EXCLUSIV मोदी की सांसद निधि भी न कर सके खर्च अधिकारी,मोदी के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होनेे पर पढिय़े ये खबर

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pm modi

वर्ष 2014-15 का 55 लाख रुपये अब तक खर्च नहीं, मोदी की सहमति के इंतजार में ढाई करोड़ अटके है इस वित्तीय वर्ष में 

विकास बागी

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर सांसद वाराणसी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में काशीवासियों की उनसे अपेक्षाएं भी अधिक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपेक्षा के अनुरूप अपने संसदीय क्षेत्र को रुपये देने में कोताही भी नहीं बरती लेकिन जिला प्रशासन व स्थानीय भाजपा नेताओं की उदासीनता के चलते सांसद निधि का सही ढंग से उपयोग नहीं हो पा रहा है। पत्रिका को अपनी जांच पड़ताल में जिला प्रशासन से जो कागजात मिले हैं उसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 में कुल पांच करोड़ रुपये मोदी ने बतौर सांसद बनारस को दिए थे। कैंट रेलवे स्टेशन, सड़क, बिजली, पानी और स्वच्छता के नाम पर जिला प्रशासन ने साढ़े चार करोड़ खर्च कर डाले। नए वित्तीय वर्ष को शुरू हुए दो माह बीतने को है लेकिन जिला प्रशासन की सुस्ती कहें या सांसद मोदी के कार्यालय या फिर उनके प्रतिनिधि की कि अब तक पिछले वित्तीय वर्ष में जारी 55.449 लाख रुपये बनारस के विकास कार्यों पर खर्च न हो सके। 

हैंडपंप, सोलर व विद्युतीकरण के लिए तैयार है प्रस्ताव
विकास भवन से मिले कागजात से यह जानकारी मिली है कि पीएम मोदी ने बतौर सांसद नए वित्तीय वर्ष में अपनी निधि से पहली किस्त के रूप में ढाई करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष की अव्ययित राशि को जोड़ दी जाए तो यह धनराशि 306.995 लाख रुपये होते हैं। जिला प्रशासन ने इस धनराशि को लेकर अपनी योजना तैयार कर ली है। जानकारी के मुताबिक वाराणसी में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत 81 स्थानों पर हैंडपंप, 247 सोलर लाइट और चार अन्य विद्युत परियोजना के बाबत फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहमति का इंतजार है। सांसद मोदी की ओर से 58 परियोजनाओं के लिए 162 लाख रुपये स्वीकृत किया है। अभिकरण स्तर पर नए कार्यों हेतुु अवशेष राशि 144.133 लाख रुपये हैं। विकास अभिकरण के अनुसार सांसद निधि खर्च करने में सबसे बड़ी मुश्किल अप्राप्त प्रस्ताव है। प्रस्ताव मिले तो फिर अन्य कार्यों पर धनराशि व्यय की जाए।

डीएम के तबादले के पीछे की वजह तो नहीं सांसद निधि
सरकारी महकमे में चर्चा आम है कि पीएम मोदी की सांसद निधि का सही ढंग से उपयोग न करने व सांसद निधि के कार्यों में रुचि न लेने के कारण ही राजमणि यादव का तबादला केंद्र सरकार के दबाव में प्रदेश सरकार ने किया था। मोदी के संसदीय क्षेत्र में केंद्र सरकार तेज तर्रार आइएएस चाहता था ताकि शहर की तस्वीर बदलें। समझा जाता है कि मोदी के दबाव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विजय किरन आनंद को वाराणसी का नया जिलाधिकारी बनाकर भेजा है जिन्होंने कुर्सी संभालने के साथ ही अपने इरादे भी जता दिए हैं। अब तक तो पीएम की ओर से दी गई धनराशि सिर्फ हैंडपंप व अन्य ऐसे कार्यों में जा रही थी जो उनके कद के हिसाब से मेल नहीं खा रहा था। उम्मीद है कि नवागत डीएम वाराणसी के सांसद व देश के प्रधानमंत्री की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।
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