scriptKashi Vishwanath Temple-Gyanvapi Complex Controversy Half an hour hearing in district judge s court decision safe | ज्ञानवापी केसः जिला जज की अदालत में पौन घंटे चली सुनवाई, फैसला सुरक्षित, कोर्ट में ये लोग रहे मौजूद | Patrika News

ज्ञानवापी केसः जिला जज की अदालत में पौन घंटे चली सुनवाई, फैसला सुरक्षित, कोर्ट में ये लोग रहे मौजूद

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर विवाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सोमवार को वाराणसी के जिला जज की अदालत में महज पौन घंटे की सुनवाई हो सकी। सुरक्षा के इंतजाम इतने कड़े थे अदालत में गिने-चुके अधिवक्ताओं को ही प्रवेश मिल सका। कोर्ट ने सुनावाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

वाराणसी

Updated: May 23, 2022 06:04:15 pm

वाराणसी. काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सोमवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई महज पौन घंटे ही चली। इसके बाद जिला जज ने फैसला सुरक्षित रखते हुए अदालत को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया। आज हुई सुनवाई के दौरान सर्वे रिपोर्ट पेश की गई। फिर वादी और प्रतिवादी अधिवक्ताओं ने बारी-बारी से अपना पक्ष रखा। सोमवार की सुनवाई के लिए इतने तगड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे कि केवल 19 अधिवक्ता और चार याचिकाकर्ताओं को ही अदालत में जाने की इजाजत मिल सकी। अदालत के बाहर सुरक्षकर्मियों का जमावड़ा रहा। इसके चलते अदालत के इर्द-गिर्द आज कोई जमावड़ा नहीं हो सका।
काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर
काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर
हटाए गए कोर्ट कमिश्न तक नहीं जा सके अदालत में

जानकारी के मुताबिक सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्र तक को अदालत में प्रवेश की अनुमति नहीं मिल सकी। इस संबंध में बताया जा रहा है कि सूची में उनका नाम नही रहा। लिहाजा उन्हें कोर्ट में नही जाने दिया गया। उधर इस प्रकरण को लेकर याचिका दर्ज करने वाली पांच महिलाओं में से चार महिलाएं ही कोर्ट में मौजूद रहीं। लेकिन सुनवाई के दौरान वकीलों के सहयोगियों को भी कोर्ट में एंट्री नहीं मिली।
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इन मुद्दों पर हुई बहस

वादी पक्ष के अधिवक्ता विष्णु जैन के अनुसार सोमवार को प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट के सेक्शन 3 और 4 पर बहस हुई। अब मंगलवार को उसी पर आगे की कार्यवाही होगी। जिला जज ने सभी पक्षों के आवेदन के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के सिविल प्रक्रिया संहिता के ऑर्डर 7 रूल 11 (मेंटेनेबिलिटी यानी पोषणीयता) के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र के बारे में भी सुनवाई हुई। ज्ञानवापी में कोर्ट कमीशन की रिपोर्ट के बारे में भी जानकारी ली गई।
प्रतिवादी पक्ष ने जोरदार ढंग से की बहस
कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने लगातार विरोध किया और अपना पक्ष रखते हुए कड़ी बहस की। बहस और सभी पक्षों के आवेदन के बारे में जानकारी लेने के साथ ही जज ने प्रतिवादी पक्ष के ऑर्डर 7, रूल 11 (मेंटनेबिलिटी) आवेदन के बारे में भी सुना।
आज इन मुद्दों पर होनी थी सुनवाई

-ज्ञानवापी परिसर में मां श्रृंगार गौरी की दैनिक पूजा-अर्चना की इजाजत देने और अन्य देवी-देवताओं को संरक्षित करने को लेकर दायर केस
-कोर्ट कमिश्नर की जो सर्वे रिपोर्ट
-ज्ञानवापी मामले में उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम-1991 लागू होता है या नहीं, अर्थात यहां, पूजा का अधिकार दिया जा सकता है या नहीं
-डीजीसी सिविल के प्रार्थना पत्र और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की आपत्ति
विश्वनाथ मंदिर के महंत ने भी दाखिल की याचिका
काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल कर ज्ञानवापी परिसर में मिली शिवलिंग की आकृति के पूजन, स्नान, भोग-राग, शृंगार और पूजापाठ का अधिकार मांगने संबंधी प्रार्थना पत्र पेश किया।

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