काशी की कला की ऊंची उड़ान, हुनर को मिला अंतर्राष्ट्रीय मुकाम

काशी की कला की ऊंची उड़ान, हुनर को मिला अंतर्राष्ट्रीय मुकाम

Ajay Chaturvedi | Publish: Apr, 17 2018 12:27:22 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

दुनिया में बढ़ा पूर्वाचल का बढ़ा मान, मिला बौद्घिक संपदा अधिकार का दर्जा।

वाराणसी. काशी को यूं ही नही सांस्कृतिक राजधानी का दर्जा मिला है। कला, संस्कृति तो रग-रग में बसी है। एक से बढ़ कर हुनरमंद हैं यहां। खास तौर पर हस्तकला, मूर्तिकला, बुनकरी, मीनाकारी के कलाकारों की खान है यह काशी। यही तो है काशी की पहचान। प्राचीन काल से चली आ रही इस कला को अक्षुण्ण रखने वाले कद्रदानों की भी कमी नहीं तभी तो यह आज भी जीवित है और नित नए मुकाम हासिल कर रही है। इसी कड़ी में अब एक नया नाम जुड़ा है रामनगर, भीटी का। यहां के साफ्ट स्टोन जाली वर्क को अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। भीटी के कलाकार अरसे से अपने हुनर को तराश रहे हैं। इस कला का एक नमूना रामनगर भीटी की ग्राम प्रधान सुशीला सोनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो कलाकार बच्चालाल मौर्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट कर चुके हैं। पीएम हों या सीएम दोनों ने कलाकार और कलाकृति की भूरि-भूरि प्रशांसा भी कर चुके हैं।

बता दें कि वाराणसी साफ्ट स्टोन जाली वर्क (साफ्ट स्टोन अंडरकट वर्क) एवं गाजीपुर वाल हैंगिंग दोनों ही निर्यात आधारित उत्पाद हैं। अब इन दोनों का महत्व बढ़ जाएगा। इन दोनों उत्पादों की महत्ता ही है कि 12 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीनदयाल हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर में जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रोन को साफ्ट स्टोन जाली वर्क की हाथी के अंदर हाथी को बड़ी बारीकी से दिखाया और समझाया था। मैक्रोन इस हुनर को देख अभिभूत रह गए थे। उसी वक्त फ्रांस के एफिल टावर को गाजीपुर के वालहैंगिंग पर बना कर प्रदर्शित किया गया था जो अपने आप में आकर्षण का केंद्र था।

सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क का नमूनासॉफ्ट स्टोन जाली वर्क का नमूनारामनगर भीटी की प्रधान सुशीला सोनकर सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क का नमूना पीएम को भेट करते

वैसे अपनी हस्तकला और उत्कृष्ट कारीगरी के लिए विख्यात बनारस व पूर्वांचल का दबदबा जीआई और बौद्धिक संपदा (पेटेंट) के क्षेत्र में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसी कड़ी में साफ्ट स्टोन जाली वर्क-पंजीकरण एवं गाजीपुर वाल हैंगिंग को जीआई पंजीकरण के साथ देश के बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार कर लिया गया है। यह दुनिया के किसी भी क्षेत्र में सर्वाधिक जीआई पंजीकृत उत्पादों वाला क्षेत्र बन गया है। जीआई विशेषज्ञ व ह्यूमन वेल्फेयर एसोसिएशन के निदेशक डॉ रजनीकांत की मानें तो नाबार्ड के सहयोग से ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के फैसिलिटेशन द्वारा साफ्ट स्टोन में स्थानीय शिल्पियों की संस्था दी बनारस हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट सोसाइटी, रामनगर व बनारस हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट इंडस्ट्रीयल कोआपरेटिव सोसाइटी तथा गाजीपुर वॉल हैंगिंग के लिए निशा क्राफ्ट विकास समिति, सैदपुर गाजीपुर ने 18 जुलाई 2016 को जीआई रजिस्ट्री चेन्नई में दाखिल किया था। तकरीबन 20 महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद इन दोनों ही कलाकारी को जीआई उत्पाद का दर्जा मिल गया है। इससे आने वाले समय में इन दोनों शिल्पों के लिए भी केंद्र व राज्य सरकार से सहयोग, सरक्षण मिल सकेगा। ऐसा होने से जहां शिल्पकारों का मनोबल बढेगा वहीं इनके विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। सबसे बड़ी बात कि इन कलाओं की अब दुनिया में कहीं भी नकल नहीं हो सकेगी।

साफ्ट स्टोन जाली वर्क के लिए चार जिलों वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र तथा गाजीपुर को वाल हैंगिंग के लिए गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली व मिर्जापुर को ही कानूनी रूप से इन दोनों उत्पादों को बनाने के लिए जीआई रजिस्ट्री द्वारा अधिकृत किया गया है। इस उपलब्धि पर बच्चालाल मौर्य, शिवपूजन जायसवाल, बचाऊ, संतोष, अभय कुमार, राकेश, अनिल आर्य, द्वारका प्रसाद, बबलू राजभर, मुहम्मद अकरम, इजराइल, कैसरजहां जैसे शिल्पियों खुशी जाहिर की है।

गाजीपुर का वॉल हैंगिंग नमूनाशिल्पी बच्चा लाल मौर्य सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क का नमूना सीएम को भेट करते
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