीं दे रही। पीएम के संसदीय क्षेत्र सहित पूर्वांचल की 147 सीटों में से 60 फीसदी सीटों पर यही हाल है।


पीएम की काशी में ही बड़े पैमाने पर बगावत के आसार
भाजपा में बगावत की बात करें तो अकेले पीएम के संसदीय क्षेत्र काशी में ही जबरदस्त घमासान मचा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो जिस तरह से पार्टी नेतृत्व ने नवांगतुकों को तरजीह दी है उससे पार्टी के पुरनिये काफी आहत हैं। इसमें वे विधायक भी हैं जिन्होंने लगातार अपने क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर कब्जा जमा रखा है। कोई परिवार लगातार चुनाव जीत रहा है तो कोई अकेले दम पर प्रतिद्वंद्वियों को शिकस्त देने का माद्दा रखता है। अपनी काबिलियत एक दो नहीं आधा दर्जन दफे साबित की है। 

बगावत सिर्फ पुरनियों में ही नहीं
बगावत सिर्फ पुरनियों में हो ऐसा नहीं है। कुछ नए विधायक भी हैं जिन्होंने 2012 में पहली बार विधानसभा का मुख देखा और चुनाव जीतने के बाद से लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। लेकिन चर्चाओं की मानें तो नेतृत्व उनका भी पत्ता काटने की तैयारी में है। यहां से केंद्र सरकार के अति वरिष्ठ मंत्री के बेटे ने दावेदारी पेश की है। माना यह जा रहा है कि बनारस की राजनीति में अच्छी खासी दखल रखने वाले उन वरिष्ठ मंत्री ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके बेटे को टिकट न मिले।

पीएम के कार्यक्रम से भी कई ने कसा किनारा
मजदूर दिवस पर जब पीएम अपने संसदीय क्षेत्र में थे। डीरेका और अस्सी घाट पर उनके कार्यक्रम थे, लेकिन इन दोनों ही जगह पार्टी के पुरानिये कम ही नजर आए। शहर दक्षिणी में कार्यक्रम और वहां के विधायक ही कार्यक्रम से दूर रहे। वहीं निषादों की राजनीति के माहिर 2007 व 2012 में कांग्रेस के टिकट पर शहर दक्षिणी से चुनाव लड़ने वाले डॉ. दया शंकर मिश्र दयालू अस्सी घाट पर पीएम के इर्द-गिर्द घूमते नजर आए। उनकी यह फोटो फेसबुक पर भी काफी वाइरल हुई। पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो भाजपा के भीष्म पितामह नाम से विख्यात श्याम देव राय चौधरी दादा को पार्टी से संकेत मिल गए हैं कि उन्हें इस बार प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा। सूत्रों की मानें तो पार्टी को भी इस बात के संकेत मिल गए हैं कि दादा को टिकट न मिलने की सूरत में अगर वह बगावत करते हैं तो भाजपा के गढ़ के रूप में दर्ज शहर दक्षिणी की सीट उनके हाथ से निकल भी सकती है। ऐसे में दादा को कहीं का राज्पाल बनाने या विधानसपरिषद में भेजे जाने का प्रलोभन दिए जाने की भी चर्चा है। अब देखना यह है कि दादा और पार्टी नेतृत्व में समझौता हो पात है या नहीं। वैसे भी एक चर्चा दो सालों से हर जुबान पर है कि आम जन की हर समस्या पर आंदोलन करने, अनशन पर बैठने वाले जुझारू लोकप्रिय नेता को आखिर क्या हो गया कि दो साल में उन्होंने एक भी मुद्दा नहीं उठाया। पेयजल, बिजली, सड़क क्या सारी व्यवस्था दुरुस्त हो गई है जो दादा इतने शांत हैं। चर्चाओं में यह भी है कि पीएम स्तर से ही दादा को हासिये पर डाला गया। उन्हें ज्यादा मुखर न होने की हिदायत तक दी गई। लिहाजा वह शांत तो हो गए पर उनकी कार्यशैली उन्हें बार-बार कुरेदती रही। ऐसे में अब अगर दादा जैसी शख्सियत को लेकर बगावत की चर्चा भी उठे तो पार्टी किस दिशा में जा रही है यह बताने की जरूरत नहीं।

शहर कैंट में भी है बगावत के आसार
शहर कैंट वर्षों से भाजपा क्या जनसंघ की स्थापना काल से जुड़े, काशी में पार्टी को खड़ा करने में पूरा जीवन लगाने वाले हरिश्चंद्र श्रीवास्तव हरीश जी खुद या उनकी पत्नी कैंट विधानसभा पर सालों से कब्जा जामाए हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं हाल ही में हरीश जी के निधन और पत्नी डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव को एज फैक्टर बता कर इस बार परिवार को विधानसभा के संभावित प्रत्याशियों की फहरिस्त से बाहर किया जा रहा है। उनकी जगह बलिया के एक ऐसे शख्स की दावेदारी मजबूती से रखी जा रही है जो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अत्यंत करीबी का बनारस और पूर्वांचल में कारोबार देखते हैं। इन्हें हाल ही में पार्टी में शामिल किया गया है। इनकी दावेदारी के बाद पार्टी के कुछ पुराने और पूर्व में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले लोगों ने भी बगावत का मन बना लिया है। अगरग ऐसा होता है तो यह सीट भी पार्टी के हाथ से निकल सकती है।

पूर्वांचल की 60 फीसदी सीटों पर बगावत के आसार
पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा के अंदर पूर्वांचल की 147 सीटों में से 60 फीसदी सीटों पर बगावत के संकेत अभी से मिलने लगे हैं जबकि पार्टी ने अभी प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। सूत्र बताते हैं कि उम्मीदवारों की घोषणा होते ही जोरदार बम फटेगा जिससे संभाल पाना पार्टी नेतृत्व के लिए आसान नहीं होगा। पार्टी आपराधिक छवि वाले प्रेदश अध्यक्ष को भी नहीं पचा पा रही है। पार्टी के दिग्गजों का कहना है कि वाराणसी सहित आस-पास के इलाकों में बाहुबलियों का ही बोलबाला है।

बाहुबलियों को तवज्जो भी बगावत का बड़ा कारण
पार्टी के अंदर ही अंदर सुलग रही चिंगारी की एक प्रमुख वजह वाराणसी सहित पूर्वांचल में बाहुबलियों को ज्यादा तवज्जो देना भी है। पुरनिये और निष्ठावान भाजपाई तो एमएलसी चुनाव को ही उदाहरण के रूप में पेश कर रहे हैं। आरोप है कि जिस तरह से पार्टी ने माफिया बृजेश सिंह को वाकओवर दिया उसका संदेश साफ था। उनका परिवार पहले से ही पार्टी नेतृत्व के करीब रहा है। अब उस परिवार से कुछ और लोग दावा पेश करने लगे हैं। इनके अलावा भी कुछ ऐसे बाहुबलि हैं जिन्हें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के करीबियों ने 2014 में पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। अब ये सभी अपने-अपने इलाके में टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। यह हाल चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, बलिया, आजमगढ़, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, सुल्तालनपुर तक में है।
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