काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में जाने पर रोक हटी, पुरानी व्यवस्था फिर बहाल

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते 77 दिन बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में गर्भगृह में इंट्री पर लगी रोक हटा ली गई और पहले की व्यवस्था लागू कर दी गई है। मंगला आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा है।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते 77 दिन बाद वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों ने गर्भगृह में जाकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन किये। इस दौरान बाबा का दरबार हरहर महादेव से गूंज उठा। मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटाते हुए मंदिर में झांकी दर्शन की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। रविवार से दर्शन की नई व्यवस्था लागू हो गई। श्रद्घालुओं ने ढाई महीने के अंतराल के बाद हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ गर्भगृह में प्रवेश किया।


रविवार की सुबह भोर में मंगला आरती के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर के पट खुले तो श्रद्घालु सीधे गर्भगृह में पहुंचे और वहां पूजा अर्चना कर बाबा का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया। काशी विश्ववनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि मंदिर में पहले की तरह व्यवस्था लागू कर दी गई है। मंगला आरती के बाद श्रद्घालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दिया जा रहा है। पहले की तरह जल चढ़ाने की भी छूट है। उन्होंने कहा कि काशीवासियों की अटूट श्रद्घा और उनकी मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हालांकि मंदिर में आने वाले सभी श्रद्घालुओं को कोविड प्रोटोकाॅल का पालन करना अनिवार्य है। इसका कड़ाई से पालन कराया भी जा रहा है।


बताते चलें कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बेकाबू होने के बाद इसका प्रसार रोकने के लिये बीते 10 अप्रैल से मंदिर में दर्शन की पुरानी व्यवस्था को रोकते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में इंट्री बैन कर दी थी। केवल बाहर से झांकी दर्शन दिया जा रहा था और बड़े पाइप के जरिये बाहर से ही जल व दूध अर्पित किया जा रहा था। मंगला आरती के टिकटों की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। भक्तों को मंगला आरती में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। 15 अप्रैल से बाबा दरबार और अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन के लिये तीन दिन पुरानी आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट भी अनिवार्य कर दी गई थी। हालांकि आठ जून से कुछ शर्तों के साथ आम भक्तों को भी बाबा दरबार और अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन-पूजन करने दिया जा रहा था। अब नए आदेश के तहत दर्शन-पूजन की पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल कर दी गई है। शासन की ओर से आदेश के बाद वीकेंड लाॅकडाउन के दौरान भी श्रद्घालुओं को मंदिर में दर्शन-पूजन के लिये प्रवेश दिया जा रहा है।


बताते चलें क कोरोना संक्रमण की पहली लहर के दौरान भी लॉक डाउन के चलते धर्मस्थल बंद हुए थे। तब करीब 80 दिन बाद मंदिरों को दर्शन-पूजन के लिये प्रतिबंधों के साथ खोला गया था। बाद में संक्रमण की दर बिल्कुल कम होने पर दर्शन पूजन की व्यवस्था बहाल कर दी गई थी। हालांकि कोविड प्रोटोकाॅल का पालन कराया जा रहा था।

रफतउद्दीन फरीद
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