scriptKashi Vishwanath Temple-Gyanvapi Complex Controversy latest news update in hindi | काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर विवादः कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित, अब 12 मई को आएगा फैसला, जरूरत पड़ी तो कोर्ट कर सकता है सर्वे | Patrika News

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर विवादः कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित, अब 12 मई को आएगा फैसला, जरूरत पड़ी तो कोर्ट कर सकता है सर्वे

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर विवाद मामलें सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में बुधवार को लगातार तीसरे दिन जिरह हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद सिविल जज ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब 12 मई को दोपहर 12 बजे फैसला आने की उम्मीद है।

वाराणसी

Published: May 11, 2022 05:24:43 pm

वाराणसी. काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर विवाद मसले पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में बुधवार को सभी पक्षो की सुनवाई पूरी हो गई। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब गुरुवार 12 मई को दोपहर 12 बजे इस मसले पर फैसला आने की उम्मीद है।
काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर
काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी परिसर
प्रतिवादी पक्ष का तर्क निर्थक
वादी पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने मीडिया को बताया कि कोर्ट में प्रतिवादी पक्ष का तर्क पूरी तरह से निर्थक है। कमीशन चल रहा उसे बाधित कैसे किया जा सकता है। प्रतिवादी उसी पर अड़े हैं। कहा कि कोर्ट कमीशन की कार्यवाही जारी है। सवा दिन सर्वे हो चुका है। केवल बाहरी दीवारों का सर्व हो सका है, अभी तक रिपोर्ट नहीं आई, ऐसे में कोर्ट कमिश्नर को बदलने की बात सही नहीं। कोर्ट कमिश्नर अपनी रिपोर्ट पेश कर देते उसके बाद ये मसला उठता तो कोई बात भी होती। उन्होंने कहा कि रेड जोन के जिम्मेदार अधिकारी मस्जिद के भीतर का सर्वे कराएं।
कोर्ट कमिश्नर को हटाने का मसला ही गलत है

वहीं वादी पक्ष के ही अधिवक्ता शिवम गौड़ का कहना रहा कि कोर्ट कमीशन पर सवाल उठाने के मसले का विरोध किया। सात मई के के विरोध पर सुनवाई पूरी हो गई है। तहखाना खोला जाएगा या तोड़ा जाएगा इन सब पर निर्णय कल ही आएगा। बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो ही न्यायालय मौके पर जा सकता है, क्योंकि कोर्ट के पास सर्वाधिकार सुरक्षित है।
वादी के सभी मसलों पर जवाब दाखिल
प्रतिवादी पक्ष के वकील का कहना रहा कि बुधवार को 61 ग पर सुनवाई हुई। सभी पक्ष की दलीलें पूरी हो गई हैं, वादी के सभी प्रार्थना पत्र का जवाब दाखिल कर दिया गया। अब फाइल के साथ देखने के बाद कल फैसला आएगा। कोर्ट कमिश्नर को बदलने के मुद्दे पर मंगवार को ही सुनवाई हो गई थी उस पर आज कोई सुनवाई नहीं हुई।
प्रतिवादी पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से 1936 के मामले का दिया उद्धरण

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद ताला तोड़कर अंदर जाकर वीडियोग्राफी और सर्वे करने का विरोध किया। अधिवक्ता अभयनाथ यादव ने कहा कि वर्ष 1936 में दीन मोहम्मद बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट में यह घोषित किया जा चुका है कि मस्जिद, कोर्टयार्ड और उसके नीचे की भूमि वक्फ बोर्ड की है और इसमें मुसलमान धर्म के अनुसार नमाज प्रार्थना उर्स आदि करने के अधिकारी है जो अनादिकाल से बिना किसी अवरोध के होता चला आ रहा है। ऐसे में ज्ञानवापी तहखाने के अंदर ताला तोड़कर सर्वे किए जाने का आवेदन खारिज होने योग्य है। यह भी कहा इस आवेदन में कही गई बाते वाद पत्र में दिए गए तथ्यों के विपरीत है। ऐसे में कानूनन संज्ञान नही लिया सकता। अदालत से आराजी न0 3190 चौहद्दी,एरिया स्पष्ट होने के बाद ही सर्वे की बात कही गई।
डीजीसी के आवेदन, ज्ञानवापी वक्फ बोर्ड की संपत्ति मसला भी उठाया
अदालत में डीजीसी सिविल के उस आवेदन का भी जिक्र किया गया जिसमें एसीपी सुरक्षा के हवाले से कहा गया कि मस्जिद परिसर में जाने से सुरक्षा का खतरा है और ज्ञानवापी वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति मानी गई है और शृंगार गौरी बैरिकेटिंग के बाहर होने की बात कही गई है ऐसे में ज्ञानवापी के अंदर वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति होने के कारण सर्वे कराने व ताला तोड़ने का आदेश नही दिया जा सकता। यह भी कहा गया कि कोर्ट ने बैरिकेटिंग व मस्जिद में प्रवेश कर कमीशन की कार्यवाही वीडियोग्राफी करने के लिए आदेशित नही किया गया है। इस आरोप का खंडन किया कि मस्जिद में पहले से ही लोग छिपे थे हर धर्म मे आस्था रखने वाले अन्य समय भी धार्मिक स्थल परिसर में रहते है। डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा सरकार व जिला प्रशाशन अदालत के आदेश का अनुपालन कराने को तैयार हैं। दो घंटे की कमीशन कार्यवाही के बाद सर्वे कमिश्नर बदलने का विरोध किया।
वादी पक्ष ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की आपत्ति का किया विरोध
वादी पक्ष की तरफ से सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी, शिवम गौड़, अनुपम द्विवेदी, मदनमोहन ने अंजुमन इंतजामिया की आपत्ति का जोरदार विरोध किया। कहा कि यह कमीशन की कार्यवाही रोकने का प्रयास है पहले कमीशन की रिपोर्ट कोर्ट में आये फिर उस पर आपत्ति की जा सकती है या दूसरे सर्वे कमीशन की मांग की जा सकती है। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान नियुक्त सर्वे कमिश्नर अजय मिश्र,वादिनीगण, जितेंद्र सिंह विशेन के अलावा सुरक्षाकर्मी डटे रहे,विशेष यह रहा कि अदालत ने सुनवाई के दौरान विधिक पत्रकारों धीरेंद्र नाथ शर्मा,मेराज फारूकी जुग्गन, घनश्याम मिश्र,अमरेंद्र तिवारी,वीरेंद्र सिंह और मनोज तिवारी को कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता ने कहा

जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) महेंद्र प्रसाद पांडेय का कहना रहा कि वादी पक्ष ने ज्ञानवापी परिसर के एक-एक हिस्से का सर्वे करने का स्पष्ट आदेश दिए जाने की मांग उठाई है। वहीं, प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने मांग रखी है कि कोर्ट कमिश्नर बदल दिया जाए। दोनों पक्षों ने अपनी मांग के समर्थन में दलीलें और आपत्ति रखी है। इस प्रकरण में अब अदालत कल यानी 12 मई को अपना फैसला सुनाएगी।
मंगलवार की कार्यवाही

बता दें कि इससे पहले मंगलवार को हुई बहस के बाद अदालत ने 11 मई तक के लिए कोर्ट की कार्यवाही स्थगति कर दी थी। बहस के दौरान हिंदू पक्ष की आपत्ति पर मुस्लिम पक्ष ने एक सप्ताह का समय मांगा है। उधर, वादी पक्ष के वकीलों का दावा रहा कि अदालत ने कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर खुद मौके पर जाकर वस्तुस्थिति देखेंगे।
सर्वे के जरिए साक्ष्य सबूत एकत्र नहीं किया जा सकता
सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल प्रति आपत्ति में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से कहा गया कि सर्वे के जरिए साक्ष्य सबूत एकत्र नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी ओर से पांच अधिवक्ता हैं, जबकि सर्वे में दो ही अधिवक्ताओं को प्रवेश की अनुमति दी गई, जबकि वादी पक्ष के 12 वकील अंदर मौजूद थे।
मस्जिद में वीडियोग्राफी का औचित्य नहीं

उन्होंने न्यायालय में कहा कि शृंगार गौरी और ज्ञानवापी मस्जिद अलग-अलग है। ऐसे में मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी का कोई औचित्य नहीं है। वादी पक्ष ने इस आवेदन पर विपक्ष पर न्यायालय के कार्य में बाधा डालने और जिला प्रशासन पर कोर्ट के आदेश के अनुपालन में रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया।
डीजीसी का पक्ष
इस बीच डीजीसी सिविल महेंद्र पांडेय ने अपने जवाब में कहा कि प्रशासन कमीशन की कार्यवाही का प्रबल सहयोग कर रहा है। न्यायालय के आदेश को अमल कराने के लिए जिला प्रशासन तैयार है। अदालती कार्यवाही के दौरान पक्षकार इस बात से सहमत दिखे कि अगर अदालत चाहे तो खुद अपनी देखरेख में कमीशन की कार्यवाही संपादित कराए। अदालत ने लगभग दो घंटे तक चली बहस को सुनने के बाद मंगलवार को फिर सुनवाई की तिथि नियत कर दी।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

यहाँ बचपन से बच्ची को पाल-पोसकर बड़ा करता है पिता, जैसे हुई जवान बन जाता है पतियूपी में घर बनवाना हुआ आसान, सस्ती हुई सीमेंट, स्टील के दाम भी धड़ामName Astrology: पिता के लिए भाग्यशाली होती हैं इन नाम की लड़कियां, कहलाती हैं 'पापा की परी'इन 4 राशियों के लड़के अपनी लाइफ पार्टनर को रखते हैं बेहद खुश, Best Husband होते हैं साबितजून में इन 4 राशि वालों के करियर को मिलेगी नई दिशा, प्रमोशन और तरक्की के जबरदस्त आसारमस्तमौला होते हैं इन 4 बर्थ डेट वाले लोग, खुलकर जीते हैं अपनी जिंदगी, धन की नहीं होती कमी1119 किलोमीटर लंबी 13 सड़कों पर पर्सनल कारों का नहीं लगेगा टोल टैक्ससंयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: दुनिया के पास बचा सिर्फ 70 दिन का गेहूं, भारत पर दुनिया की नजर

बड़ी खबरें

QUAD Summit: अमरीकी राष्ट्रपति ने उठाया रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्धा, मोदी बोले- कम समय में प्रभावी हुआ क्वाड, लोकतांत्रिक शक्तियों को मिल रही ऊर्जाWhat is IPEF : चीन केंद्रित सप्लाई चैन का विकल्प बनेंगे भारत, अमरीका समेत 13 देशWeather Update: दिल्ली में आज भी बारिश के आसार, इन राज्यों में आंधी-तूफान की संभावनाहरियाणा के जींद में सड़क हादसा: ट्रक और पिकअप की टक्‍कर में 6 की मौत, 17 घायलटाइम मैगजीन ने जारी की 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट, जेलेंस्की, पुतिन के साथ 3 भारतीय भी शामिलHaj 2022: दो साल बाद हज पर जाएंगे मोमिन, पहला भारतीय जत्था 4 जून को होगा रवानाआ गया प्लास्टिक कचरे का सफाया करने वाला नया एंजाइमWomen's T20 Challenge: पहले ही मैच में धमाकेदार जीत दर्ज की सुपरनोवास ने, ट्रेलब्लेजर्स को 49 रनों से हराया
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.