औषधीय खेती से दूर हो सकती है किसानों की बदहाली 

भदोही के किसान किशोर चन्द्र बर्णवाल ने पायी है सफलता 

भदोही. इन दिनों सूखे की मार से किसान बदहाली की कगार पर पहुंच गए हैं और उन्हें काफी नुकसान हो रहा हैं। लेकिन देश में कुछ ऐसे भी किसान हैं, जो सामान्य खेती से हटकर औषधीय खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कालीन नगरी भदोही के घाटमपुर में भी एक ऐसे ही किसान किशोर चन्द्र बर्णवाल हैं जिनका परिवार कालीन उद्योग से जुड़ा है लेकिन वे खुद औषधीय खेती करते है। 

उनके द्वारा वर्तमान समय में चीनी पौधा आर्टीमीशिया और सतावर ,एलोवेरा सहित नागालैंड की करकूमा लोंगा हल्दी की खेती की जा रही है। इस अलग तरह की खेती कर उन्होंने एक अलग मुकाम हासिल किया है। प्रगतिशील किसान होने की वजह से 2013 में गुजरात ग्लोबल एग्रीकल्चर समिट में उन्हें नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

किशोर चन्द्र पिछले कई सालों से औषधीय फसलों की खेती करते हैं, जिनका प्रयोग कैंसर, मलेरिया से लेकर ताकत की दवाओं में होता है, सबसे खास यह है की इन्होंने बाजार में बिकने वाली सामान्य हल्दी से अलग एक नई तरह की हल्दी की खेती शुरू की है। यह हल्दी नागालैंड मूल की है जिसे करकूमा लोंगा कहा जाता है। उन्हें इसका बीज नागालैंड के एक किसान से लिया था और इस समय वे एक एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं। 

बर्णवाल का कहना है कि इस प्रजाति की हल्दी में दोगुना फायदा होता है। इसके पत्ते से तेल भी निकाला जाता है, एक लीटर तेल की कीमत दस हजार रूपए तक है और इसका प्रयोग कैंसर के दवा में प्रयोग की जाती है साथ ही इसके चूर्ण से रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ाया जाता है । इसके साथ ही वे चीनी मूल के पौधे आर्टीमिसिया की भी खेती करते है जिसका उपयोग मलेरिया बुखार की दवा बनाने में काम आती है। उन्होंने बताया कि कई कंपनिया अच्छे दाम पर इसे खरीदती है। उनके द्वारा ऐलोवेरा, सतावर सहित अन्य प्रकार की औषधीय खेती की जाती है जिससे उन्हे अच्छा फायदा मिल रहा है। 

किशोर चन्द्र बर्णवाल का कहना है कि सरकारी स्तर पर इन औषधीय फसलों के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए और पैदावार को कैसे आसानी से किसान बेच सके उसके भी प्रयास होने चाहिए। अभी इस औषधीय फसलों को स्थानीय स्तर पर सप्लाई किया जाता है। अगर प्रशासनिक स्तर पर इसकी खपत के सही प्रयास हो तो यह खेती बदहाल किसानों के लिए संजीवनी का काम कर सकती है और किसान सामान्य खेती की अपेक्षा औषधीय खेती से दस गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। 

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अखिलेश त्रिपाठी
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