BIG BREAKING: बीएचयू ब्लास्ट के पीछे इंडियन मुजाहिदीन 

BIG BREAKING: बीएचयू ब्लास्ट के पीछे इंडियन मुजाहिदीन 
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शीतला घाट पर हुए आतंकी विस्फोट सरीखा था बीएचयू की इमरजेंसी में हुआ धमाका, पढि़ए ये पूरी खबर

विकास बागी

वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अस्पताल में शनिवार को हुए ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ होने के संकेत मिल रहे हैं। 7 दिसंबर 2010 को शीतला घाट पर हुए आतंकी विस्फोट से बीएचयू ब्लास्ट के तार जुड़ रहे हैं। इसका खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने किया है। जानकारी के अनुसार शीतला घाट पर विस्फोट केमिकल के जरिए कराया गया था। बीएचयू में भी धमाके के बाद केमिकल की जिस तरह दुर्गंध आ रही थी उससे बीएचयू प्रशासन के उस दावे को बल मिल रहा है कि यह एसी की गैस पाइप लाइन के फटने का नहीं वरन बीएचयू को दहलाने की साजिश थी। हालांकि स्थानीय जिला प्रशासन व पुलिस इसे महज हादसा मान रही है। पुलिस हादसे के बाबत अपना तर्क रख रही है कि हादसे में घायल किसी शख्स के शरीर पर जले के निशान नहीं हैं, सिर्फ चोट हैं। जहां पर विस्फोटक रखा रहता है, धमाके के बाद उसके चारों तरफ गढ्ढा हो जाता है जो बीएचयू में नहीं हुआ। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल तो सब कुछ जांच एजेंसियों की फोरेंसिक रिपोर्ट पर निर्भर है लेकिन यह तो तय है कि कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ है। 

शीतला घाट पर हुआ था केमिकल से धमाका

सात दिसंबर 2010 को वाराणसी के शीतला घाट पर हुए आतंकी धमाके के दौरान दो दर्जन से अधिक लोग जख्मी हुए थे और एक मासूम की मौत हो गई थी। धमाके के पीछे इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था। बीते दिनों पूछताछ में इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक यासीन भटकल जिसे तीन साल पहले सुरक्षा एजेंसियों ने भारत-नेपाल की सीमा से गिरफ्तार किया था, उसने विस्फोट से संबंधित राज खोले। भटकल ने पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों को बताया कि शीतला घाट पर विस्फोट उन लोगों ने हाइड्रोजन पराक्साइड के जरिए किया था। यहीं वजह थी विस्फोट के बाद जांच एजेंसियों को वहां बारूद व अन्य विस्फोटक से संबधित कोई वस्तु नहीं मिली थी। भटकल गिरफ्तार न हुआ होता तो पता लगाना लगभग नामुमकिन था कि शीतला घाट पर हुए विस्फोट में क्या इस्तेमाल हुआ था। 

बदले ट्रेंड का शिकार बना बीएचयू 

सूत्रों की माने तो आतंकियों के बदले ट्रेंड का शिकार बीएचयू हुआ है। इंडियन मुजाहिदीन के गुर्गों को अब परंपरागंत विस्फोटकों के बजाय केमिकल के जरिए विस्फोट करने की ट्रेनिंग दी जा रही है आतंकी गुटों द्वारा। शीतला घाट पर भी केमिकल के ही जरिए विस्फोट कराया गया था। शीतला घाट पर हुए विस्फोट के बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने हालात को लेकर जो बयान दिए थे, कुछ वैसा ही बयान बीएचयू इमरजेंसी में भर्ती मरीजों ने दिया। केमिकल के जरिए धमाका कितना जबरदस्त हो सकता है इसका प्रमाण शीतला घाट पर हुए धमाके के प्रत्यक्षदर्शी बता सकते हैं। बीएचयू में भी धमाका इतना जबरदस्त था कि एक दीवार गिरने के साथ ही पिलर गिर गया गया था। बंद कमरे में विस्फोट के बाद भी इमरजेंसी में लगे तमाम शीशे चकनाचूर हो गए थे। सुरक्षा एजेंसियां का जोर है कि पुलिस प्रशासन कको इस मामले की गंभीरता से जांच करानी चाहिए। ऐसा न हो कि एसी और सिलेंडर के शोर में सच छिप जाए। 

पहले भी आतंकी साजिश को बता चुके मामूली धमाका

वाराणसी पुलिस पहले भी आतंकी धमाके को मामूली धमाका बताकर अपनी किरकिरी करा चुकी है। गौरतलब है कि लगभग 11 वर्ष पूर्व 2005 में दशाश्वमेध घाट पर विस्फोट हुआ था। जिला पुलिस ने विस्फोट के बाबत कहा कि सिलेंडर फटने से धमाका हुआ है जबकि बाद में जांच एजेंसियों ने यह साबित किया कि दशाश्वमेध पर सिलेंडर नहीं फटा था वरन आतंकियों ने विस्फोट किया था। 

पीएम मोदी के प्रेम के चलते बढ़ गई संवेदनशीलता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीएचयू व डीरेका प्रेम के बारे में पूरी दुनिया जानती है। आतंकियों के निशाने पर पहले से काशी रही है। मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के बाद से आतंकी लगातार काशी में विस्फोट की साजिश रच रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों से लेकर गृह विभाग ने काशी विश्वनाथ मंदिर, घाट, बीएचयू, डीरेका, संकटमोचन समेत अन्य प्रमुख स्थानों को संवेदनशील एरिया की श्रेणी में रखा है। बीएचयू प्रशासन खुद लंबे समय से परिसर की सुरक्षा-व्यवस्था के लिए पैरा मिलिट्री फोर्स की डिमांड कर रहा है। बीएचयू प्रशासन की मांग के बीच हुए धमाके ने काशी की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 


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