scriptMurat trying to prove himself alive for 20 years when he prepared to contest election nomination form rejected | विश्व सामाजिक न्याय दिवसः सिस्टम का सच बताती वाराणसी के "मूरत" की कहानी | Patrika News

विश्व सामाजिक न्याय दिवसः सिस्टम का सच बताती वाराणसी के "मूरत" की कहानी

विश्व सामाजिक न्याय दिवसः "मूरत" वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के निवासी हैं। मूरत को दो दशक पहले उनके पट्टीदारों ने संपत्ति के लिए मृत घोषित कर दिया, तब से वो अपने को जिंदा साबित करने में लगे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के दरवाजे खटखटा कर जब थक गए तो चुनाव के जरिए न्याय पाने निकले। लेकिन उन्हें यहां भी निराशा ही हाथ लगी। जानते हैं कौन हैं मूरत और क्या हुआ उनके साथ...

वाराणसी

Published: February 20, 2022 01:17:39 pm

वाराणसी. विश्व सामाजिक न्याय दिवसः देश ही हीं समूची दुनिया 20 फरवरी को सामाजिक न्याय दिवस मना रही है। वैसे भी यूपी में विधानसभा चुनाव चल रहा है। हर तरफ न्याय की बात की जा रही है। इसमें लोग सामाजिक न्याय की दुहाई देते भी दिख रहे हैं। इन्हीं सब के बीच वाराणसी के चौबेपुर निवासी संतष सिंह "मूरत" जो चुनावी प्रक्रिया के जरिए न्याय हासिल करने निकले थे को इस मंच पर भी न्याय नहीं मिला।
न्याय की मांग करता संतोष सिंह मूरत
न्याय की मांग करता संतोष सिंह मूरत
दरअसल बात उस मूरत की हो रही है जिसे उसके सगे संबंधियों (पट्टीदारों) ने ही प्रशासनिक मशीनरी से सांठगांठ कर उन्हें सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर उनकी संपत्ति हड़प ली। अब 20 साल से मूरत खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन सफलता नहीं हासिल हुई तो उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले कर खुद को जीवित साबित करने का प्रयास किया लेकिन यहां भी उन्हें मायूसी ही हाथ लगी।
ये भी पढें- पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर अब काशी होगी सांस्कृतिक राजधानी, SCO के दस्तावेजों में दर्ज होगी पहचान

मूरत ने शिवपुर विधानसभा सीट से परचा दाखिल किया था, लेकिन वो भी खारिज हो गया। परचा खारिज हो गया तो वो फूट-फूट कर रो पड़े। अपनी पीड़ा को आला अफसरों तक पहुंचाने के लिए वो पुलिस कमिश्रर की गाड़ी के आगे लेट गए। इस पर भी उन्हें न्याय तो नसीब नहीं हुआ पर हवालात जरूर पहुंचा दिया। मूरत बताते हैं कि उन्होंने जनसंघ पार्टी के टिकट पर परचा भरा था जिसे खारिज कर दिया गया।
गले में "मैं जिंदा हूं" की तख्ती लटकाए मूरत वाराणसी से कानपुर तक गए चुनाव लड़ने लेकिन वहां तो वो नामांकन पत्र तक दाखिल नहीं कर पाए। वो बताते हैं कि कानपुर पहुंचे और माधोगंज सीट से नामांकन करने की कोशिश की तो पहले तो पहले तो पुलिस वालों ने रोक दिया। फिर जब वो नामांकन कक्ष तक पहुंचे तो रिटर्निंग ऑफिसर ने वक्त का तकाजा बताते हुए उन्हें वापस कर दिया।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

नाम ज्योतिष: ससुराल वालों के लिए बेहद लकी साबित होती हैं इन अक्षर के नाम वाली लड़कियांभारतीय WWE स्टार Veer Mahaan मार खाने के बाद बौखलाए, कहा- 'शेर क्या करेगा किसी को नहीं पता'ज्योतिष अनुसार रोज सुबह इन 5 कार्यों को करने से धन की देवी मां लक्ष्मी होती हैं प्रसन्नइन राशि वालों पर देवी-देवताओं की मानी जाती है विशेष कृपा, भाग्य का भरपूर मिलता है साथअगर ठान लें तो धन कुबेर बन सकते हैं इन नाम के लोग, जानें क्या कहती है ज्योतिषIron and steel market: लोहा इस्पात बाजार में फिर से गिरावट शुरू5 बल्लेबाज जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में 1 ओवर में 6 चौके जड़ेनोट गिनने में लगीं कई मशीनें..नोट ढ़ोते-ढ़ोते छूटे पुलिस के पसीने, जानिए कहां मिला नोटों का ढेर

बड़ी खबरें

ज्ञानवापी मस्जिद केसः सुप्रीम कोर्ट का सुझाव, मामला जिला जज के पास भेजा जाए, सभी पक्षों के हित सुरक्षित रखे जाएंशिक्षा मंत्री की बेटी को कलकत्ता हाई कोर्ट ने दिए बर्खास्त करने के निर्देश, लौटाना होगा 41 महीने का वेतनHyderabad Encounter Case: सुप्रीम कोर्ट के जांच आयोग ने हैदराबाद एनकाउंटर को बताया फर्जी, पुलिसकर्मी दोषी करारOmicron Subvariant BA.4 Case: भारत में मिला ओमिक्रोन BA.4 का पहला केस, जानिए कितना खतरनाक है ये वैरियंटकांग्रेस के चिंतन शिविर को प्रशांत किशोर ने बताया फेल, कहा- कुछ हासिल नहीं होगाउड़ान भरते ही बीच हवा में बंद हो गया Air India प्लेन का इंजन, पायलट को करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंगकोहली नहीं सहवाग की नज़र में ये है असल कप्तान, बोले – जो टीम बनाता है वह होता है नंबर 1आम लोग तो छोड़िए साहब... Anand Mahindra को भी है अपनी XUV700 की डिलीवरी का इंतज़ार! बताई ये वजह
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.