बनारस कांग्रेस ने किया शर्मशार, इंचार्ज जनरल सेक्रेट्री को मांगनी पड़ी माफी

रामनगर पालिका परिषद चेयरमैन के निष्कासन का प्रकरण। प्रदेश प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर रेखा रामनगर अध्यक्ष पद पर बहाल।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 04 Jan 2018, 01:41 PM IST

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. यू तो प्रायः किसी न किसी नेता के उलटे सीधे बयान को लेकर कांग्रेस कई बार शर्मशार हुई है लेकिन सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने का जहां तक सवाल है तो अक्सर बयान देने वाले पर दबाव बना कर उससे माफी मंगवाई जाती रही है। यह पहला मौका है जब किसी इकाई के किसी फैसले के चलते पार्टी के आला पदाधिकारी को मीडिया के सामने माफी मांगनी पड़ी हो, यह बड़ा मामला है। इसे लेकर पार्टी के अंदरखाने हलचल मची है। बड़े नेता इस पर बयान देने से कतरा रहे हैं। लेकिन दबी जुबान वो इसे स्वीकार करते हैं कि जिला कमेटी से बड़ी गलती हुई थी। इतना ही नहीं कुछ नेता ऐसे भी हैं जो यह सवाल उठा रहे हैं कि अगर इंचार्ज जनरल सेक्रेट्री माफी मांगते हैं, इकाई के किसी निर्णय को गलत ठहराते हैं, इकाई के निर्णय को रद्द करते हैं तो उस इकाई के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसे लेकर कांग्रेस में जबरदस्त आक्रोश है जे कभी भी फूट सकता है। आम कांग्रेसी स्थानीय बड़े नेताओं के रवैये को लेकर भी नाखुश है। उनका कहना है कि किसी को प्रदेश अध्यक्ष बनना है इसलिए खामोश है तो किसी को 2019 के लोकसभा का टिकट चाहिए इसलिए चुप्पी साधे है यह कतई स्वीकार नहीं है, ये कब तक खामोश रहेंगे। क्या पार्टी को रसातल में ले जा कर उनका मौन भंग होगा? दरअसल यह प्रकरण है पार्टी की रामनगर इकाई की अध्यक्ष व पालिका परिषद की चेयरमैन रेखा शर्मा के निष्कासन और निष्कासन वापसी का। इस मुद्दे कुछ लोग बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि जिला इकाई के पदाधिकारियों को किसी तरह की कार्रवाई से पहले पार्टी के संविधान का भी अध्ययन कर लेना चाहिए।

बात है रामनगर अध्यक्ष और रामनगर पालिका परिषद की चेयरमैन रेखा शर्मा के निष्कासन का। यह निष्कासन जिला कांग्रेस कमेटी ने किया। वह भी यह सब जानते हुए कि रेखा शर्मा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मेंबर हैं। लेकिन तब अनुशासन का मामला बना था और जिला अध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा ने इसे गंभीरता से लेते हुए कदम उठाया और रेखा शर्मा को पांच साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। अब उसी प्रकरण पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव, राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता और प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद को नेशलन मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी पड़ी। उन्होंने जिला अध्यक्ष की कार्रवाई को अवैध ठहराया। फिर रेखा शर्मा को ससम्मान पार्टी में वापस ले लिया। इतना ही नहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुशासन समिति के प्रभारी ने रेखा शर्मा को उनके रामनगर अध्यक्ष पद पर भी कायम कर दिया।

 

इस मुद्दे पर बुधवार को उत्तर प्रदेश के प्रभारी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने पार्लियामेंट हाउस में ही मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि जिला कांग्रेस कमेटी ने गलत तरीके से रेखा शर्मा का निष्कासन किया। जो 10 साल से रामनगर की अध्यक्ष रहीं और इतनी ही अवधि से पालिका परिषद की अध्यक्ष रहीं उन्हें टिकट न देना भी गलत था और उसके बाद पार्टी से निकालना भी गलत था। उन्होंने कहा कि रेखा शर्मा ने अकेले दम पर निर्दल चुनाव लड़ा और वह तीसरी बार जीत कर आईं इसके लिए हम उन्हें बधाई देते हैं तथा उनसे क्षमा चाहते हैं। आजाद ने बड़े फक्र से कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में नगर निकाय की तीन सीटें हैं जिसमें से कांग्रेस को दो सीटों पर कामयाबी मिली है। हम वहां पहले काफी कमजोर रहा करते थे, लेकिन इस बार हमने बड़ी सफलता अर्जित करते हुए दो सीटों गंगापुर टाउन एरिया और अब रामनगर पालिका परिषद में भी कांग्रेस का चेयरमैन हो गया है। इस मौके पर उन्होंने वाराणसी नगर निगम के मेयर पद के लिए कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली शालिनी यादव का भी मीडिया से परिचय कराया और कहा कि यह भी बडी उपलब्धि है कि शालिनी ने एक लाख 13 हजार वोट पाया। हालांकि आजाद को कुछ गलत सूचना दी गई जिसके आधार पर उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब कांग्रेस मेयर के चुनाव में 40-45 हजार से ज्यादा वोट पा कर दूसरे स्थान पर आई। बता दें कि इससे पहले 2007 में 80 हजार और 2012 में भी 70 हजार से ज्यादा मत मिले थे। दोनों बार कांग्रेस दूसरे नंबर पर ही रही थी।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति के प्रभारी ड़ॉ आरपी त्रिपाठी ने प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर के निर्देश के क्रम में कहा है कि रेखा शर्मा के विरुद्ध जिला कमेटी की कार्रवाई गलत है। जांच में ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया। लिहाजा रेखा शर्मा का न केवल निष्कासन वापस लिया जाता है बल्कि उन्हें उनके पद (रामनगर अध्यक्ष) पर भी कायम रखा जाता है।

Ajay Chaturvedi
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