काशी की इस बेटी को सलाम, डॉक्टरों ने मान ली थी हार, दौड़ कर बन गई इंडियन एथलीट

 काशी की इस बेटी को सलाम, डॉक्टरों ने मान ली थी हार, दौड़ कर बन गई इंडियन एथलीट
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जानें इस बेटी की कहानी, उसी की जुबानी, पत्रिका पर एक्सक्लूसिव। ज्योतिमा का एक लक्ष्य एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड लाना।

डॉ. अजय कृष्ण चतुर्वेदी


वाराणसी.
काशी की इस बेटी को सलाम जिसने न केवल अपनी गंभीर बीमारी को दूर भगाया बल्कि बीमारी से मुक्ति के लिए जो रास्ता चुना उसने उसे अंतर्राष्ट्रीय एथलीट बना दिया। ऐसी एथलीट जिसने कभी सपने में सोचा भी न था कि एक बीमारी उसे इस मुकाम तक पहुंचा देगी। 2014 में वह बीमार हुई और दो साल बाद ही स्टेट और अगले साल ही नेशनल टीम में चुन ली गई। अब उसका चयन इंडियन टीम में हो गया है और वह सितंबर में चाइना में होने वाले एशिया कप मास्टर्स एथलीट चैंपियनशिप के लिए हो गया है।



हम बात कर रहे हैं डॉ. ज्योतिमा की। ज्योतिमा ने 2010 में बीएचयू से पीएचडी की। उसी साल उनकी शादी हो गई। 2013 में उन्होंने एक बेटे को जन्मा। लेकिन उसके बाद से वह बीमार रहने लगीं। इलाज कराया तो डॉक्टरों ने उन्हें कार्डियोलॉजिस्ट के पास भेज दिया। कार्डियोलॉजिस्ट ने सारी जांच कराई, जांच में पता चला कि उनका केलोस्ट्रास (एलटीएम) बहुत बढ़ गया है।  इसका इलाज शुरू हुआ पर आराम नहीं हुआ तो डॉक्टर ने उन्हें रोज 5 किलोमीटर की दौड़ लगाने की सलाह दी। ज्योतिमा ने डॉक्टर की सलाह मानी और रोजाना दौड़ लगानी शुरू कर दी। धीरे-धीरे वह रोग से तो मुक्त हो ही गई। साथ ही इस प्रयास में वह कब एथलीट बन गई, उसे भी नहीं पता।


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डॉ.ज्योतिमा ने पत्रिका संग खास बातचीत में यह जानकारी दी। बताया कि उनके पति डॉ. शैलेंद्र कुमार बीएचयू के हिस्ट्री ऑफ आर्ट में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और वह खुद ग्राम्यांचल कॉलेज में टीचर हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रैक्टिस के दौरान ही मास्टर खेलो में भाग लिया। दिसंबर 2016 में स्टेट रिप्रेजेंट किया। फिर फरवरी 2016 में हैदराबाद में हुई मास्टर्स चैंपियनशिप में भाग लिया  जहां न सिर्फ तीसरा स्थान मिला बल्कि चाइना में होने वाली एशियन मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप के लिए इंडियन टीम में चयन हो गया।


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पहले बीमारी फिर घरेलू  काम काज, उसके तहत पति को विश्वविद्यालय भेजना। चार साल के बच्चे का पालन पोषण और खुद की नौकरी के साथ खेल के लिए वक्त निकालना। सचमुच इस जज्बे को सलाम करने का मन होता है। इतनी सारी जिम्मेदारियों के साथ खेल में ये उपलब्धि हासिल करना बड़ी कामयाबी तो है ही साथ ही यह उनके जुनून को दर्शाता है।

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ज्योतिमा अब 3000 हजार मीटर स्पर्धा में एशिया की धाविकाओं संग मुकाबला करेंगी। इसके लिए वह लगातार तैयारी में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि पहले महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मैदान में ही तैयारी करती रहीं फिर डॉ. संपूर्णा नंद स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचीं और आजकल वहीं रोजाना मेहनत कर रही हैं। एक ही लक्ष्य है एशियन मास्टर्स एथलेटिक्स मीट में स्वर्ण पदक हासिल करना।


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