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प्रचण्ड गर्मी से जुड़ी काल बैशाखी की वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, जानिए क्या होगा जब लगेगी काल बैशाखी

बनारस समेत पूरा उत्तर प्रदेश क्या समूचा उत्तर भारत प्रचंड तापलहरी से गुजर रहा है। मौसम विज्ञानियों की मानें तो इसमें फिलहाल कोई कमी के संकेत नहीं मिल रहे है। थोड़ी बहुत आशा की किरण शुक्रवार की शाम को दिखी जब हल्की सी नमी नजर आई जिसके चलते लोग पसीने से तर-बतर हो गए। लेकिन ये नमी ही काल बैशाखी को न्योता दे रही है। तो जानते हैं क्या है काल बैशाखी..? इस संबंध में क्या कहते हैं मौसम विज्ञानी..

वाराणसी

Published: April 30, 2022 11:11:40 am

वाराणसी. समूचा उत्तर भारत पिछले एक महीने से भी ज्यादा वक्त से या यूं कहें कि चैत्र मास से ही गर्मी की चपेट में है और इसके अभी कमतर होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे है। कारण ये कि इस बार पछुआ हवा का जोर ज्यादा है जिससे नमी दूर-दूर तक नहीं दिख रही है। हालांकि इसी बीच शुक्रवार की शाम थोड़ा सा बदलाव नजर आया है जिसे शुभ संकेत माना जा सकता है। पर ये जो बदलाव है ये ही काल बैशाखी को न्योता देता है। ये काल बैशाखी वातावरण में तपिश और लू में तो कमी जरूर लाएगा पर इससे परिणाम काफी घातक होते हैं। जान-माल का खतरा ज्यादा होता है। ये बातें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी ने पत्रिका संग खास बातचीत में बताईं। तो जानते हैं क्या कहते हैं मौसम विज्ञानी...
कुछ ऐसा मंजर होता है काल बैशाखी के दौरान
कुछ ऐसा मंजर होता है काल बैशाखी के दौरान
पछुआ और पुरवा के मिलन से बनती है काल बैशाखी की स्थिति

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी प्रो मनोज कुमार श्रीवास्तव ने पत्रिका को बताया कि चूंकि बैशाख का महीना चल रहा है और मौसम की ये स्थित इस समय बनती है इसी कारण इसका नाम काल बैशाखी पड़ा है। दरअसल लगातार पछुआ हवा चलने के बाद जब पुरवा हवा भी चलनी शुरू होती है तो पुरवा और पछुआ के मिलने के वक्त वातावरण में नमी आती है जिससे तेज आंधी जिसे हम बवंडर भी कहते हैं चलती है इस आंधी के बीच ही जोरदार गरज-चमक संग भारी बारिश होती है। ये बारिश दो-तीन घंटे भी हो सकती है। लेकिन इससे मौसम तो जरूर कुछ देर के लिए ठंडा हो जाता है पर भारी बारिश और बिजली गिरने से जान-माल का खतरा बना रहता है। प्रो श्रीवास्तव ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही झारखंड में इस तरह का माहौल बना था जिसमें कई लोगों की जान भी गई और कई मकान भी गिरे। तो ये काल बैशाखी मानवीय दृष्टि से अपने नाम के अनुसार ही एक तरह से काल बन कर ही आती है।
देश में कहां-कहां होता है इसका असर

प्रो श्रीवास्तव ने बताया कि काल बैशाखी का असर मैदानी इलाकों जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आसोम आदि क्षेत्रों में काल बैशाखी का असर ज्यादा देखा जाता है। उन्होंने बताया कि बनारस और आसपास के इलाकों में अभी भले ही नमी नहीं दिख रही पर पश्चिम बंगाल में नमी का असर दिख रहा है।
क्षेत्रवार होता है काल बैशाखी का असर

बीएचयू के मौसम विज्ञानी ने बताया कि काल बैशाखी का असर ग्लोबल नहीं होता बल्कि ये क्षेत्रीय आधार पर बनता है। ऐसा पछुवा और पुरवा हवा के मिलन से ही होता है और कुछ देर के लिए ही ऐसा माहौल बनता है। इसमें घंटे-दो घंटे के लिए तेज हवा, तेज यानी इसे मूसलधार बारिश भी कह सकते हैं उस तरह की बारिश होती है। आसमान में बिजली जोर की कड़कती है। वैसे अक्टूबर-नवंबर में ऐेसे हालात बनते हैं पर काल बैशाखी, अप्रैल और मई के पहले पक्ष में ही ज्यादा असरकारक होती है।
बंगाला की खाड़ी से उठी नम हवा के मिलन से भी बनता है काल बैशाखी योग

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी प्रो एसएन पांडेय का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नम हवा के मिलन से काल बैशाखी का योग बनता है। वो बताते हैं काल बैशाखी नाम पश्चिम बंगाल से ही मिला है। वो बताते हैं कि पहले छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्रों में तपिश व बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नम हवा के संयोग से अंधड़ व तेज बारिश की स्थिति बनती है। इससे जान-माल की ज्यादा हानि होने की आशंका बनी रहती है। पूर्वांचल में सोनभद्र की पहाड़ियों में नम हवा से भी ऐसे हालात बनते हैं जिसका असर बनारस तक नजर आता है।
काल बैशाखी को मौसम विज्ञान की भाषा में नारवेस्टर कहते हैं
प्रो पांडेय ने बताया कि दरअसल काल बैशाखी उत्तर-पश्चिम दिशा से आता है। इसलिए इसे मौसम विज्ञान की भाषा में "नारवेस्टर" भी कहते हैं। ये चट्टानी इलाकों से चलता है और दिन में जब चट्टानें गर्म हो जाती हैं और उधर पश्चिम बंगाल से उठने वाली नमी का वायुमंडल मे मिलन होता है तभी ऐसा योग बनता है। ये सोलर हीटिंग से होता है और इसका असर दोपहर में दो से चार बजे के बीच ज्यादा होता है। इसके चलते अचानक अंधड़ और बिजली कड़कने के साथ तेज बारिश होती है जिससे जान-माल का खतरा होता है।
अभी पारा 40 के ऊपर ही रहने के संकेत

प्रो मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तो पारा 40 के ऊपर ही रहने के अनुमान हैं। बताया कि जैसे शुक्रवार को दिन में बनारस में पारा 45.2 डिग्री सेल्सियस तक तो प्रयागराज में 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था उसमें थोड़ी गिरावट आ सकती है। वो भी शुक्रवार की शाम आई नमी के चलते। लेकिन अगर ऐसा होता है तो इसमें उमस बढ़ेगी और पसीना ज्यादा होगा।
4-5 मई तक हो सकती है बारिश

उन्होंने बताया कि अनुमान लगाया जा रहा है कि 4-5 मई तक तेज हवा यानी अंधड़ और गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वैसे तो बवंडर जैसा ही माहौल बनता दिख रहा है। वो बताते हैं कि वैसे आमतौर पर मई महीने में ऐसा वातावरण बनता है जब गर्मी शीर्ष पर होती है और आर्द्रता बिल्कुल ही निचले स्तर पर।

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