Vishwanath Corridor: अब काशी विश्वनाथ की ससुराल का भवन भी गिराया जाएगा, बाबा के शादी-व्याह और गौना पर संकट

Vishwanath Corridor: अब काशी विश्वनाथ की ससुराल का भवन भी गिराया जाएगा, बाबा के शादी-व्याह और गौना पर संकट
विश्वनाथ मंदिर और मां पार्वती आवास

Ajay Chaturvedi | Publish: Oct, 21 2019 01:18:02 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

Vishwanath Corridor: विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने जारी किया है भवन अधिग्रहण का नोटिस
-विश्वनाथ मंदिर के महंत इस सदमे से हुए बीमार चल रहा इलाज
-मंदिर क्षेत्र के दुकानदार 9 दिन तक धरने के बाद 3 दिन से है अनशन पर

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट Vishwanath Corridor के चलते अब सैकड़ों साल पुरानी परंपरा के भी टूटने की आशंका है। अब बाबा विश्वनाथ का तिलक, व्याह और गौना कहां होगा, माता पार्वती कहां रहेंगी इन सब को लेकर काशी के लोग खासे चिंतित हैं। उन्हें लग रहा है कि अब सदियों से चली आ रही यह परंपरा भी टूट जाएगी। वजह मंदिर प्रशासन ने हाल ही में जिन 13 भवनों के अधिग्रहण का नोटिस जारी किया है उसमें माता पार्वती का आवास भी है।

बता दें कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के ठीक सामने महंत परिवार का आवास है। इसे ही माता पार्वती के आवास की मान्यता है। इसी आवास में तीन सौ साल से काशी विश्वनाथ, मां पार्वती (गौरा) और श्री गणेश व कार्तिकेय की चल प्रतिमाएं विराजमान हैं। इन सभी विग्रहों की नियमित पूजा होती है। यह पूजा परंपरागत रूप से पीढियों से महंत परिवार ही करता चला आ रहा है। इसी आवास पर बाबा विश्वनाथ के विवाह के व्याह की रस्म अदा की जाती है तो यहीं तिलक होता है और यहीं से बाबा का गौना बारात निकलता है। यहां यह भी बता दें कि बाबा विश्वनाथ का तिलक वसंत पंचमी को मनाया जाता है तो विवाह महाशिवरात्रि को और होली से पूर्व रंग भरी एकादशी के दिन इसी आवास से बाबा की गौना बारात निकलती है। इन सारी परंपराओं का निर्वाह महंत परिवार ही करता है।

लेकिन अब विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने जिन 13 भवनों के अधिग्रहण के लिए नोटिस जारी किया गया है, दावा आपत्ति मांगी गई है, उसके बाद से महंत परिवार भी सदमें में है। महंत डॉ कुलपति तिवारी गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रहे हैं। बीएचयू के पूर्व एमस न्यूरोलॉजिस्ट प्रो विजय नाथ मिश्र डॉ तिवारी का इलाज कर रहे हैं। प्रो मिश्र के अनुसार इस सदमें से महंत डॉ कुलपति तिवारी की याददाश्त चली गई है। वह डिमेंशिया से पी़ड़ित हैं। सरकार के निर्णय के बाद महंत ने कहा कि हमें भवन नहीं परंपरा के टूटने का डर है। मन पर बोझ सा है कि बाबा की सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन कैसे होगा।

यहां यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए मंदिर प्रशासन अब तक 280 भवन खरीद कर उसे जमींदोज कर चुका है। अब केवल 13 भवन ही विश्वनाथ कॉरिडोर में बाधा बने हैं जिन्हें खरीदा जाना बाकी है। इसमें विश्‍वनाथ गली के छह, ब्रह्मनाल के चार, त्रिपुरा भैरवी के दो तथा कालिका गली का एक भवन है।

इस बीच इन 13 भवनों के साथ ही मंदिर के आसपास की दुकानें भी गिराई जानी है। इसके विरोध में विश्वनाथ गली के दुकानदारों ने पहले 9 दिन तक धरना दिया फिर 3 दिन से क्रमिक अनशन पर हैं। विश्‍वनाथ गली व्‍यवसायी समिति के अध्‍यक्ष महेश चंद्र मिश्र का कहना है कि मंदिर प्रशासन मनमानी के साथ परंपराओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। विस्‍तारीकरण के लिए भवन ना बेचने वालों को अधिग्रहण का भय दिखाया जा रहा है। इसी के चलते महंत कुलपति तिवारी की हालत बिगड़ी है। उन्‍होंने प्रशासन से सवाल किया कि विश्‍वनाथ धाम में विश्‍वनाथ मंदिर के महंत नहीं होंगे तो क्‍या बाहर से आए लोगों से परंपराओं का संचालन कराया जाएगा?

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