पीएम मोदी न सीएम अखिलेश, यहां बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिखायी ताकत

यूपी चुनाव से पहले बनायी बढ़त, जानिए क्या है मामला

By: Devesh Singh

Published: 19 Jan 2017, 08:21 PM IST

वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी व सीएम अखिलेश यादव ने विकास के नाम पर यूपी विधानसभा चुनाव 2017 लडऩे की तैयारी की है। बीजेपी व सपा इसी मुद्दे पर चुनाव जीतने का दावा कर रही है लेकिन एक जगह बसपा सुप्रीमो मायावती ने सभी को पीछे छोड़ कर चुनाव से पहले अपनी बढ़त बना ली है।
बीजेपी ने सीएम प्रत्याशी घोषित नहीं किया है और पीएम नरेन्द्र मोदी के नाम पर चुनाव लडऩे की तैयारी की है। जबकि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के कुनबे में सीएम अखिलेश यादव व शिवपाल यादव के बीच की लड़ाई खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है। इससे साफ हो गया है कि सपा चुनाव जीतती है तो सीएम अखिलेश यादव ही अगले सीएम होंगे। जबकि बसपा के चुनाव जीतने पर मायावती के सीएम बनने पर किसी को संदेह नहीं है। ऐसे में बीजेपी व सपा के लाख दावे के बाद भी दोनों पार्टी अलग चुनाव लडऩे की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। जबकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने किसी दल से गठबंधन की सारी संभावना को नकारते हुए 401 सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती को खुद पर विश्वास है इसलिए उन्हें गठबंधन की जरूरत नहीं पड़ी है। जबकि बीजेपी व सपा को अपने स्टार प्रचारक पर पूर्ण विश्वास नहीं है, जिसके चलते सपा और बीजेपी अकेले चुनाव नहीं लडऩा चाहती है।



पहले पिछड़ी अब आगे निकल रही बसपा
यूपी में चुनाव अधिसूचना लागू होने से पहले बसपा पिछड़ चुकी थी। बसपा से कई नेता टूट कर बीजेपी व अन्य दलों में चले गये थे। बसपा के खिलाफ नकारात्मक लहर चलने लगी थी लेकिन अब कहानी बदल चुकी है। सपा और बीजेपी में प्रत्याशियों के सूची जारी करने में घमासान मचा हुआ है जबकि प्रत्याशियों की सूची जारी करके अपने विरोधी दलों से आगे निकल चुकी है।


बिगड़ा समीकरण तो बदले जा सकते हैं प्रत्याशी
बसपा सुप्रीमो ने पहले ही संकेत दिया है कि अन्य दलों की सूची जारी होने के बाद ही नये समीकरण के अनुसार प्रत्याशी बदले जा सकते हैं। यदि विरोधी दलों का समीकरण सही होगा तो बसपा घोषित प्रत्याशियों को नहीं बदलेगी।



मायावती ने बदली अपनी छवि
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस बार अपनी छवि बदल ली है। पहले के चुनाव को देखा जाये तो नामांकन के पहले तक बसपा के प्रत्याशी बदले जाते थे। राजनीति में यह कहा जाता था कि जब तब बसपा के सिंबल पर नामांकन नहीं हो जाता है तब तक सीट पक्की नहीं समझी जानी चाहिए। इस बार बसपा सुप्रीमो ने अपनी छवि बदलते हुए पहले ही प्रत्याशियों की सूची जारी की है जिसमे अभी तक बदलाव नहीं किया गया है।
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