मौनी अमवस्या के दिन कतई न करें ये काम, पड़ जाएंगे मुश्किल में, ये होंगे दुस्परिणाम...

सोमवार को पड़ रही है मौनी अमावस्या, है दुर्लभ संयोग।

वाराणसी. किसी भी हिंदी मास के कृष्ण पक्ष का पंद्रहवां दिन अमावस्या होता है। लेकिन माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या का खास महत्व होता है। फिर महाकुंभ या अर्द्ध कुंभ वाले वर्ष पड़ने वाली अमावस्या खुद ब खुद खास हो जाती है। एक बात और सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं, ऐसे में इसका महत्व और भी खास हो जाता है। इस बार माघ मास की यह अमावस्या यानी मौनी अमावस्या सोमवार 04 फरवरी को पड़ रही है। इस अमावस्य पर कुछ खास चीजें वर्जित हैं। यानी ऐसे कार्य तो भूल कर भी नहीं करने चाहिए अन्यथा उसके घातक परिणाम हो सकते हैं।

स्नान-ध्यान तक तो कतई न बोलें
मौनी अमावस्या पर इस साल कई शुभ संयोग बन रहे हैं। मौनी अमावस्या के दिन संतों की तरह चुप रहना उत्तम है। अगर ज्यादा देर तक चुप रहना संभव नहीं है तो पूजा अर्चना के बाद बोल सकते हैं। इस दिन सुबह जल्द उठें और नित्य क्रिया से निवृत्त होने के बाद अगर गंगा घाट तक नहीं जा सकते तो घर में भी टैप वाटर में गंगा जल के साथ काला तिल मिला कर स्नान करे। फिर भगवान भास्कर को जल अर्पित करें। लेकिन यहां यह गौर करना जरूरी है कि स्नान से पूर्व कदापि न बोलें।

गरीब-असहाय का न करें उपहास
मौनी अमावस्या के दिन किसी भी गरीब और असहाय व्यक्ति का उपहास नहीं उड़ाना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार शनिदेव गरीबों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में जो व्यक्ति गरीब का अपमान करता है, उस पर शनिदेव कृपा नहीं करते।

पीपल की पूजा करें पर स्पर्श नहीं
अमावस्या के दिन पीपल की पूजा करना शुभ फलदायी माना गया है। लेकिन शनिवार को छोड़कर किसी अन्य दिन पीपल का स्पर्श करना अशुभ माना गया है। इसलिए मौनी अमावस्या पर पूजा करें लेकिन उसे स्पर्श न करें।

शारीरिक संबंध पूर्णतया वर्जित
मौनी अमावस्या को स्त्री और पुरुष दोनों को शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए। गरुड़ पुराण के मुताबिक- मौनी अमावस्या पर यौन संबंध बनाने से पैदा होने वाली संतान को जीवन में कई तरह के कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं ऐसा करने से पितृगण भी नाराज होते हैं।

पति-पत्नी वाद-विवाद से बचें
मौनी अमावस्या के दिन पति-पत्नी कोकिसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचना चाहिए। इससे घर में अशांति का वातावरण बनता है। ये हमेशा नकारात्मक शक्ति को जन्म देता है। इस दिन मौन रहकर भगवान का भजन करना चाहिए।

श्मशान या कब्रिस्तान पर घूमने न जाएं
मौनी अमावस्या की रात श्मशान घाट या कब्रिस्तान न जाएं। उसके आसपास भी न घूमें। इससे नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव तेज होता है।

जल्दी उठें और स्नान-ध्यान में लगें
इसके अलावा मौनी अमावस्या की सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए। इस दिन स्नान, दान से मोक्ष फल की प्राप्ति होती है।

मौनी अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त

अमावस्या तिथि - सोमवार, 4 फरवरी 2019
अमावस्या तिथि आरंभ - 23:52 बजे से (3 फरवरी 2019)
अमावस्या तिथि समाप्त - 02:33 बजे (5 फरवरी 2019)

मौनी अमावस्या पूजा विधि
मान्यता है कि मौनी आमवस्‍या के दिन गंगा जल अमृत में बदल जाता है। इस दिन अगर व्रत रखने वाले को चाहिए कि वह सुबह जल्दी उठ कर सबसे पहले स्नान करें, फिर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें। इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। मोनी अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करें। सूर्य को जल दें।

वाराणसी में ये किए गए हैं प्रबंध
वाराणसी में मौनी अमावस्या के दिन आने वाले स्नानार्थियों की सहूलियत के लिए जिला प्रशासन की ओर से काफी कुछ इंतजाम किए गए हैं।
-खास तौर ट्रैफिक पुलिस ने प्रयागराज से आने वाले तीर्थयात्रियों का खास खयाल रखा है। रूट प्लान तैयार किया गया है। यह प्लान एनडीआरएफ और ट्रैपिक पुलिस ने मिल कर तैयार किया है।
-विश्वनाथ मंदिर गर्भगृह में देर तक नहीं रुक पाएंगे भक्त
-दशाश्वमेध घाट और मैदागिन की ओर से बैरिकेडिंग का काम अंतिम दौर में

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Ajay Chaturvedi
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