UPELECTION2017 राजपूतों के कंधे से सियासी गोली चलाएगी बीजेपी

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modi, rajnath and amit shah

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण-क्षत्रिय बोयेंगे वोट की फसल, काटेंगे पिछड़ेमोदी-शाह ने बनाया फूलप्रूफ प्लान

विकास बागी

वाराणसी. देश के ब्राह्मणों के राजनीती की पाठशाला कहे जाने वाली संगम नगरी इलाहाबाद में सोमवार को परिवर्तन रैली में जब पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश की चुनावी जंग का शंखनाद किया तब उन्होंने सबसे पहले उत्तर प्रदेश की माटी के राजपूत नेता और गृह मंत्री राजनाथ सिंह को यूपी की आन-बान-शान कहते हुए उनका स्वागत किया तब रैली स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, फिर बारी आई डॉ. मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र की, उनकी शान में भी मोदी ने दो लाइनें कही लेकिन तालियों का शोर थोड़ा कम हुआ लेकिन मोदी ने जब उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष केशव मौर्य को छोटा भाई बताते हुए अभिनंदन किया तो रैली स्थल तालियों की शोर के साथ ही हर-हर महादेव के नारे से गूंज उठा। 

परिवर्तन रैली में मोदी द्वारा लिए गए इन चार नामों की निहितार्थ में जाएंगे तो पाएंगे यह मोदी और शाह के एक गुप्त एजेंडे का हिस्सा है जिसके बल पर वह उत्तर प्रदेश की सियासी फसल काटने की तैयारी कर रहे है। एक ओर कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद को उत्तर प्रदेश के चुनावी अखाड़े में उतारा है तो दूसरा चेहरा ब्राह्मण का लाने की तैयारी है। फ़िलहाल कांग्रेस को मुकाबले से बाहर मानकर उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश को टक्कर देने के लिए भारतीय जनता पार्टी को किसी पिछड़े या दलित चेहरे को आगे लाएगी क्योंकि सवर्ण चेहरा उसके लिए जिताऊ नहीं हो सकता है। कहा जाता है कि हिंदी भाषी क्षेत्रों में बीजेपी को हिंदुत्व के साथ पिछड़े वर्ग का साथ बढ़त की ओर ले जाता है। यूपी में कल्याण सिंह हो या एमपी में उमा भारती, इसी संयोजन के तहत आगे बढ़े हैं। शिवराज सिंह चौहान भी मध्य प्रदेश में इसी गणित के बूते कमल खिला रहे हैं।इतना ही नहीं पीएम मोदी भी हिंदुत्व, पिछड़ा और चाय के संयोग से ही सत्ता पर काबिज हुए थे। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बीजेपी ने अपना पूरा ध्यान अब सोशल इंजीनि‍यरिंग पर दे दिया है। बीजेपी अपने एजेंडे के तहत दलितों - पिछड़ों को  पार्टी से जोड़ना चाहती है। इसी रणनीति के तहत केशव मौर्य को यूपी की कमान सौंपी गयी। अगर इतिहास की बात करें तो पिछले तीन यूपी अध्यक्ष सवर्ण जाति के थे और विधानसभा चुनाव में कुछ ख़ास नहीं कर पाए थे। ऐसे में पार्टी ने पिछड़ी जाति के नेता पर दांव लगाया। मौर्य कोइरी समाज के हैं और यूपी में कुर्मी, कोइरी और कुशवाहा ओबीसी में आते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के साथ अन्य चुनावों में भी बीजेपी को गैर यादव जातियों में इन जातियों का समर्थन मिलता रहा है और यही वजह है कि पार्टी ने पिछड़ी जातियों को अपने समर्थन का संदेश भी दे दिया है। अगर राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो साफ है कि बीजेपी को यूपी की सत्ता तक पहुंचने के लिए अगड़े-पिछड़े दोनों का समर्थन जरूरी होगा और ऐसे में जातीय संतुलन बनाने के लिए सवर्ण का सहारा लेगी।

राजनाथ को मिलेगी नैया पार कराने की जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश की क्षत्रिय राजनीती के मठाधीश कहे जाने वाले राजनाथ सिंह को बीजेपी उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट नहीं करेगी, वरन् उनके चेहरे के जरिये क्षत्रिय वोट बैंक पर कब्ज़ा करेगी। उत्तर प्रदेश खासकर पूर्वांचल के ठाकुरों में राजनाथ सिंह का सिक्का चलता है और ये बात बीजेपी अच्छे से जानती है। कुंडा के राजा यानी रघुराज प्रताप सिंह हों या फिर पूर्वांचल का बाहुबली सियासी कुनबा यानी माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह के परिवार से भी राजनाथ के अच्छे ताल्लुकात है। राजा भईया ने तो बीते चुनाव में ऐसा सियासी दांव खेला था जिससे मुलायम परिवार तक हिल गया था। आलम यह था कि विधान परिषद् व राज्यसभा के चुनाव से एक दिन पूर्व मुलायम और अखिलेश राजा भईया के घर चाय पीते नजर आये। इन सब सियासी गणित को देखते हुए बीजेपी को उत्तर प्रदेश में ठाकुर लॉबी को अपने पक्ष में करने के राजनाथ के कंधे की जरूरत पड़ेगी।

सिर्फ चेहरा ही रहेंगे ठाकुर साहब

लोकसभा को 73 सांसद देने वाले उत्तर प्रदेश में टीम मोदी कभी भी राजनाथ सिंह को cm के तौर प्रोजेक्ट नहीं करेगी। भले मोदी सार्वजानिक स्थानों पर राजनाथ की शान में कसीदे पढे लेकिन अंदरखाने का हाल सभी जानते है। मोदी को पता है कि यूपी में सत्ता राजनाथ के पास आई तो अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की कुर्सी को लेकर घमासान मचेगा।

ब्राह्मण को भाता है सत्ता का साथ

भारतीय राजनीती में माना जाता है कि ब्राह्मण हमेशा से सत्ता के साथ रहा है। जिसकी सरकार बनती दिखती है, ब्राह्मण वोट बैंक उधर ही भागता है। इसी लिए बीजेपी उत्तर प्रदेश में मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र को भी चुनाव में भूमिका निभाने के लिए तैयार कर रही है। हालांकि जोशी को मनाना टीम मोदी के लिए टेढ़ी खीर है। इलाहाबाद में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जोशी को उचित स्थान न मिलने का सन्देश जब तेजी से लोगों के बीच पहुंचा और उसकी प्रतिक्रिया जब मोदी के कानों में पड़ी तो गलती सुधारने के लिए सत्र के अंत में लंच के दौरान मोदी डॉ जोशी की प्लेट में फल खाने के साथ ही गुफ्तगू करते दिखे।

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