इस मुस्लिम युवती के जज्बे को सलाम, हिंदू दलित बच्चों का बना रही कैरियर, दे रही मुफ्त शिक्षा

इस मुस्लिम युवती के जज्बे को सलाम, हिंदू दलित बच्चों का बना रही कैरियर, दे रही मुफ्त शिक्षा
Tahniyat Sheikh

Ajay Chaturvedi | Updated: 06 Oct 2019, 05:46:20 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

-खुद हासिल कर रही आईटीआई
-चंदा इकट्ठा कर बच्चों में बांटती है निःशुल्क पाठ्य सामग्री
-कइयों के लिए बन गई है प्रेरणा का स्त्रोत

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. मां गंगा की नगरी काशी जहां की संस्कृति में बसती है गंगा जमुनी तहजीब। इस तहजीब की जीती जागती मिशाल है यह मुस्लिम युवती जिसने छोटी सी उम्र में दलित बच्चों को अपना बनाया। अब उन्हें दे रही मुफ्त तालीम। इस युवती का सपना है कि ये बच्चे जिनके माता पिता इस काबिल भी नहीं कि वो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेज सकें, उन्हें पढा लिखा कर अच्छा इंसान बनाना।

इसने महामना की कर्मस्थली के कुलगीत को साकार रूप दिया है जिसमें इस काशी नगरी को सर्वविद्या की राजधानी कहा गया है। वहीं की यह युवती तहनियत हिंदू दलित बच्चों को को मुफ्त में पढ़ा रही है। इसका मजहब और ईमान दोनों ही इंसानियत है, मानवता है। वह बताती है कि उसने महान वैज्ञानिक और देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से इसकी प्रेरणा ली और उसे अपना ध्येय बना लिया।

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इसका मानना है कि बच्चे चाहे जिस जाति, धर्म या संप्रदाय के हों उन्हें बेहतर तालीम मिलनी ही चाहिए। अगर वो गरीब है तो यह और भी जरूरी है। वह कहती है गरीब बच्चों को शिक्षित करना खुदा की सबसे बड़ी इबादत है। अध्यापक के लिए छात्र की कोई जाति या धर्म नहीं होता।

ये युवती तहनियत काशी के राजातालाब इलाके में गैर मुस्लिम गरीब- दलित बच्चों को शिक्षा देने में जुटी है। एक तरफ जहां लोग खुद धर्म, संप्रदाय और जातियों में बंटे है वहां इस युवती ने गैर धर्म के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे कर एक मिशाल कायम की है।

Tahniyat Sheikh

वाराणसी के राजातालाब में रहने वाली 20 वर्षीय तहनियत खुद 12वीं पास होने के बाद आईटीआई की शिक्षा ग्रहण कर नीट की तैयारी कर रही हैं। संसाधनों का अभाव होने के बावजूद उसके फौलादी इरादों पर कोई मजहबी दीवार आड़े नहीं आई।

तहनियत का परिवार हिन्दू बहुल इलाके में रहता है, जहां आसपास दलित एवं गरीब रहते हैं। उन्होंने अपने आस-पड़ोस के गरीब बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी उठाई है। तहनियत अपने घर से पांच सौ मीटर दूर दलित बस्ती में उक्त बच्चों को पढ़ाती है, उक्त बस्ती में चलने वाले इस स्कूल में एलकेजी से कक्षा आठ तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है। आज इस स्कूल में आसपास के लगभग चालीस बच्चे पढ़ाई करते हैं। ये बच्चे शाम तक पढ़ते हैं। आज उनके यहां पढ़ने आने वाले छात्र उनको 'मेरी स्कूल वाली दीदी' कहकर बुलाते हैं।

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उनके स्कूल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस मुस्लिम शिक्षिका के पास पढ़ने आने वाले सभी छात्र गैर-मुस्लिम खासकर दलित हैं। तहनियत के इस काम में शुरुआत में मज़हबी अड़चनें भी आईं, लेकिन अपने मजबूत इरादों के बल पर उन्होंने छात्रों के बीच धर्म की दीवार को कभी आड़े नहीं आने दिया।

तीन बहन भाइयों मे सबसे बड़ी तहनियत के इस काम में उनकी छोटी बहन तमन्ना और सरकारी शिक्षक पिता रज्जब शेख और सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता भी सहयोग करते हैं। तहनियत ने बताया कि अभी उनके पिता और क्षेत्र के लोग इस कार्य के लिए पैसे का इन्तजाम करते हैं। लेकिन साक्षरता को बढ़ाने के लिए सभी के सहयोग की जरुरत है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए अन्य लोग भी आगे आएंगे।

बच्चों को पढ़ाना पांच समय की इबादत के बराबर तहनियत ने कहा, पढ़ने आने वाले बच्चों के माता-पिता के पास पर्याप्त पैसा नहीं है। इसलिए वह छात्रों से कोई शुल्क नहीं लेतीं। तहनीयत ने एक वर्ष पूर्व से पढ़ाना शुरू किया है। शुरुआत के तीन महीनों में लगभग 10 बच्चे आये थे लेकिन अब 40 बच्चे रोज पढ़ने आते हैं। मेरे लिए बच्चों को पढ़ाना पांच समय की इबादत की तरह है।

तहनियत की सोच बदलने में राजातालाब की पूजा गुप्ता की मुख्य भूमिका है। तहनियत ने बताया कि वह एक साल पहले एक दिन राजातालाब में अपने सहेली पूजा गुप्ता के घर मिलने के लिए गई तो पूजा के घर नि:शुल्क पढ़ रहे गरीब बच्चों के बारे मे जाना। पूजा ने ही बताया कि इसी तरह गांव में सैकड़ों गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित है और उनको पढ़ाने वाला कोई नहीं है। इस कारण उक्त बच्चे शिक्षा से वंचित होते जा रहे हैं। इसके बाद उसने पूजा की मदद से अन्य गरीब बच्चों को गांव में एकत्रित कर उन्हें मुफ्त पढ़ाना शुरू कर दिया।

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