जानिए क्या है SC/ST ACT, जिसे लेकर लगातार हो रहा विरोध, कल होगा भारत बंद

जानिए क्या है SC/ST ACT, जिसे लेकर लगातार हो रहा विरोध, कल होगा भारत बंद

Sarweshwari Mishra | Publish: Sep, 05 2018 01:53:18 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

इस एक्ट का यह है प्रावधान

वाराणसी. एससी/एक्ट को मूल रूप में बहाल करने के मामले में सवर्णों की नाराजगी बढ़ने लगी है। SC/ST Act को लेकर 6 सितंबर को इसे लेकर विभिन्न संगठन के लोगों ने भारत बंद का भी ऐलान कर दिया है। बतादें कि केंद्र सरकार ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले को पलट दिया था। जिसके बाद धीरे-धीरे सवर्णों में नाराजगी बढ़ने लगी। कई संगठनों ने सरकार पर दलितों के तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया। बताया जा रहा है कि सवर्णों की नाराजगी अब बाकी राज्यों की ओर भी रुख करने लगी है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटते हुए एससी/एसटी एक्ट को वापस मूल स्वरूप में बहाल कर दिया। हाल ही में ये संशोधित एससी/एसटी (एट्रोसिटी एक्ट) फिर से लागू किया है। अब फिर से इस एक्ट के तहत बिना जांच गिरफ्तारी संभव हो गई।

क्या है एससी एसटी एक्ट
अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर होने वाले अत्याचार और उनके साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के मकसद से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम 19689 बनाया गया था। जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में इस एक्ट को लागू किया गया था। इसके तहत इन लोगों को समाज में एक समान दर्जा दिलाने के लिए कई प्रावधान किए गए और इनकी हरसंभव मदद के लिए जरूरी उपाय किए गए । इन पर होने वाले अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई ताकि ये अपनी बात खुलकर रख सके।

क्यों बनाया गया यह एक्ट
1955 के प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट के बावजूद सालों तक न तो छुआछूत का अंत हुआ और नही दलितो पर अत्याचार रुका। यह एक तरह से एससी और एसटी के साथ भारतीय राष्ट्र द्वारा किए गए समानता और स्वतंत्रता के वादे का उल्लंघन हुआ। देश की चौथाई आबादी इन समुदाओं से बनती है और आजादी के तीन दशक बाद भी उनी आर्थीक और सामाजिक स्थित् तमाम मानकों पर बेहद खराब थी। ऐसे में इस खामी को दूर करने और इन समुदायों को अन्य समुदायों के अत्याचारों से बचाने के मकसद से इस एक्ट को लाया गया। इस समुदाय के लोगों को अत्याचार और भेदभाव से बचाने के लिए इस एक्ट में कई तरह के प्रवाधान किए गए।

अब तक था ये नियम
इस एक्ट के तहत अभी तर जातिसूचक शब्दों का इस्तेाल करने पर तिरंत मामला दर्ज होता था। इनके खिलाफ मामलों की जांच का अधिकार इंस्पेक्ट रैंक के पुलिस अधिकारी के पास भी था। केस दर्ज होन के बाद तुरंत गिरफ्तारी का भी प्रावधान था। ऐसे मामलों की सुनवाई केवल स्पेशल कोर्ट में ही होती थी। साथ ही आगे जमानत भी नहीं मिलती थी। सिर्फ हाईकोर्ट से ही जमानत मिल सकती थई।

इस एक्ट का यह है प्रावधान
एससी एसटी एक्ट 1989 में ये व्यवस्था की गई कि अत्याचार से पीड़ित लोगों को पर्याप्त सुविधाएं और कानूनी मदद दी जाए जिससे उन्हें न्याय मिले। इसके साथ ही अत्याचार के पीड़ितों के आर्थिक और सामाजिक पुनर्नास की व्यवस्था की जाए।


इस एक्ट के तहत मामलों में जांच और सुनवाई के दौरान पीड़ितों और गवाहों की यात्रा और जरूरतों का खर्च सरकार की तरफ से उठाया जाय। प्रोसिक्यूशन की प्रक्रिया शुरू करने और उसकी निगरानी करने के लिए अधिकारी नियुक्त किए जाए और इन उपायों के अमल के लिए राज्य सरकार जैसा उचित समझेगी। उस स्तर पर कमेटी बनाई जाएगी। एक्ट में प्रावधानों की बीच-बीच में समीक्षा की जाए। ताकि उनका सही तरीके से इस्तेमाल हो सके। उन क्षेत्रों और पता लगाना जहां एससी और एसटी पर अत्याचार हो सकते हैं और उसे रोकने के उपाय करने के प्रावधान किए गए।

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