​​​​​आजमगढ़ बवाल, एक कड़वा सच, जिसे पढ़कर आप विचलित हो सकते हैं

​​​​​आजमगढ़ बवाल, एक कड़वा सच, जिसे पढ़कर आप विचलित हो सकते हैं
police force in azamgarh

सपा की खामोशी से जलने को तैयार खड़ा है आजमगढ़, भाजपा देना चाहती है आग को हवा

Abhishek Srivastava, Varanasi

हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये
अपनी कुरसी के लिए जज्बात को मत छेड़िये
हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िये
आज सुबह ही एक पत्रकार साथी ने अदम गोंड़वी की यह रचना मुझे वाट्सएप किया। साथ ही लिखा कि अदम साहब की यह लाइन आजमगढ़ की वर्तमान स्थिति पर बिल्कुल फिट बैठती है। मैं भी सोच में पड़ गया। सत्य ही तो कहा मेरे उस पत्रकार साथी ने, आजमगढ़ में जो हो रहा है, उसे कैसे कमकर आका जाए। पिछले डेढ़ माह में कैफी आजमी के इस शहर को कई बार जलाने की कोशिश हो चुकी है। यूपी बोर्ड में सबसे अधिक टॉपर्स बच्चे देने वाले आजमगढ़ में हिंदुओं और मुस्लिमों को बांटा जा रहा है, सियासी दल बवाल को राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं, यह उन्हें नहीं दिख रहा कि घर तो एक इंसान का जल रहा है, लेकिन वे फिर भी पूछ रहे हैं इस बार हमला हिंदुओं ने किया या मुस्लिमों ने। दुखद यह कि इस समय जिसे संकटमोचक की भूमिका में होना चाहिए वह दोनों तरफ से खुद घिर गई है, एक पक्ष पर कार्रवाई करे तो दूसरा नाराज और दूसरे पर करे तो पहला।... और कहीं दोनों पर कर दी तो सत्ता में वापस आने का रास्ता ही बंद। प्रदेश की सपा सरकार इस समय सांप और नेवले की लड़ाई में कुछ ऐसे ही घिरी हुई है। कारण भी साफ है जिन दो पक्षों में अधिक विवाद है, उसमें एक यादव हैं और दूसरे मुस्लिम। इसलिए सरकार को बवाल से अधिक वोट बैंक की चिंता है। इसी कश्मकश में स्थिति यह हो गई कि बवाल धीरे-धीरे पूरे जिले को आगोश में लेने लगा और अब स्थिति नियंत्रित करने के लिए आरएएफ को मैदान में उतारना पड़ा...। यानी कुल मिलाकर जिस विवाद को डेढ़ माह पहले निपटाया जा सकता था, उसे ट्यूमर से कैंसर बनने दिया गया। कारण साफ आजमगढ़ एक मुजफ्फरनगर बनता है तो बनने दिया जाए, वोट बैंक अपना बचा रहे। ऐसे में बीजेपी भी कहां कम रहने वाली, वह भी आग को हवा देने में लग गई।
अब बात करते हैं इस विवाद के ज़ड़ की। दरअसल, होली के दिन फरीदाबाद में रंग पोतने को लेकर पहली बार विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप धारण कर लिया। करीब तीन घंटे पथराव हुआ और पुलिस जीप सहित कई वाहन तोड़े गए। पुलिस ने यहां राजनीतिक दबाव में दोनों पक्षों की बजाय सिर्फ एक पक्ष पर कार्रवाई कर मामले को खत्म करने की बजाय चिंगारी सुलगने दी। इसके बाद फूलपुूर के भोरमऊ राजभर बस्ती और कतरानूरपुर गांव के लोगों के बीच बच्चों के विवाद के चलते दो समुदाय के लोग आपस में भिड़े। इसके बाद एक समुदाय के लोगाें ने भोरमऊ नहर के पास हमला कर राजभर बस्ती के एक व्यक्ति को घायल कर दिया, बाद में उसकी मौत हो गई। इस मामले को भी पुलिस ने दबा दिया। देखते ही देखते फिर दो समुदायों का विवाद आजमगढ़ में फैलने लगा। 22 अप्रैल को एक सोची समझी राजनीतिक साजिश के तहत अरबी लिखे एक प्लेट को एक धर्म ग्रंथ की आयत बताकर बवाल को हवा दे दी गई। नतीजतन मुबारकपुर कस्बे में भारी बवाल हुआ। काफी तोड़फोड़ हुई। फिर 3 मई का पवई के रज्जाकपुर व फरीदाबाद में बवाल, 12 मई को आजमगढ़ शहर व फरीदाबाद में स्थित बिगड़ी यहां भी बवाल का कारण वही जो मुबारक विवाद का था। 14 मई को खोदादादपुर में तनाव बढ़ा और देखते ही देखते दलित बस्ती में आगजनी हुई तो एसडीएम सहित एक युवक घायल हो गया। कई वाहन तोड़े गये। पुलिस को स्थित नियंत्रण में करने के लिए आंसू गैस, लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग का सहारा लेना पड़ा। सीओ भी उपद्रवियों की गोली से घायल हो गए। 
खैर इन घटनाओं का उदाहरण इसलिए भी कि आजगमढ़ में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच इस तरह की स्थिति उभरे तीन दशक हो गए। ऐसा नहीं कि आजमगढ़ में दंगा नहीं हुआ, हुआ था लेकिन वह 80 के दशक में। इसके बाद जो भी बड़े बवाल हुए वह शिया और सुन्नी के बीच हुए। लेकिन वर्तमान में जो हालात बन रहे हैं, वह कुछ और इशारा कर रहे हैं। जो भवायवह है, जिससे जानमाल का नुकसान आम इंसान का होता है, न कि किसी राजनीतिक चेहरे का। 
अब आप पढ़िए तीन बयान जो इन बवाल के पीड़ित हैं... और खुद तय करिए
कमली देवी 
(सबकुछ लूट लिया। धमकी दे रहे हैं। कहते है कि पाकिस्तान बना देंगे।)
भोला यादव
(पांच सात सौ की संख्या में लोगों ने घेर लिया, फिर पथराव व हवाई फायरिंग शरू कर दिए। जब हम भागने लगे तो हमें लक्ष्य कर फायरिंग करने लगे, जिसमें गोली लग गई। पुलिस वहां मौजूद थी लेकिन कुछ नहीं किया।)
हाजी मिस्फीक
(पुलिस मनमानी कर रही है। यदि पुलिस गंभीर होती तो इस तरह की नौबत नहीं आती। हमारा बेटा मुजम्मिल अपने मित्र रईस के साथ दाउदपुर चक्की पर बैठा था। तभी एसओ गंभीरपुर ने पानी मांगा। तीनों ने उन्हें चाय पानी कराया। तभी वहां से डीएम का काफिला गुजरा और तीनों को अपने साथ ले गए, जबकि तीनो पूरी तरह निर्दोष हैं।)
और अंत में पढ़िए एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने क्या कहा
जिले में स्थिति अभी नियंत्रण में है। आरएएफ के साथ ही पीएसी भी तैनात है। पुलिस हर स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
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