BHU की बीएड स्पेशल डिग्री को फर्जी बता कर युवाओं को नौकरी से निकाल रही झारखंड सरकार

BHU की बीएड स्पेशल डिग्री को फर्जी बता कर युवाओं को नौकरी से निकाल रही झारखंड सरकार
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Ajay Chaturvedi | Updated: 18 Jul 2019, 04:12:33 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India


-BHU बीएड स्पेशल डिग्री होल्डर्स पहुंचे केंद्रीय कार्यालय
- पीड़ित छात्र-छात्राओं से पत्रिका ने की बातचीत
- छात्रों ने कहा, हम पर फर्जीवाड़ा का आरोप लगा कर मुकदमा करने की दी जा रही धमकी
-सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय
-पीएम और एमएचआरडी से हस्तक्षेप की मांग
-छात्रो ने कहा ये केवल झारखंड का मामला नहीं देश के कई राज्यों में ऐसा हो रहा

वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के बीएड स्पेशल डिग्री धारक छात्र-छात्राओं को उनकी डिग्री को फर्जी बता कर झारखंड सहित अनेक राज्य से निकाल रहे हैँ। ताजा घटना झारखंड की है जहां की सरकार ने बीएचयू की इस डिग्री को ही फर्जी घोषित कर दिया है, इतना ही नहीं वहां टीजीटी और पीजीटी क्वालीफाई कर शिक्षक बने छात्र-छात्रओं को नौकरी से निकाले जाने के बाद सरकार उन पर फर्जीवाड़ा का केस दर्ज करने की धमकी दे रही है। ऐसे छात्र-छात्राओं ने गुरुवार को बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। वो कुलपति से मिल कर अपनी बात रखना चाहते थे ताकि उनका भविष्य और विश्वविद्यालय की साख कायम रह सके। इस मुद्दे पर कुलपति प्रो राकेश भटनागर ने छात्रों से कहा कि मुद्दा गंभीर है, विश्वविद्यालय में हो रहे कुलपति सम्मेलन में यह मसला रखा जाएगा। वैसे इस मसले को आपलोग खुद एमएचआरडी के समक्ष रखें तो ज्यादा बेहतर होगा।

झारखंड सरकार का नोटिस

छात्रों का कहना है कि 2015-16 से अब तक बीएचयू से बीएड स्पेशल डिग्री हासिल कर टीजीटी और पीजीटी करने क्वालीफाई करने के बाद वो कई राज्यो में बतौर शिक्षक चुने गए। लेकिन प्रमाण पत्र के सत्यापन का दौर आते ही उन पर गाज गिरनी शुरू हो गई। पीड़ित छात्र अरुण कुमार ने पत्रिका को बताया कि कुलपति से वार्ता हुई, उन्होंने कहा कि हम लोग कुलपति सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाएंगे। वैसे बेहतर होगा कि आप एमएचआरडी, एनसीटीई चले जाएं, वहीं समाधान होगा। यानी कुल मिला कर केवल आश्वासन, कोई निर्णय नहीं।


उन्होंने कहा कि बीएड स्पेशल डिग्री धारक छात्र-छात्राओं में अवसाद का भाव उत्पन्न हो गया है। हम सभी प्रशिक्षुओं के सामने बेरोजगारी की समस्या व आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में बीएड स्पेशल डिग्री को सामान्य स्कूल में समावेशी शिक्षक के रूप में नियुक्त होने का अवसर दिया जाए अथवा पूरे देश में बीएड स्पेशल डिग्री बंद कर दी जाए, ताकि भविष्य में छात्र-छात्राओं को बेरोजगारी से बचाया जा सके।

झारखंड सरकार का नोटिस

पीड़ित छात्र अरुण कुमार ने पत्रिका संग बातचीत में निम्नलिखित तथ्य प्रस्तुत करते हुए अपनी मांगें रखीं जो इस प्रकार हैं...

1- वर्तमान में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (आरपीडब्ल्यूडी एक्ट-2016) तथा निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 (आरटीई एक्ट-2009) की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए बीए़ड स्पेशल डिग्री अर्जित अभ्यर्थियों को सामान्य स्कूलों में सामान्य शिक्षक भर्ती में चयन किया जाए ताकि समावेशी शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त हो सके।

2- एनसीटीई तथा एमएचआरडी अपने नियमों में बीएड स्पेशल डिग्री को पैरा-2 व पैरा-3बी में स्थान देने के बावजूद (23 अगस्त 2010 भारत का राजपत्र एनसीटीई) बीएड विशेष शिक्षा डिग्री को सामान्य स्कूलों में सामान्य शिक्षक पर पर भर्ती के लिए न्यायालय एवं राज्यों की अनुकंपा पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे नियुक्ति अवधि तक मानसिक रूप से अवसाद ग्रस्त रहते हैं।

3- समय-समय पर उच्च न्यायालय, दिल्ली व उच्च न्यायालय इलाहाबाद व उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ ने बीएड स्पेशल डिग्री को बीएचयू से बेहतर का दर्जा देते हुए सामान्य स्कूलों में सामान्य शिक्षक पद पर चयित करने का आदेश दिया है।

छात्रों का आग्रह है कि हम सभी बीएड स्पेशल डिग्री धारक छात्र-छात्राओं को विशेष शिक्षक का दर्जा न दे कर समावेशई शिक्षक के रूप में परिभाषित किया जाए। साथ ही एनसीटीआई व एमएचआरडी को सुझाव दिया जाए कि बीएड स्पेशल प्रशिक्षित स्नातक डिग्री को सामान्य स्कूलों में समावेशी शिक्षक के रूप में नियुक्त किया जाए ताकि आरटीई एक्ट 2009 व आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 व भारतीय पुनर्वास परिषद और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी परिपत्र (17 जनवरी, 2018) व मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी परिपत्र (14 जनवरी 2019) की प्रासंगिकता व लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

बीएचयू शिक्षा संकाय का स्पष्टीकरण वाला पत्र
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