Patrika exclusive- हृदय रोगियों को बड़ी राहत, अब BHU अस्पताल में 4 वेशल ग्राफ्ट एंड माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट की सुविधा

बीएचयू के 100 साल के इतिहास में पहली बार हुआ सफल प्रयोग। ऩए एमएस के आग्रह पर विश्वविद्यालय के एल्यूमिनाई विशेषज्ञों ने लिया इस आपरेशन में सहयोग का संकल्प।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 24 Jul 2018, 01:11 PM IST

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी


वाराणसी. बनारस, पूर्वांचल ही नहीं अब उत्तर भारत के हृदय रोगियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। वह भी महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की कर्म स्थली, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में। विश्वविद्यालय के सरसुदर लाल चिकित्सालय में। महामना की कामना के अनुरूप अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है और वह भी विश्वविद्यालय के पुरातन छात्रों के सहयोग से। उन पुरातन छात्रों ने अपनी हर सेवा देने का संकल्प भी लिया है। यह एक ऐसी सुविधा है जिससे लाखों लोगों को हृदय की जानलेवा बीमारी से बचाया जा सकेगा। सचमुच यह अस्पताल अब धीरे-धीरे चिकित्सा का हब बनता जा रहा है।

इन विशेषज्ञ पुरातन छात्र चिकित्सकों का है सहयोग
सरसुदर लाल चिकित्सालय के नए एमएस, न्यूरोलॉजिस्ट प्रो विजय नाथ मिश्र की पहल रंग लाई है। प्रो मिश्र की पहल पर बीएचयू के सरसुंदर लाल चिकित्सालय में शुरू हुई है जटिल हृदय शल्य चिकित्सा। वह भी पुरातन छात्र चिकित्सको द्वारा। इसके तहत 4 वेशल ग्राफ्ट और माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट जो कि बी एच यू में पहली बार की गई। सर्जरी के तुरंत बाद मरीज की हालत में जबरदस्त सुधार देखा गया। पूर्वांचल ही नहीं बल्कि समूचे उत्तर भारत के हृदय शल्य रोगियों की सेवा के लिए संस्थान के 1992 बैच के पुरातन छात्र चिकित्सक डॉ मनमोहन श्याम वरिष्ठ गहन चिकित्सा विशेषज्ञ, मेडविन हॉस्पिटल वाराणसी और देश के जाने माने हार्ट ट्रांसप्लांट वरिष्ठ सर्जन, डॉ राहुल चंदोला, मैक्स हॉस्पिटल नई दिल्ली ने अपने मातृ संस्थान में सेवा भाव से वर्तमान शल्य चिकित्सक डॉ सिद्दार्थ लखोटिया और डॉ अरविंद पांडेय निःसंज्ञा विभाग के डॉ आलोक, डॉ विक्रम, विभागाध्यक्ष प्रोफसर डॉ पुष्कर रंजन के साथ मिल कर जटिल हृदय शल्य चिकित्सा शुरू करने में सहयोग देने का सेवा संकल्प लिया। इस सुविधा से पूर्वांचल ही नही उत्तर भारत के रोगियों को बहुत राहत मिलेगी। इस मौके पर आईएमएस के निदेशक डॉ वी के शुक्ला व अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ विजय मिश्रा ने प्रोफेसर डॉ सिद्धार्थ लखोटिया, प्रो डॉ अरविंद के इस तरह की सेवा का अवसर प्रदान करने के लिए आभार जताया। बीएचयू में यह सुविधा उपलब्ध होने पर वाराणसी ही नहीं विश्व के अन्य भागों में कार्यरत पुरातन छात्र चिकित्सको में हर्ष है। सभी ने टीम को इस पुनीत और ऐतिहासिक कार्य के लिए बधाई दी और कहा कि महामना के मानस संतानों के लिए यह परम् सौभाग्य का विषय है।

इनका हुआ ऑपरेशन

चन्दौली निवासी राम आसिष (55) का सफल सर्जरी किया गया। राम आशीष को दो महीने पूर्व हर्ट अटैक आया था। वही सर्जरी के बाद प्रो मिश्र ने बताया कि डॉ राहुल चंदोला प्रत्येक महीने में दो बार दिल्‍ली से वाराणसी आकर अपनी मानद सेवा यहां के रोगियों को देंगे। इससे अब पूर्वांचल के मरीजों को दिल्‍ली, मुम्‍बई या मद्रास का चक्‍कर नहीं लगाना पड़ेगा।

क्या है माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी
ख्यात न्यूरोलॉजिस्ट व सरसुंदर लाल चिकित्सालय के एमएस प्रो विजय नाथ मिश्र ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि दिल में चार वाल्व होते हैं जो दरवाजे के रूप में काम करते हैं। इनमें गड़बड़ी आने से तीव्र हृहयाघात और उसके बात मौत की आशंका बनी रहती है। देश भर में हृदय रोगियों की बढती तादाद के मद्देनजर ऐसा सोचा गया कि क्यों न कुछ ऐसी सुविधा इस अस्पताल में लागू की जाए जिससे लाखों लोगों के जीवन को बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की आवश्यकता, माइट्रल वाल्व प्रत्यावहन (माइट्रल वाल्व रेगुरगिटशन-एमआर) या माइट्रल वाल्व स्टेनोसिस में पड़ती है।

 

मरीज को क्या होती है दिक्कत
प्रो मिश्र ने बताया कि माइट्रल वाल्व रेगुरगिटशन-एमआर हृदय की उस स्थिति को कहा जाता है जिसमें हृदय के ऊपरी बाएं हृदय कक्ष (अलिंद) और निचले बाएं हृदय कक्ष (निलय) के बीच वाल्व से खून रिसने लगता है। यदि इस स्थिति में समय पर नियंत्रण न किया जाए तो यह रक्त फेफड़ों के अलिंद और बाएं वेंट्रिकल में भर जाता है और वह हिस्सा फूल जाता है। हृदय की इस स्थिति का सीधा नतीजा दिल का दौरा होत है। माइट्रल वाल्व स्टेनोसिस की स्थिति में माइट्रल वाल्व जो हृदय के बाईं ओर रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करता है, उस प्रकार से खुलनी बंद हो जाती है जैसे वह सामान्य हृदय में खुलती है। हालांकि इसका अचानक से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता लेकिन धीरे-धीरे इसके कारण बाएं आलिंद (लेफ्ट एट्रियम) का इस संकीर्ण वाल्व से रक्त फेंकने की सामर्थ्य कम हो जाती है। इसी के चलते असामान्य धड़कन, स्ट्रोक, फेफड़ों की खराबी, रक्त के थक्के जमना और दिल के दौरे के जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

 

बीमारी का जल्द पता नहीं चलता
इस बीमारी को पनपने में 10-20 साल तक यहां तक कि 40 साल तक का समय भी लग सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों के तौर पर सांस लेने में तकलीफ, तनाव या हृदय की छोटी मोटी समस्याएं सामने आ सकती हैं। माइट्रल वाल्व स्टेनोसिस की स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती जाती है और वाल्व से रिस रहा रक्त फेफड़ों में इकठ्ठा होता चला जाता है जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी, चक्कर आना और दिल घबराना जैसी समस्या सामने आती है। प्रो मिश्र के अनुसार माइट्रल वाल्व स्टेनोसिस का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि इसके लक्षण कितने ज्यादा सामने आ रहें हैं, और माइट्रल वाल्व कितनी ज्यादा सिकुड़ी है। जिन्हें इस तरह के हल्के -फुल्के लक्षण नजर आते हैं उनका सूक्ष्म परीक्षण कर के इस समस्या का पता लगाया जा सकता है। लेकिन यदि लक्षण और वाल्व का सिकुड़ना दोनों ही पाये जाते हैं तो इस स्थिति में डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। इस स्थिति में वाल्व प्रतिस्थापन (वाल्व रिप्लेसमेंट) एक ओपन हार्ट सर्जरी के तौर पर किया जाता है। इसके अलावा सर्जरी के न्यूनतम इनवेसिव प्रकार भी इसका एक चुनाव हो सकते हैं।

कैसे होता है आपरेशन
इस आपरेशन के दौरान मरीज को एक (हार्ट लंग) मशीन पर रखा जाता है। इसमें रक्त को शरीर के बाहर की तरफ भेजा जाता है और हार्ट लंग (कार्डियोपल्मोनरी बाईपास) मशीन के जरिये इसमें ऑक्सीजन को मिलाया जाता है। इस दौरान हृदय की मांसपेशियों को कोई नुकसान ना हो इसके लिए दिल की धड़कन को ठंडक द्वारा धीमा या बंद कर दिया जाता है। इसके बाद ख़राब हुई माइट्रल वाल्व को हटा दिया जाता है और उसकी जगह एक कृत्रम वाल्व लगा दी जाती है। उस कृत्रम वाल्व को असली वाल्व की जगह सिल दिया जाता है।

घबराएं नहीं आपरेशन के 4-6 हफ्तों में सब कुछ सामान्य

इस हार्ट सर्जरी के बाद मरीज को कुछ समय में अस्पताल की स्पेशल केयर यूनिट (आईसीयू) में रखा जाता है। सर्जरी के कुछ हफ़्तों तक थकान और दर्द दोनों महसूस होते हैं। इसमें सीने के बगल में कुछ समय तक तेज दर्द भी हो सकता है। सीने के अलावा कंधे और कमर के ऊपर वाले हिस्से में भी दर्द रह सकता है। चीरे की वजह से सूजन और दर्द हो सकता है। लेकिन यह सभी समस्याएं लगभग 4 से 6 हफ़्तों के बीच ठीक हो जाती हैं।

क्या बरतें सावधानी
लेकिन 4-6 हफ़्तों के बाद हृदय सामान्य कार्य करने की अवस्था में आ जाता है। लेकिन कम से कम 6 हफ़्तों तक आपको ऐसी कसरत या भारी चीजें और कार्य नहीं करनी होती जिस से आपको सीने में कोई समस्या आए। शुरुआत में आपको जल्दी थकान महसूस हो सकती है और बीच-बीच में आराम की जरूरत पड़ सकती है। आपकी अपनी पहले वाली ऊर्जा पाने में कम से कम 1 से 2 महीने का समय लगता है।

चिकित्सकीय परामर्श
हालांकि सर्जरी से माइट्रल वाल्व तो ठीक हो जाती है लेकिन सवास्थ्य से भरपूर भोजन भी बेहद जरुरी है। इसके अलावा लगातार व्यायाम, धूम्रपान निषेध, दवाइयों का उचित ध्यान और अवसाद से दूर रहना भी जरुरी होता है। इस दौरान मरीज को डायटीशियन,भौतिक चिकित्सक या नर्स के लगातार सम्पर्क में रहना चाहिए।

 

Ajay Chaturvedi
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