काशीवासियों का केंद्र व उत्तराखंड सरकार से सवाल, स्वामी सानंद की उपेक्षा क्यों?

Ajay Chaturvedi

Updated: 29 Sep 2018, 06:17:09 PM (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. मां गंगा की स्वच्छता और निर्मलता को लेकर एक 90 वर्ष के वृद्ध वैज्ञानिक, गंगा प्रेमी 100 दिन से अनशन पर हैं। ऐसा भी नहीं कि वह अनजाना व्यक्ति है। केंद्र और उत्तराखंड सरकार से वे वृद्ध सिर्फ और सिर्फ मां गंगा की अविरलता और निर्मलता की मांग कर रहै हैं। मां गंगा की रक्षा की मांग कर रहे हैं। उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरवाट आ रही है। लेकिन दोनों ही सरकारों का ध्यान उन पर तनिक भी नहीं है। ये और कोई नहीं बल्कि वैज्ञानिक से सन्यासी बने प्रो जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद हैं। स्वामी जी के अनशन पर समूचा देश चिंतित है। खास तौर पर काशी की जनता बेहद खफा है। स्वामी जी के समर्थन में समय-समय पर धरना-प्रदर्शन और पोस्टर प्रदर्शनी पहले भी लगाई जा चुकी है। शनिवार को भी जनता प्रो जीडी अग्रवाल के समर्थन में उतरी और गंगा किनारे भैंसासुर घाट पर न केवल धरना दिया बल्कि पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई। उद्देश्य सिर्फ स्वामी जी का समर्थन और मां गंगा की रक्षा का था। लोगों ने गंगा को बांधो की बेड़ियों से मुक्त करने की मांग के साथ स्वामी जी के दीर्घायु होने की प्रार्थना भी की। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के सीएम से तत्काल इस मामले में स्वामी जी से वार्ता कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की।

गंगा की दुर्दशा से आहत आईआईटी कानपुर के सेवानिवृत प्रोफेसर, राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के पूर्व सलाहकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रथम सचिव, चित्रकूट स्थित ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक और पानी-पर्यावरण इंजीनियरिंग के नामी सलाहकार के रूप विख्यात लगभग 90 वर्षीय प्रसिद्ध पर्यावरण विज्ञानी प्रो. जी.डी. अग्रवाल उर्फ़ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद सरस्वती द्वारा हरिद्वार के मातृ सदन आश्रम में 100 दिन से अनशन पर हैं। उनके इस आमरण अनशन के समर्थन में काशी की एक बार फिर सड़क पर उतरी। लोगों ने अचरज जताया कि मां गंगा की अविरलता एवं निर्मलता के लिए बांधों एवं खनन के विरोध में किए जा रहे उनके अनशन से उत्तराखंड और केंद्र सरकार की भी नींद उड़ गयी है। लेकिन फिर भी कोई सकारात्मक पहल सरकार द्वारा नही की जा रही है।

प्रो. अग्रवाल के अनशन के समर्थन और गंगा सहित सभी सहायक नदियों की दुर्दशा से व्यथित विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी एवं छात्रों ने 'साझा संस्कृति मंच” के तत्वावधान में भैसासुर घाट पर धरना दिया। इस दौरान स्वामी जी के दीर्घायु होने की प्रार्थना भी गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गंगा सहित सभी सहायक नदियों को स्वस्थ, अविरल और निर्मल बनाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जांय और स्वामी जी की मांगों को तत्काल संज्ञान में लेते हुए ठोस कदम उठाने की इच्छाशक्ति दिखाए सरकार।

वक्ताओं का कहना था कि बांधों, हिमालयी क्षेत्र में वन कटाव, पत्थर खनन, प्रदूषण और अतिदोहन के कारण नदियों का जीवन नष्ट हो रहा है। हमे नदियों को जीवंत मानकर उनके अधिकार के संघर्ष को तेज करना होगा। गंगा एवं उसकी तमाम नदियों सहित कुंडों, लालाबो एवं अन्य जलस्रोतो के पुनर्जीवन के लिए हम केवल सरकारी योजनाओ के भरोसे बैठे नही रह सकते। इन योजनाओं से नदियों को पुनर्जीवित करना कदापि संभव नही होगा। आम जनता और जन प्रतिनिधियों की सक्रिय और इमानदारी पूर्ण भागीदारी से ही नदियों को समृद्ध और स्वस्थ बनाया जा सकता है। धरने की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्र सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश खैरनार ने कहा कि बांधों ने मां गंगा का गला अवरुद्ध कर रखा है। बांधों से मुक्ति ही गंगा की दशा में सुधार का एकमात्र कारगर उपाय है। बड़ी बांध परियोजनाओं को तत्काल बंद करने के लिए सर्कार को निर्णय लेना चाहिए।

धरने में रामधीरज भाई, डॉ आरिफ, रवि शेखर, विशाल त्रिवेदी, सतीश सिंह, सुरेश खैरनार, अनूप, महेश विक्रम, वल्लभाचार्य पांडेय, जागृति राही, पारमिता, रमन पंत, नीता चौबे, लक्ष्मण प्रसाद, इन्दु पांडेय, दीन दयाल सिंह, मुनीज़ा रफीक खान आदि शामिल थे।

स्वामी सानंद के समर्थन में काशी वासियों का धरनास्वामी सानंद के समर्थन में पोस्टर प्रदर्शनी
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