यूपी में लगेगा  जय "भीम-जय मीम" का नारा

 यूपी में लगेगा  जय
mayawati and owaisi

बसपा और एआइमआइएम कर सकते हैं दोस्ती, मायावती की बदली रणनीति ने किया मजबूर 

वाराणसी. उत्तर प्रदेश के सियासी संग्राम में रोज एक नया दांव देखने को मिल रहा है। यूपी की रेस में सबसे आगे चल रही बसपा एक प्रकरण के बाद बैकफुट पर चली गई। मायावती को दयाशंकर और स्वामी प्रसाद मौर्य प्रकरण से जबरदस्त झटका लगा है। बैकफुट से फं्रट सीट पर दोबारा आने के लिए बसपा बॉस यूपी में पार्टी को नए रंग और तेवर के साथ खड़ा कर रही है जिसके लिए वह जानी जाती हैं। 

राजनीतिज्ञों में दोस्ती-दुश्मनी माहौल के हिसाब से चलती है। दुश्मन भी चुनावी बयार में दोस्त बन जाते हैं और दोस्त दुश्मन। बसपा जिस रणनीति पर काम कर रही है उससे यह संभावना प्रबल हो गई है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में जय भीम-जय मीम का नारा लगेगा। मायावती की पार्टी बसपा और एआईएमआईएम के मुखिया ओवैसी उत्तर प्रदेश का किला फतह करने के लिए दोस्ती कर सकते हैं। 


महाराष्ट्र में पार्टी की मान्यता समाप्त होने के मंडरा रहे खतरे से पार होने के बाद ओवैसी और उनकी पार्टी एक बार फिर उत्तर प्रदेश में अपनी गतिविधियां तेज कर दी है। ओवैसी की पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश एआइएमआईएम नाम से सोशल पेज भी बनाया गया है। पेज पर ओवैसी समर्थक लगातार बसपा के साथ गठबंधन की मांग करते हुए जय भीम-जय मीम का नारा लगा रहे हैं। यहां बता दें कि ओवैसी समर्थकों ने पार्टी का शार्टकट नाम एमआईएम यानि मीम रखा है जबकि जय भीम बसपा का पुराना नारा है।


उधर बसपा भी उत्तर प्रदेश में इस बार दलित व मुस्लिम के सहारे सत्ता हासिल करने में जुटी है। बसपा ने एलान कर दिया है कि ब्राह्मण प्रत्याशियों को तो टिकट मिलेगा लेकिन क्षत्रियों को इस बार टिकट नहीं देंगे। बसपा इस बार यूपी की लगभग 138 सीटों पर मुस्लिम और 140 सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है।


मायावती के इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम प्रत्याशी उतारने से ओवैसी की पार्टी के सामने प्रत्याशियों का संकट तो खड़ा होगा ही, साथ ही वोट का बिखराव भी होगा जिसका सीधा फायदा भाजपा व सपा को होगा। यूपी में अपना अस्तित्व खोज रहे औवैसी के लिए यह बढिय़ा अवसर है क्योंकि दोस्तों से दगाबाजी का गम झेल रहीं मायावती को भी एक ऐसे ही दोस्त की दरकार है जो भाजपा के साथ ही सपा को भी चोट दे सके। 

फिलहाल उत्तर प्रदेश में चौदह फीसद से अधिक मुस्लिम इस बार अभी तक बसपा की ओर निगाह लगाए हैं। सपा से मुस्लिम बंधुओं का मोहभंग होता जा रहा है। भाजपा को यूपी में रोकने के लिए कांग्रेस में अभी दम नहीं दिख रहा है ऐसे में मुस्लिम बंधु बसपा की ओर देख रहे हैं। इस बात का अहसास ओवैसी व उनकी पार्टी को भी है। 
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