बनारस में गुलाम अली व पाकिस्तानी उच्चायुक्त के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग

बनारस में गुलाम अली व पाकिस्तानी उच्चायुक्त के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग
lawyers meet to dm for ban entry ghulam ali

हिंदूवादी संगठनों के बाद अधिवक्ता भी कूदे मैदान गुलाम अली के विरोध में

 वाराणसी. पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित और गुलाम अली को लेकर बनारस में तपिश बढ़ती जा रही है। हिंदू वादी संगठन हिंदू युवा वाहिनी और शिवसेना के बाद अब अधिवक्ता समाज ने भी अब संकट मोचन मंदिर संगीत समारोह में गुलाम अली और पाकिस्तान के उच्चायुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया दिया है।
सोमवार को कमलेश चंद्र त्रिपाठी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल  जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। जिलाधिकारी राजमणि यादव को दिए पत्रक में अधिवक्ताओं ने पाकिस्तानी  कलाकार गुलाम अली और उच्चायुक्त अब्दुल बासित के बनारस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। जिलाधिकारी को दिए पत्रक में अधिवक्ताओं ने कहा कि हनुमान जी का ब्रह्मचारी जीवन प्रभु श्रीराम की सेवा में बीता। नृत्य संगीत से उनका दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं था। मंदिर परिसर पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन के है न कि गजल, कव्वाली। संकट मोचन मंदिर के महंत पर करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता समाज ने जिलाधिकारी से संगीत समारोह में गजल सम्राट के कार्यक्रम पर रोक लगाने व मंहत के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की। 

उधर हिंदू युवा वाहिनी के मंडल प्रभारी अंबरीष सिंह भोला के नेतृत्व में भी कार्यकर्ताओं का एक दल भी अधिवक्ताओं के पीछे-पीछे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और पाकिस्तानी कलाकार गुलाम अली व उच्चायुक्त के बनारस में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि संकट मोचन मंदिर परिसर में गुलाम अली व उच्चायुक्त के कदम पडऩे से उन लोगों की आत्मा को कष्ट पहुंचेगा जिन्होंने अपनी जान सात मार्च 06 को मंदिर परिसर में हुए विस्फोट में गंवा दी थी। 
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