तिल-तिल बढ़ता है महादेव का शिवलिंग, अंग्रेज भी झुकाते थे शीश

तिल-तिल बढ़ता है महादेव का शिवलिंग, अंग्रेज भी झुकाते थे शीश
tilbhandeshwer temple

जानिये महादेव का यह अनूठा और अद्भुत मंदिर कहाँ है

विकास बागी

वाराणसी. शिवनगरी काशी में महादेव के कई रूप है। 
यहां कालभैरव रूप में महादेव रक्षा करते हैं तो द्वादश ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ तारक मंत्र से तारते हैं। क्या आपको मालूम है कि काशी में बाबा का एक ऐसा रूप है जो हर साल तिल-तिल बढ़ता है। जी हाँ, काशी में इस अद्भुत मंदिर को तिलभांडेश्वर के नाम से जाना जाता है जो हर साल एक तिल के बराबर बढ़ते हैं। अंग्रेज तक इस मंदिर में शीश झुकाने को मजबूर हो चुके हैं।
काशी के सोनारपुरा क्षेत्र में बाबा तिलभांडेश्वर का प्राचीन मंदिर है। काशी के केदार खंड में स्थित इस मन्दिर की मान्यता है कि बाबा तिलभाण्डेश्वर स्वयंभू हैं। मान्यता है कि भगवान शिव के इस मंदिर में मौजूद यह शिव लिंग मकर संक्रांति के दिन एक तिल के आकार में बढ़ता है। लिंग के हर साल एक तिल बढ़ने का ज़िक्र शिव पुराण धर्म ग्रन्थ में भी  है।

किवदंतियों के अनुसार मंदिर का निर्माण सैकड़ों वर्ष पहले हुआ था। सतयुग से लेकर द्वापर युग तक यह लिंग हर रोज एक तिल बढ़ता रहा। कलयुग प्रारम्भ होते ही लोगों को यह चिंता सताने लगी है कि यदि भगवान शिव ऐसे ही हर दिन बढ़ते रहे तो एक दिन पूरी दुनिया ही इस लिंग में समाहित हो जायेगी। तब लोगों ने यहां शिव की आराधना की। शिव ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया और साथ ही यह वरदान भी दिया कि हर साल मकर संक्रांति पर मैं एक तिल बढ़कर भक्तों का कल्याण करूंगा।
  अंग्रेजों ने बाँधा था धागा
ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेज मानने को तैयार न थे कि यह शिवलिंग हर साल तिल के बराबर बढ़ता है। सत्य जानने को एक बार अंग्रेजों ने बाबा के शिवलिंग पर उनके नाप से एक धागा बांध दिया और मंदिर को बंद कर दिया। जब मंदिर खोला गया तो देखा गया कि धागा टूटा हुआ है। तब से अंग्रेजों की आस्था भी इस मंदिर में और गहरी हो गयी। समय बीतता गया और बाबा हर साल बढ़ते गए। आज काशी की जिस गली में मंदिर हैं वो 25 फ़ीट तक ऊपर जा चुका है। तिलभाण्डेश्वर मंदिर के महंत शिवानंद बताते हैं कि यहां बाबा पर जल, बेलपत्र के अलावा तिल भी चढ़ाया जाता है। इससे शनि दोष भी खत्म होता है और सुख की प्राप्ति होती है। बाबा तिलभाण्डेश्वर के हर दिन दर्शन करने से अन्नपूर्णा में वृद्धि और पाप से तिल भर मुक्ति मिलती हैं।

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