सुबह रखते हैं रोजा, शाम को कहते हैं गौ-कथा यह मुस्लिम संत

सुबह रखते हैं रोजा, शाम को कहते हैं गौ-कथा यह मुस्लिम संत
mo. faij khan

गौ माता के नाम पर धर्म को बांटने व लड़ाने वालों को आइना दिखाता है यह मुस्लिम सन्त

वाराणसी. शिव की नगरी में  (चौबेपुर) कैथी के निकट ढाखा गाँव में गंगा तट का नजारा कुछ ऐसा है जो गंगा जमुनी तहजीब की इससे अच्छी मिसाल नहीं दे सकता। आज जब गौ मांस, गौ कशी को लेकर पूरे देश का माहौल तल्ख है, एक मुस्लिम संत गाय की महत्ता बता रहा है। रमजान के मुबारक महीने में भी यह मुस्लिम संत अपने धर्म का पालन करते हुए रोजा रखते हैं लेकिन अपना सामाजिक दायित्व नहीं भूलते। सूर्य अस्त होने के साथ ही वह कुरान की आयतें नहीं वरन् गाय की महत्ता बताते है। अजान का समय होते ही मुस्लिम संत कथा को बीच में रोककर श्रद्धालुओं के साथ इफ्तार करते हैं और फिर गौ कथा शुरू करते हैं। हम बात कर रहे हैं मुस्लिम सन्त मो. फैज खान की जो इस समय चौबेपुर में श्री गौरीशंकर महादेव धाम में संगीत मय “गौकथा”में शामिल होने आये हैं।

प्रवक्ता की नौकरी छोड़ तीन वर्ष से दे रहे गौ पर व्याख्यान


मो. फैज खान रायपुर के महाविद्यालय में प्रवक्ता पद की नौकरी छोड़ विगत 3 वर्ष से देश भर में भ्रमण करते हुए लोगों को गोकथा सुना रहे हैं और उन्हें गो सेवा और गो पालन के लिए प्रेरित कर रहे है। रमजान के दिन में नियमपूर्वक रोजा रखते हुए वे दिन की शुरुआत नमाज से करते हैं और सायं काल मंदिर परिसर में उपस्थित श्रोताओं को लोगों को गो कथा सुना रहे है। उन्होंने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा गिरीश पंकज के उपन्यास‘एक गाय की आत्मकथा’ से मिली। उन्होंने बताया कि इस उपन्यास और “धेनु मानस ग्रन्थ” के अध्ययन से मुझे गाय की महत्ता का पता चला और मैंने स्वयं को ‘गौवंश’ की रक्षा के लिए समर्पित करने का फैसला करके ‘गौ सेवा’ को ही अपना लक्ष्य बना लिया है.

अब तक देश के स्कूलों व अन्य संस्थाओं में गाय की महत्ता पर 200 से अधिक लैक्चर देने के अलावा गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में 15 गऊ कथाओं का आयोजन कर चुके मोहम्मद फैज खान का कहना है कि ‘‘गाय सिर्फ हिन्दुओं की ही माता नहीं है बल्कि वेदों के अनुसार वह सबकी माता (विश्व माता) है।’’ उन्होंने कहा योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा गोदुग्ध पान किया तो उनके मुखारविंद से भगवतगीता प्रस्फुटित हुइ , दुर्भाग्य से आज लोग  शराब का सेवन करते हैं तो मुख से गाली निकलती है। गो  दुग्ध कोई  साधारण पेय  पदार्थ नहीं है साक्षात् अमृत है।

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