वो ईनामी बदमाश जिसकी उम्र से ज्यादा उसपर आपराधकि मुकदमे दर्ज थे

20 साल की उम्र में पहली हत्या में आया था नाम

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी. बाहुबलियों का गढ़ कहे जाने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश में ऐसे गुमराह युवाओं की भी कमी नहीं जिन्हें अपराध की दुनिया की चकाचौंध आकर्षित करती है। वो अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनकर अपनी दहशत फैलाना चाहते हैं। 20 साल की उम्र में वाराणसी के दशाश्वमेध क्षेत्र के खालिसपुरा निवासी गोपाल यादव की हत्या कर जुर्म की दुनिया में कदम रखने वाले एक लाख रुपये के ईनामी बदमाश रोशन गुप्ता उर्फ बाबू उर्फ किट्टू की कहानी भी ऐसी है। उम्र से अधिक उसके अपराधों की गिनती थी। उसपर उम्र से अधिक मुकदमे दर्ज थे। अब धीरे-धीरे उसके अपराध बढ़ते जा रहे थे। वह मुन्ना बजरंगी बनता इसके पहले ही पुलिस की गोली का शिकार हो गया।


वाराणसी के बड़ी पियरी निवासी राजकुमार ने अपने बेटे रोशन गुप्ता 'किट्टू' का नाम बचपन में बाबू रखा था। पर वह बाबू जब बड़ा हुआ तो वह मां-बाप की ख्वाहिशों से अलग सपने देखने लगा। उसे जरायम की दुनिया की चकाचौंध भाने लगी। किट्टू ने 2011 में महज 20 साल की उम्र में दशाश्वमेध क्षेत्र के खालिसपुर निवासी गोपाल यादव की हत्याकर जरायम की दुनिया में कदम रखा। कजा जाता है कि उसका सपना मुन्ना बजरंगी जैसा बनना था।


किट्टू का खौफ व्यापारियों था। उसके खिलाफ वाराणसी और गाजीपुर में हत्या के सात, हत्या के प्रयास में नौ और रंगदारी सहित अन्य आरोपों में 34 मुकदमे दर्ज थे। बीते दिनों 15 नवंबर को उसने बनारस में एक सर्राफा व्यवसायी को पिस्टल सटाकर 50 लाख कर रंगदारी मांगी। इस घटना के बा पुलिस उसके पीछे लग गई। उसपर पहले 50 हजार और बाद में एक लाख रुपये का ईनाम घोषित कर दिया गया।


तीन दिन पहले उसी व्यावसायी से पिस्टल सटाकर रंगदारी मांगने का वीडियो भी बुधवार को वायरल हुआ और सवाल उठा कि 10 दिन बाद भी किट्टू को पकड़ नहीं सकी है पुलिस। इसके ठीक दूसरे दिन गुरुवार को किट्टू का पुलिस से आमना-सामना हुआ और उसका हश्र भी वही हुआ जो हर अपराधी का होता है। उसके पुलिस की गोली का शिकार बनते ही कारोबारियों ने राहत की सांस ली। कारोबारियों ने एसएसपी अमित पाठक और उनकी टीम को इसके लिये बधाई दी।

रफतउद्दीन फरीद
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