भोले की नगरी काशी में भक्तों ने बाबा विश्वनाथ संग खेली होली, राजसी ठाट से निकली गौना बारात तो झूम उठे बाराती

Ajay Chaturvedi

Publish: Mar, 17 2019 07:30:19 PM (IST)

Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. धूम-धड़ाका, डमरू की गड़गड़ाहट, शंखनाद, हर-हर महादेव, माता पार्वती की जय का गगनभेदी उद्घोष, फिजा में उड़ते अबीर-गुलाल के बीच बाबा विश्वनाथ का निकली गौना बारात। विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ कुलपति आवास पर सुबह से ही गहमा-गहमी रही। दोपहर में भोग आरती के बाद आम भक्तों के लिए श्री काशी विश्वनाथ, माता पार्वती और माता की गोद में बैठे प्रथमेश श्री गणेश की चल रजत प्रतिमा के दर्शन का क्रम शुरू हुआ शाम 05 बजे तक जारी रहा। महंत आवास के आंगन में गीत गवनई का कार्यक्रम चलता रहा। महिलाएं माता के लिए विदायी गीत भी गाती रहीं। जैसे ही बाबा विश्वनाथ की पालकी विश्वनाथ गली में उतरी भक्तों ने गगनचुंबी जयकारा लगा कर उनका स्वागत किया। इस मौके पर विश्वनाथ मंदिर के आस-पास भक्तों का ऐसा सैलाब था कि तिल रखने की जगह नहीं थी। ऐसे में भक्तों में होड़ लग गई कि पालकी को कांधा देने की। हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए पालकी पहुंची विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में जहां पहले से विद्यमान शिवाला पर इस चल प्रतिमा को स्थापित किया गया। फिर शुरू हुई गौने की रश्म। हालांकि इस पवित्र मौके पर जहां भक्तों में बाबा की एक झलक पाने को बेताब थे तो वहीं पुलिसकर्मी उन्हें धकिया कर उनसे दूर करने की कोशिश में भी लगे रहे।

सांयकाल 05:00 बजे रजत पालकी में मॉता गौरा और प्रथमेश सहित पालकी यात्रा निकाली गई जो मंहत आवास से मंदिर तक गई। मंदिर में गर्भगृह में प्रतिमाओं को स्थापित कर विशेष सप्तऋर्षि आरती कि गई। महंत डॉ कुलपति तिवारी ने बताया कि यह 354वां वर्ष रहा। यानी 354 वर्ष से लगातार महंत परिवार ही बाबा के गौने की रश्म निभाता आ रहा है। महंत आवास मां गौरा का मायका होता है। ऐसे में मां की विदायी की पूरी रश्म खुद महंत डॉ तिवारी निभाते हैं, इस बार भी उन्होंने दक्ष प्रजापति की भूमिका में मां की विदायी की रश्म निभाई।

इससे पूर्व पीतांबर रंग के खादी का जरीदार कुर्ता (मिर्जई), खादी की धोती और गयासुद्दीन की सुनहरी पगड़ी धारण किए खूब फब रहे थे। वहीं माता का भी अद्भुत श्रृंगार किया गया था। माता की गोद में बैठे गणेश यानी इस पूरे भोले नाथ के परिवार को जो भी देखता, देखता ही रह गया। महिलाओं ने मां गौरा से जहां अखंड सौभाग्या का वर मांगा तो युवतियों ने भोले शंकर सदृश्य पति की कामना की। वहीं पुरुषों ने सुख-समृद्धि की कामना की। महंत डॉ तिवारी ने बताया कि इस साल जिस तरह से जम्मू कश्मीर में आतंकी हमला हुआ जिसमें हमारे 40 जवान शहीद हुए तो उनकी आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की गई। साथ ही भारत समेत समूची दुनिया में शांति और अमन चैन की कामना भी की गई।

इससे पूर्व रंगभरी एकादशी पर प्रतिमाओं का विशेष अनुष्ठान ब्रह्ममुहुर्त में पूजन और विशेष राजसी श्रृंगार कर 11:00 बजे भोग आरती के बाद 11:3- बजे पालकी दर्शन प्रारंभ हुआ। दोपहर 12:00 बजे विश्वनाथ मंदिर में भोग आरती के बाद मंहत आवास में “शिवांजली” का आयोजन शुरू हो गया। इसमें गीतकार कन्हैया दूबे के डी के संयोजन मे मध्याह्न से गायन वादन व नृत्य का क्रम चलता रहा। सिद्धार्थ बनर्जी के सिद्धवीणा वादन और तबले की युगलबंदी से इसका शुभारंभ हुआ। साथ ही गायन मे उप शास्त्रीय गायिका अर्चना आदित्य म्हस्कर, लोक गायक डॉ अमलेश शुक्ल अमन, अमित त्रिवेदी, स्नेहा अवस्थी ,आराधना सिंह , सहित अनेक कलाकार सुरों से हाजरी लगाई तो वहीं लखनऊ से पधारे बाबी झांकी ग्रुप के द्वारा काशी अवध और बृज की होली महाकाल की भस्म की होली आकर्षण का केंद्र बनी।

बता दें कि भोले नाथ की शादी की प्रक्रिया वसंत पंचमी से शुरू होती है। महाशिवरात्रि को बाबा का विवाह होता है और उसके बाद रंग भरी एकादशी जिसे अमला एकादशी भी कहते हैं को बाबा मां गौरा का गौना करा कर कैलाश जाते हैं। इस खास दिन के बारे में मान्यता है कि बाबा की पालकी यात्रा का दर्शन करने के लिए देव लोक से सभी देवी-देवता भी पधारते हैं। यह गौना बारात भी ठीक उसी तरह से निकलती है, इसमें अड़भंगी भी होते हैं तो भूत-पिचास की शक्तधारी लोग भी होते हैं।

 

विश्वनाथ दरबार में शिवभक्तभक्तों का सैलाबशिवभक्तों को बाबा के बारात में जाने से रोकते पुलिसकर्मी
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