सियासी मज़बूरी, आठ महीने में ही पलटी मार गए मुलायम

सियासी मज़बूरी, आठ महीने में ही पलटी मार गए मुलायम
mulayam singh yadav

कारसेवकों पर गोली चलाने के आदेश पर जताया था तब मुलायम ने अफ़सोस


वाराणसी. उत्तर प्रदेश का सियासी तापमान एक बार फिर चढ़ गया गया है मुलायम सिंह यादव के बयान को लेकर। अमर प्रेम में डूबे मुलायम सिंह यादव ने 1991 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने के आदेश को सही ठहराया है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि धार्मिक स्थल को बचाने के लिए 21 के बजाय 30 जानें भी लेनी पड़ती तो पीछे नहीं हटते। मुलायम सिंह यादव का यह बयान उस समय आया है जब एक तरफ से ओवैसी यूपी में घेरेबंदी कर रहे हैं तो दूसरी तरफ मायावती मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगा रही हैं।

सपा सुप्रीमो मुलायम के सामने ऐसी सियासी मज़बूरी आ खड़ी हुई है कि कारसेवकों पर गोली चलवाने के मामले आठ महीने में ही अपने बयान से पलटी मार गए। गौरतलब है कि अयोध्या काण्ड पर लगभग 25 साल बाद 25 जनवरी 2016 को कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर मुलायम सिंह यादव ने सार्वजानिक बयान दिया था कि उन्हें कारसेवकों पर उन्हें गोली चलवाने का दुःख था इसलिए उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा भी दे दिया था। उनके इस बयान को लेकर कुछ मुस्लिम संगठन नाराज भी हुए थे लेकिन यह माना गया था कि उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव को देखते हुए बीजेपी से पार पाने और हिंदुओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ऐसा बयान दिया था।

ऐसा क्या हुआ कि मुलायम सिंह यादव का 24 घंटे के भीतर दो बड़ा बयान आया जिसके पीछे अमर सिंह का इफेक्ट माना जा रहा है। कल मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि कल्याण सिंह को सपा में लाना बड़ी भूल थी। जबकि इन्ही कल्याण सिंह जो वर्तमान में राजस्थान के गवर्नर है को लेकर मुलायम सिंह के अभिन्न आज़म खान ने बगावत करते हुए पार्टी छोड़ दी थी, सार्वजनिक मंच से मुलायम को संघी तक बता दिया था।

सियासी मजबूरियों के चलते कल्याण ने अपनी राह पकड़ी, आज़म की वापसी हुई और अब अमर सिंह भी वापस आ गए हैं। माना जा रहा है कि सपा में एक बार फिर मुलायम का अमर प्रेम भी जाग उठा है। 
समझा जा रहा है कि 24 घंटे में मुलायम की ओर से आये इन दोनों बयान के पीछे अमर सिंह का दिमाग है। अमर सिंह के चलते ही जया प्रदा को यूपी फिल्म विकास परिषद् का वाईस चेयरमैन बना दिया और उसी समारोह में कारसेवकों वाला बयान भी दे डाला।

दरअसल, बीते आठ महीनों में उत्तर प्रदेश का चुनावी संग्राम में कभी कोई दल हावी हो रहा तो कभी कोई दल। राजनीती के मठाधीशों का मानना है कि आठ माह पहले मुलायम ने कारसेवकों पर गोली चलवाने के अफ़सोस वाला बयान हिंदुओं को अपनी तरफ आकर्षित करने और बीजेपी की काट बनने का अरमान पालते हुए दिया था। शनिवार को मुलायम सिंह यादव अपने बयान से पलट गए तो इसके पीछे वह खुफिया रिपोर्ट है जिसने यादव परिवार की नींद उड़ा रखी है। यूपी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट है कि मुस्लिम वोटबैंक तेजी से बसपा की ओर भाग रहा है। दूसरी तरफ ओवैसी भी तेजी से घुसपैठ कर रहे। मुलायम सिंह यादव जानते हैं कि यदि ऐसा हुआ तो चुनावी बैतरणी पार करना नामुमकिन होगा इसलिए उन्होंने एक बार कारसेवकों को लेकर अपना दिया बयां पलट दिया और वर्ग विशेष को खुश करने के लिए ऐसा कहा।
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