मोहनी एकादशी पर बन रहा ऐसा संयोग, व्रत रखने से दूर हो जाएंगे सारे कष्ट, जानिए क्या है शुभ मुहूर्त

Sarveshwari Mishra

Publish: Apr, 17 2018 02:48:14 PM (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India
मोहनी एकादशी पर बन रहा ऐसा संयोग, व्रत रखने से दूर हो जाएंगे सारे कष्ट, जानिए क्या है शुभ मुहूर्त

जो व्यक्ति मोहिनी एकादशी का व्रत कर रहा हो, उसे एक दिन पूर्व अर्थात दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए

वाराणसी. वैशाख मास को भी पुराणों में कार्तिक माह की तरह ही पावन बताया जाता है इसी कारण इस माह में पड़ने वाली एकादशी भी बहुत ही पुण्य और फलदायी मानी जाती है। वैशाख शुक्ल एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस एकादशी के व्रत से व्रती मोह माया से ऊपर उठ जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। जो व्यक्ति मोहिनी एकादशी का व्रत कर रहा हो, उसे एक दिन पूर्व अर्थात दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए।

 

व्रत के दिन एकादशी तिथि में व्रती को सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और नित्य कर्म कर शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए। स्नान के लिए किसी पवित्र नदी या सरोवर का जल मिलना श्रेष्ठ होता है। अगर यह संभव न हों, तो घर में ही जल से स्नान करना चाहिए।

 

 

मोहिनी एकादशी 2018 तिथि व मुहूर्त (Mohani Ekadashi Vrat Muhurt 2018)
वर्ष 2018 में मोहिनी एकादशी 26 अप्रैल को है
एकादशी तिथि – 26 अप्रैल 2018
पारण का समय – 05:48 से 08:07 बजे तक (27 अप्रैल2018)
एकादशी तिथि आरंभ – 10:46 बजे (25 अप्रैल 2018)
एकादशी तिथि समाप्त – 09:19 बजे (26 अप्रैल 2018)


मोहिनी एकादशी व्रत महत्व व पूजा विधि (Mohani Ekadashi Vrat, Puja Vidhi)
मोहिनी एकादशी की मान्यता है कि माता सीता के विरह से पीड़ित भगवान श्री राम ने, और महाभारत काल में युद्धिष्ठिर ने भी अपने दु:खों से छुटकारा पाने के लिये इस एकादशी का व्रत विधि विधान से किया था। एकादशी व्रत के लिये व्रती को दशमी तिथि से ही नियमों का पालन करना चाहिये। दशमी तिथि को एक समय ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिये। ब्रह्मचर्य का पूर्णत: पालन करना चाहिये। एकादशी से दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिये। इसके पश्चात लाल वस्त्र से सजाकर कलश स्थापना कर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिये। दिन में व्रती को मोहिनी एकादशी की व्रत कथा का सुननी या पढ़नी चाहिये। रात्रि के समय श्री हरि का स्मरण करते हुए, भजन कीर्तन करते हुए जागरण करना चाहिये। द्वादशी के दिन एकादशी व्रत का पारण किया जाता है। सबसे भगवान की पूजा कर किसी योग्य ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद को भोजनादि करवाकर दान दक्षिणा देकर संतुष्ट करना चाहिये। इसके पश्चात ही स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिये।

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