यूपी का सियासी संग्राम, माफिया-सफेदपोश ठाकुर दो फाड़

यूपी का सियासी संग्राम, माफिया-सफेदपोश ठाकुर दो फाड़
kshatriya logo

भाजपा को हो सकता है नुकसान, जानिए किसे ठाकुर नेता को लगा है झटका

वाराणसी. सियासी मानसून में भींगे उत्तर प्रदेश में मायावती व दयाशंकर सिंह विवाद के बाद शुरू हुई जुबानी जंग में उत्तर प्रदेश के क्षत्रियों में दो फाड़ हो गया है। पूर्वांचल के माफिया से लेकर माननीय तक इस सियासी संग्राम में बंट चुके हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों में शामिल ठाकुर स्वाति सिंह व मायावती को लेकर अपना-अपना राग अलाप रहे हैं। 

मायावती पर अशोभनीय टिप्पणी के बाद कानूनी दांव-पेंच में फंसे दयाशंकर सिंह फरारी काट रहे भाजपा से निष्कासित दयाशंकर सिंह देवघर, झारखंड में पूजन-अर्चन करते देखे गए। सूत्रों के अनुसार पूर्वांचल के एक बाहुबली के संरक्षण में दयाशंकर सिंह भाजपा शासित राज्यों में पुलिस से बचते-फिर रहे हैं। दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह के सियासी रणभूमि में उतरने से क्षत्रप समाज का एक धड़ा जो खामोश था, दयाशंकर व उनके परिवार की हिफाजत के लिए उठ खड़ा हुआ है। 


उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाल के दिनों में उठे तुफान ने पूरी पटकथा ही बदल दी है। कहा तो भाजप समेत सभी प्रमुख पार्टियां पिछड़ों-दलितों की बात कह रही थी, मायावती -दयाशंकर सिंह प्रकरण के बाद से यहां की राजनीति फिलाहाल क्षत्रिय व दलित समाज के इर्दगिर्द घूम रही है। क्षत्रियों के लामबंद होने से राजनीतिक दल सकते में हैं क्योंकि जिन दलों के प्रमुखों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी, उनकी पार्टी के सांसद, विधायक से लेकर मंत्री तक इस मामले में या तो दयाशंकर सिंह के साथ खड़े हैं या फिर मायावती पर की गई टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ।

 
पूर्वांचल में भी इस ठाकुर बनाम दलित राजनीति की तपिश झुलसा रही है। एक तरफ बसपा में मौजूद ठाकुर लॉबी है जो दयाशंकर सिंह को उनके द्वारा की गई अनर्गल टिप्पणी पर क्षत्रिय समाज का कलंक बता रही है। इस गुट की अगुवाई बसपा नेता उमाशंकर सिंह कर रहे हैं। पूर्वांचल में उमाशंकर की लॉबी का भी खासा प्रभाव है। बसपा के बाहुबली नेता विनीति सिंह से लेकर चंदौली, मीरजापुर, वाराणसी के तमाम चर्चित ठाकुर चेहरों में इस लॉबी की गहरी पैठ है। 

 उत्तर प्रदेश में क्षत्रिय समाज की क्षत्राणी का चेहरा बनकर उभरी स्वाति सिंह के नाम पर दयाशंकर सिंह के साथ उत्तर प्रदेश के वह क्षत्रिय समाज जुड़े हैं जो कहीं न पूर्वांचल के दबंग क्षत्रियों के साथ खड़े हैं। सूत्रों के अनुसार वाराणसी के एक मठ से जुड़े उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद क्षत्रिय समाज के चर्चित चेहरों का एक धड़ा दयाशंकर सिंह के साथ कदमताल कर रहा है। 


दया की भाजपा में वापसी न हुई तो होगा नुकसान 

दयाशंकर सिंह-मायावती प्रकरण में पहली बाजी मायावती के हाथ लगी थी। अपने नेता की अशोभनीय टिप्पणी के चलते बैकफुट पर आई भाजपा ने पल भर की देरी किए बिना दयाशंकर को प्रदेश उपाध्यक्ष की कुर्सी से तो उतारा ही, साथ ही पार्टी से छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। उस समय तक तो सब ठीक था लेकिन बसपा के प्रदर्शन ने फिर पासा पलट दिया। दयाशंकर की बहन-बेटी व पत्नी को लेकर बसपा ने आपत्तिजनक नारों से यूपी की सियासी जंग में घमासान मचा दिया। बाजी बसपा के हाथ से फिर भाजपा के हाथ में आ गई। स्वाति सिंह के समर्थन में क्षत्रिय समाज से लेकर महिलाएं व अन्य वर्ग से लोग उनके साथ खड़े हो गए। ड्राईविंग सीट पर आने के बाद भी बीजेपी ने दयाशंकर सिंह को पार्टी में वापस नहीं लिया। यह बात क्षत्रिय समाज समेत बीजेपी के कार्यकर्ताओं को भी खटक रही है। आम कार्यकर्ताओं का कहना है कि दयाशंकर सिंह को कुर्सी से हटाया लेकिन अब उनकी वापसी हो जानी चाहिए क्योंकि जब परिवार पर संकट आया तो हमारा कर्तव्य हैं कि हम अपने सिपाही के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें वरना चुनाव में भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। 


राजनाथ खेमा परेशान, उठ रहीं अंगुलियां
दयाशंकर सिंह प्रकरण में उत्तर प्रदेश के ठाकुरों का एक धड़ा भाजपा नेता व गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी खफा चल रहा है। अंदरखाने की खबरों पर यकींन करें तो दयाशंकर सिंह और राजनाथ सिंह के बीच पटरी नहीं है। मायावती पर टिप्पणी के बाद दयाशंकर सिंह पर कार्रवाई के लिए राजनाथ खेमा ने बहुत तेजी दिखाई थी जिसके चलते आननफानन में पार्टी ने दयाशंकर सिंह को उपाध्यक्ष की कुर्सी से हटाने के साथ ही पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था। स्वाति सिंह के मैदान में आने के बाद राजनाथ खेमा फिर परेशान है क्योंकि अपने पति के साथ खड़ी हुई स्वाति ने ठाकुर समाज में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई जो भविष्य में पूर्वांचल के बड़े ठाकुर नेताओं के लिए खतरे का संकेत भी है। 
Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned