केशव मौर्या सिराथू सीट से लड़ सकते हैं विधानसभा चुनाव !

केशव मौर्या सिराथू सीट से लड़ सकते हैं विधानसभा चुनाव !
Keshav Maurya

केशव मौर्या के लिए इस बार आसान नहीं है विधानसभा में इंट्री

वाराणसी. सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या के राष्ट्रपति चुनाव के बाद अपने संसदीय सीट से इस्तीफा देकर विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना है और इसको लेकर काफी लंबे समय से अटकलें लग रही है कि आखिर कौन सी वह सीट होगी जिससे योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्या विधानसभा में इंट्री लेंगे।

सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर जो चर्चा काफी दिन से चल रही है, उसके मुताबिक सीएम गोरखपुर ग्रामीण से ही चुनाव लड़ सकते हैं। गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने पहले ही योगी आदित्यनाथ के लिए सीट छोड़ने का ऐलान कर दिया है। वहीं डिप्टी सीएम केशव मौर्या की सीट को लेकर मामला फंसा है। उपमुख्यमंत्री और फूलपूर से सांसद केशव मौर्या के लिए दो विधानसभा सीटों पर मंथन हो रहा है, जिसमें इलाहाबाद जिले की फाफामऊ और कौशांबी की सिराथू सीट शामिल हैं। ज्यादा चर्चा इस बात की है कि मौर्या सिराथू से ही चुनाव लड़ेंगे और इसको लेकर तैयारी भी शुरू कर दी गई है।


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सिराथू से लड़ सकते हैं चुनाव

केशव मौर्या सिराथू सीट से 2012 में विधायक चुने गये थे, हालांकि बाद में सांसद बन जाने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी है, जिसके बाद हुए उपचुनाव में सपा ने यह सीट जीती थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में यह सीट बीजेपी के कब्जे में वापस आ गई और यहां से बीजेपी के शीतला प्रसाद पटेल विजयी हुए। इस विधानसभा सीट में पटेल, मौर्या और वैश्य निर्णायक भूमिका में होते हैं। मौर्य वोटरों की संख्या 15 हजार से ऊपर है और मौर्य समुदाय से आने वाले केशव को इस वोट वर्ग से उम्मीद है। इसके अलावा केशव को सवर्ण वोटरों से भी उम्मीद है।

केशव मौर्या के लिए आसान नहीं है राह
केशव मौर्या के लिए सिराथू सीट जीतना आसान भी नहीं प्रतीत हो रहा है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि विधायक के कार्यकाल के दौरान मौर्या लोगों की अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे और लोकसभा चुनाव का समय आया तो क्षेत्र छोड़कर भाग निकले। इसके अलावा यह आशंका भी है कि इस सीट से अगर शीतला प्रसाद पटेल को हटाया गया तो पटेल समुदाय नाराज हो सकता है जो मौर्या के लिए महंगा पड़ सकता है। दलित और मुस्लिम वोट पर दूसरे दलों का कब्जा है, ऐसे में मौर्य और सवर्ण वोटरों के सहारे चुनाव जीतना लगभग असंभव है। वहीं फाफामऊ में राजनीतिक और जातिगत समीकरण केशव मौर्या के पक्ष में नहीं है। कहा यह भी जा रहा है कि लोगों में योगी सरकार के अब तक कार्यकाल में संतोषजनक काम नहीं होने को लेकर भी नाराजगी है।

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