बाजार से नोट गायब: 2019 लोकसभा चुनाव के लिए डंप हो रही करेंसी!, नोटबंदी जैसे बन रहे हालात

बाजार से नोट गायब: 2019 लोकसभा चुनाव के लिए डंप हो रही करेंसी!, नोटबंदी जैसे बन रहे हालात

Ashish Shukla | Publish: Apr, 17 2018 05:11:10 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

वित्तीय़ मामलों के कई जानकार बता रहे हैं कि आखिर इन हालातों के पीछे की असली वजह क्या है

वाराणसी. बड़े शहरों के साथ ही पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में एटीएम खाली है। पिछले एक सप्ताह से बाजार में नोटों कि किल्लत अब ऐसे मोड़ पर आ पहुंची है। जहां कुछ एक एटीम को छोड़ दिया जाये तो सभी एटीएम पर नो कैश के बोर्ड लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। नोटबंदी के समय में भी लोग जिन एटीएम पर बहुत भरोसा करते रहे आज उनमें भी पैसा गायब है। कज्जाकपुरा तिराहे पर स्थित एसबीआई के एटीएम में किसी भी समय पैसे की कमी नहीं रहती थी। दिन रात चौबीसों घंटे जिसे कहीं पैसा न मिलता वो यहां आता और आसानी से पैसे निकाल सकता था। लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि तीन दिन से इस शाखा में भी पैसे नहीं है। इसे लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही है। कुछ जानकार तो इसे आने वाले समय में 2019 लोकसभा चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए लोग अभी से पैसे डंप करा लिय़े हैं। ताकि आने वाले समय में चुनाव लड़ने में दिक्कत न हो। हालांकि कुछ और बड़ी वजहें हैं जिसकी वजह से नोट के किल्लत की बात सामने आ रही है।

जी हां नोटबंदी जैसे हालात से इनकार नहीं किया जा सकता यूपी बिहार समेत कई राज्यों में नोट का संकट गहराता जा रहा है। कई बैंकों के मैनेजर कहते हैं आरबीआई की ओर से बैंकों को पैसे देने में भारी कटौती की जा रही है। लेकिन बात जो भी हो अगर इस हालत से सरकार और आरबीआई ने जनता को जल्द न उबारा तो लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस हातल के पीछे कई बिंदुओं को इस तरह समक्षा जा सकता है।

दो हजार के नोटों की छपाई बंद करने से संकट गहराया

वित्तीय़ मामलों के कई जानकार बता रहे हैं कि पिछले साल मई में दो हजार के नोटों को छापना बंद कर दिया गया था। इसकी जगह पांच सौ और दो सौ रुपए के नोटों को लाया गया। दो हजार के नोट कम होने से एटीएम में डाले जा रहे नोटों की वैल्यू कम हो रही है। जिसकी वजह से जहां पहले 50 से 60 लाख तक रूपये डाले जाते थे। वहीं अब 500 और 200 की नोट डालने की वजह से 15 से 20 लाख रुपये ही पड़ रहे हैं। इसकी वजह से खपत अधिक है और पैसे खत्म हो जा रहा हैं।

70 फीसदी एटीएम खराब होने से भी गहराया संकट

जानकार बताते हैं कि शहरों में 70 फीसदी से अधिक एटीम खराब होने की वजह से पैसे की किल्लत बढ़ी है। काम कर रहे तीस फीसदी ओ एटीएम में लोगों की अधिकता से पैसे जल्द खाली हो रहे हैं। जिससे पैसे की किल्लत बढ रही है।

आरबीआई के पास नहीं हैं पैसे

पैसे की किल्लत को लेकर मिर्जापुर जिले के डंकिनगंज स्थित भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक देवेंद्र कुमार से जब इस समस्या के बारे में पूछा गया तो इनका साफ कहना था कि पैसे कि लिए सीधे तौर पर आरबीआई जिम्मेदार है। देवेन्द्र ने कहा कि आरबीआई के पास पैसे हैं ही नहीं जिसकी वजह से बैंको को पैसे नहीं भेजा जा रहा है। महीनों से बैंक कि शाखा पर मारपीट कि स्थिति उत्पन्न हो रही है लेकिन आरबीआई इसपर ध्य़ान नहीं दे रही है।

2019 लोकसभा चुनाव के लिए पैसे जुटाने की होड़

वित्त मामलों के जानकार विष्णू गौड़ ने संदेह जताया है कि ये सब खेल आने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए खेला जा रहा है। इनका कहना है कि चुनाव को देखते हुए पैसे जुटाने की होड़ लगी हुई है। लोगों को पता है कि अगर अभी से पैसे न रखे गये तो आने वाले समय में बिना पैसे जुटा और रख पाना लोगों के लिए आसान नहीं होगा इसको देखते हुए कई राजनीतिक खिलाड़ी पैसे जमा कर रहे हैं।

फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल पास होने के डर ने भी बढ़ाई लोगों की चिंता

जानकार ये भी बताते हैं कि बैंकों को घाटे से उबारने के लिए सरकार ने फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल पेश किया था। हालांकि सरकार ने इसपर आगे कुछ नहीं किया। बिल कि बात करें तो इस बिल में प्रावधान है कि अगर कोई बैंक किसी कारणवश वित्तीय संकट में फंस जाता है तो जमाकर्ताओं के पैसे से उसे उबारा जाएगा। बिल के अनुसार जमाकर्ताओं की एक लाख रुपए तक जमाराशि को छेड़ा नहीं जाएगा लेकिन बाकी रकम का इस्तेमाल बैंक के पुनरुद्धार में किया जाएगा। इससे लोगों में घबराहट फैल गई और एटीएम से ज्यादा कैश निकालना शुरू कर दिया।

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