scriptMakar Sankranti bath and Shani Pradosh big challenge amid Corona transition | कोरोना के लगातार तेज होते संक्रमण के बीच मकर संक्रांति स्नान, बड़ी चुनौती, जानें कब है संक्रांति... | Patrika News

कोरोना के लगातार तेज होते संक्रमण के बीच मकर संक्रांति स्नान, बड़ी चुनौती, जानें कब है संक्रांति...

वाराणसी में जिस तरह से नए साल के 12 दिनों में कोरोना का संक्रमण तेज हुआ है, वो मकर संक्रांति स्नान के लिए बड़ी चुनौती है। कुंभ हो, अर्द्ध कुंभ हो या माघ मेला, जुटान भले ही प्रयागराज में हो पर वहां जाने से पहले और लौटते वक्त श्रद्धालु काशी में गंगा स्नान को आते हैं। इस बार ऐसे श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा होने की उम्मीद लगाई जा रही है। वजह है श्री काशी विश्वनाथ धाम। ऐसे में काशी में जुटने वाली भीड़ को लेकर स्थानीय लोग सहमे हैं।

वाराणसी

Published: January 13, 2022 03:15:59 pm

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी. कोरोना के लगातार तेज होते संक्रमण के बीच मकर संक्रांति स्नान बड़ी चुनौती होगी। बता दें वाराणसी में कोरोना संक्रमितों की संख्या अब ढाई हजार से ज्यादा हो गई है। इस बीच शनिवार 15 जनवरी को मकर संक्रांति भी है और शनि प्रदोष भी। वैसे भी कुंभ हो, अर्द्ध कुंभ हो या माघ मेला, जुटान भले ही प्रयागराज में हो पर वहां जाने से पहले और लौटते वक्त श्रद्धालु काशी में गंगा स्नान को आते हैं। ऐसे में 15 जनवरी से काशी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। ऐसे में कोरोना संक्रमण पर लगाम लगा पाना जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान (फाइल फोटो)
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान (फाइल फोटो)
शनिवार को मनाई जाएगी मकर संक्रांति

काशी के प्रमुख ज्योतिषाचार्य पंडित बृज भूषण दुबे के मुताबिक इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी शनिवार को मनाई जाएगी। बताया कि शुक्रवार 14 जनवरी की रात 834 बजे संक्रांति लग जाएगी लेकिन इसका पुण्यकाल शनिवार 15 जनवरी को होगा। ऐसा सनातन हिंदू धर्म की मान्यता के तहत शनिवार को उदया तिथि मिलने के कारण है। उन्होंने पत्रिका संग बातचीत में बताया कि शनिवार को ही शनि प्रदोष भी है ऐसे में संक्रांति का महत्व व पुण्य काल ज्यादा होगा। इसी दिन श्रद्धालु गंगा स्नान और दान-पुण्य कर सकेंगे। शनि प्रदोष होने के नाते भगवान शिव की आराधना से भक्तों को ज्यादा लाभ होगा।
शनि प्रदोष, मकर संक्रांति के मिलन से बढ़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

मकर संक्रांति और शनि प्रदोष एक साथ एक ही दिन पड़ने से धर्म नगरी काशी में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ेगा। गंगा घाट से लेकर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक रेला होगा। इस भीड़ को नियंत्रित करना और खास तौर पर कोरोना संक्रमण से बचाव कठिन ही नहीं टढी खीर साबित हो सकता है। वजह साफ है कि गंगा स्नान को लेकर अभी तक किसी तरह की पाबंदी नहीं है।
विश्वनाथ मंदिर में हैं ये बंदिशें

विश्वनाथ मंदिर में जरूर कुछ बंदिशें लगाई गई हैं। गर्भ गृह में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। सेनटाइजर का इंतजाम है। विश्वनाथ धाम परिसर बड़ा होने से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा सकता है।
हरिद्वार कुंभ के बाद संक्रमण में आई थी तेजी

बता दें कि पिछले साल हरिद्वार कुंभ के दौरान कोरोना की दूसरी लहर ने देश भर में तांडव मचाया था। वाराणसी के मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी उस कुंभ स्नान के बाद ही कोरोना के चपेट में आए और लंबे इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।

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