जूनियर इंजीनियरों का आंदोलन जारी, विद्युत व्यवस्था चरमराई, प्रबंधन बना मूक दर्शक

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 29 Sep 2018, 06:59 PM IST

Varanasi, Uttar Pradesh, India

जूनियर इंजीनियरों का आंदोलन, उपवास

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इस बीच बिजली अभियंताओ का 48 घंटे का सामुहिक उपवास शनिवार को पूरा हुआ। केंद्रीय संचालन समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य केदार तिवारी ने सामूहिक उपवास पर बैठे क्षेत्रीय अध्यक्ष सर्वेश शुक्ल समेत संमस्त सैकड़ो अनशनकारियों को जूस पिलाकर उपवास तोड़वाया। लेकिन अभियंताओ का आंदोलन जारी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी के तहत मुख्य अभियंता (वितरण) कार्यालय भिखारीपुर के समक्ष अभियंताओं ने शनिवार को भी धरना-प्रदर्शन जारी रखा। अभियंताओं ने ऊर्जा प्रबंधन से अपनी न्यायायोचित मांगों एवं वेतन विसंगति को दूर करने की मांग की।

 

जूनियर इंजीनियर संगठन के विशेष आमंत्रित सदस्य केदार तिवारी ने मांग की कि अवर अभियन्ताओं को ग्रेड वेतन 4600 रुपये एवं प्रारम्भिक वेतन मान 12,540 रुपये किए जाने संबंधी कारपोरेशन के ओदश की प्रभावी तिथि 01 जनवरी 2006 की जाय, ताकि विभिन्न वर्षो में नियुक्त अवर अभियन्ताओं में उत्पन्न वेतन विसंगति को दूर की जा सकें। पर्यवेक्षक आई पी सिंह ने अपने कहा की 14 फरवरी 2007 को उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन द्वारा जारी आदेश के अनुसार अनुमन्य समयबद्ध वेतनमान की व्यवस्था को सातवें वेतन आयोग में तत्काल बहाल किया जाय। साथ ही अवर अभियन्ताओं को 09,14 एवं 19 वर्षो पर प्रथम ए.सी.पी. सहायक अभियन्ता पद का, द्वितीय ए.सी.पी. अधिशासी अभियन्ता पद का तथा तृतीय ए.सी.पी. अधीक्षण अभियन्ता पद का प्रदान किया जाय। उन्होंने कहा की प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में बहुत सी महत्वपूर्ण योजनाएं चल रही हैं जिनको पूर्ण कराने के लिए अवर अभियन्ता, प्रोन्नत अभियन्ता दिन-रात कड़ी मेहनत से कार्य कर लक्ष्य प्रप्ति के लिए समर्पित हैं। लेकिन सामग्री और जनशक्ति की अत्यधिक कमी के कारण प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को अपेक्षा अनुरूप सेवा उपलब्ध कराने में भारी समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है।

बताया कि यार्ड-स्टिक के अनुसार लगभग 3000 अवर अभियंताओं के पद रिक्त है। अवर अभियंता एवं अभियन्ता के पदो का सृजन वर्षो से लंबित है, पर कारपोरेशन द्वारा स्थाई व्यवस्था में पूर्ण कालिक अवर अभियन्ताओं की नियुक्ति न कर अस्थाई व्यवस्थाएं मिशन मैनेजर, मिशन एसोसिएट, अवर अभियन्ता (प्रभारी) की जा रही है, जो प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टोलरेन्स नीति के सर्वथा विपरीत भ्रष्टाचार को पोषित करने वाला है।

 

 

वाराणसी. निजीकरण करने की मंशा से मिशन मैजेनर,मिशन एसोसिएट से वितरण क्षेत्र में भी कार्य कराने के तुगलकी फरमान के विरोध में चल रहे जूनियर इंजीनियरों के आंदोलन का असर अब दिखने लगा है। वाराणसी सहित प्रदेश भर में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कहीं कोई फाल्ट आंदोलन की अवधि में दुरुस्त नहीं किए जा रहे। यही नही शाम पांच बजे के बाद कोई जूनियर इंजीनियर फील्ड में नजर नहीं आ रहा। यहां तक कि उनके सीयूजी नंबर भी बंद मिल रहे हैं।

 

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