काशी के किसान हुए स्मार्ट, उपभोक्ता तक खुद पहुंचाएंगे सब्जी व अनाज

राजनीति का दौर खत्म, पीएम के संसदीय क्षेत्र के किसान मेक इन इंडिया के तहत अपने प्रॉडक्ट के साथ जल्द पहुंचेगे उपभोक्ता के दरवाजे। स्मार्ट कार्ड से होगी

By: Ajay Chaturvedi

Published: 21 Aug 2017, 03:03 PM IST

varanasi

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के किसानों ने पीएम के मेक इन इंडिया के कांसेप्ट को पूरी तरह से अख्तियार कर लिया है। वे किसी को मोहताज नहीं। उन्होंने अपने प्रोडक्ट को उपभोक्ता तक पहुंचाने की पूरी तैयारी कर ली है। अब इनका इस्तेमाल न राजनेता कर पाएंगे न बिचौलिये। ये खुद अपने प्रॉडक्ट की पैकेजिंग करेंगे। उसे उपभोक्ता तक पहुंचाएगे। वह भी स्मार्ट कार्ड के साथ। आप अपने डेविड व क्रेडिट कार्ड से सब्जी से लेकर अनाज व दुग्द्ध उत्पाद पा सकेंगे। इसके लिए इन्होंने अभी हाल ही में दो दिन का प्रशिक्षण हासिल किया है। बस कुछ दिन और ये किसान आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे। तो तैयार रहें वाराणसी और आसपास के किसानों की इस क्रांतिकारी कदम से कदमताल करने के लिए। बता दें कि देश भर में किसानों के मुद्दे पर हो रही राजनीति ने इन्हें तोड़ कर रख दिया है। ऐसे में इन्होंने कुछ क्रांतिकारी कदम उठाने की ठानी और अब वे अपने मकसद में कामयाब होने को तैयार हैं। अब किसान नेताओं के जाल में फंसकर धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम नहीं करेंगे। पत्रिका ने वाराणसी और आसपास के किसानों की इस अनोखी क्रांति की खबर पहले भी चलाई थी। बताया था कि सब कुछ ठीक रहा तो पूर्वांचल के किसान किसी के मोहताज न होंगे। दरअसल किसानों ने अपनी मेहनत और लगन को ही अपना हथियार बना कर कुछ नया करने की ठानी है। इस पर धीरे-धीरे सधी चाल आगे बढ़े और अब खुद अपने उत्पाद को बाजार में उतारने जा रहे है जिसके तहत ये खुद की कंपनी बनाकर किसी व्यावसायिक कंपनी की तरह अपने कृषि उत्पादों की मार्केटिंग करेंगे। इस क्रम में वाराणसी के किसानों को नबार्ड के सहयोग से ढालपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान केंद्र में सब्जियों की गुणवत्ता के साथ उत्पादकता बढ़ाने और बिक्री के लिए मंडियों और बिचौलियों पर आश्रित न रह कर खुद अपना सामान ग्राहक तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित किया गया। गत 18 और 19 अगस्त को हुए इस प्रशिक्षण शिविर को आयोजित करने वाली संस्था प्रोग्रेसिव रिसर्च वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के कन्हैया सिंह के अनुसार अब बहुत हो चुका। किसान अब प्रोडक्ट बेचने को दर दर भटके और उसपर भी सही कीमत न मिले, ये नहीं चलेगा। उन्होंने बताया कि आराजी लाइन और सेवापुरी का इलाका पूरे पूर्वांचल में सब्जी की उत्पदकता में आगे है लेकिन उसे तीन मंडियों राजातालाब, सुंदरपुर और चंदुवा सट्टी ही जाना पड़ता है। यहां उसका रेट बिचौलिया तय करता है और सुबह छह बजे सब्जी लेकर पहुचा किसान 11 बजे तक माल बेचने को भटकता है। कारण कि वहां के आढ़तिए और बिचौलिए जान बूझकर किसानों को ये बताते हैं कि आज तो रेट डाउन हो गया है और किसान जो दूर से भाड़ा लगाकर समान लेकर आता है वो हार कर आढ़तियों के तय रेट पर माल बेचने को मजबूर होता है। यह सिलसिला लगातार चलता रहता है। आलम यह कि किसानों की निर्भरता इन्ही तीन मंडियो पर सीमित रह गई है। ऐसे में ये बिचौलियों के हाथ की कठपुतली बन गए हैं।

लेकिन अब ये किसान खुद को एक स्मार्ट किसान के रूप में न सिर्फ ढाल रहे हैं। जल्द ही वह दिन भी आने वाला है जब ये आपके दरवाजे पर इनकी डिलिवरी वैन पहुंचेगी और ताजी व सस्ती सब्जियां लेकर वो भी कार्ड पेमेंट की सुविधा के साथ। ये किसान अनाज के साथ सब्जियां और दुग्ध उत्पाद को अपने ब्रांड से बाजार में लाने की तैयारी कर रहे है और पांच उत्पादक कंपनियों का गठन अगले 15 दिनों में हो जाएगा। वितरण कंपनी का गठन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में हो गया है। तो वो दिन दूर नही जब आपके दरवाजे पर खुद किसान दस्तक दे और आपको आपके रसोई की लगभग हर चीज उपलब्ध कराएगा। किसानों के इस अभिनव प्रयोग को साकार करने के लिए समाहित फाउंडेशन ट्रस्ट ने पहल करते हुए वाराणसी, भदोही, चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र के 200 किसानों का एक ऐसा समूह तैयार किया है जो अपने तमाम उत्पाद जैसे, गेहू, चावल, दलहन ,तिलहन और इन अनाज से बनने वाली अन्य सामग्री जैसे मैदा, सूजी, सत्तू, बेसन, मिक्स आटा, पोहा, गुड़, खांडसारी आदि खाद्य सामग्री को बाकायदा अपने ब्रांड नाम से पैक कर ग्राहकों तक पहुचाएगा। इसके लिए भदोही के गिर्दबड़गाव में इन किसानों ने कोऑपरेटिव सिस्टम से अपना वर्कशाप शुरू कर दिया है जहां पर खाद्य सामग्री को ग्राहक तक पहुंचाने के पूर्व की प्रक्रिया शुरू हो गई है और सितंबर में यह ग्रहको के हाथ मे होगी। समाहित फाउंडेशन की डॉ दीप्ती के अनुसार इन किसानों के उत्पाद शुद्धता की गारंटी के साथ सबसे सस्ते दर पर उपभोक्ता के दरवाजे पर उपलब्ध होगा। शुद्धता के मुद्दे पर डॉ दीप्ती कहती है कि हमारे हर ग्राहक को ये अधिकार होगा कि वो जब चाहे हमारे वर्कशाप में बिना पूर्व सूचना के जाकर देख सकता है कि जो सामान वो खा रहा है वो किस माहौल में कहां और कैसे बन रहा और ये अधिकार अपने ग्राहक को सिर्फ ये किसान ही दे सकते हैं जबकि दुनिया की कोई भी कंपनी अपने ग्राहक को ये अधिकार नही देती।

 

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned