scriptNow rice will produced in country with new technology, IRI gets Rs 16 crore from Google | AI से बढ़ेगा चावल का उत्पादन, गूगल ने दिए 16 करोड़, ऐसे लाभ उठा पाएंगे किसान | Patrika News

AI से बढ़ेगा चावल का उत्पादन, गूगल ने दिए 16 करोड़, ऐसे लाभ उठा पाएंगे किसान

locationवाराणसीPublished: Nov 25, 2023 07:50:14 pm

Submitted by:

Prateek Pandey

जलवायु परिवर्तन के कारण फसलें प्रभावित होने लगी हैं। इसी के कारण चावल की पैदावार में भी कमी आ गई है। इसी वजह से उत्पादन बढ़ने में नयी तकनीकि का प्रयोग किया जा रहा है।

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देश में चावल के उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीकि के प्रयोग किये जा रहे हैं। चावल के उत्पादन में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा।

पैदावार को बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) को गूगल से दो मिलियन अमेरिकी डाॅलर (लगभग 16 करोड़ 67 लाख रुपये) का अनुदान मिला है। इस अनुदान से चावल उत्पादन वाले देशों में किसान एआई की सलाह पर स्मार्ट जलवायु में चावल का उत्पादन बढ़ा सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि अत्यधिक जलवायु परिवर्तनशीलता के कारण चावल उत्पादन के सामने कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसका सामना करने के लिए नई तकनीकी का प्रयोग किया जा रहा है।
नयी तकनीक होगी मददगार
इसी सिलसिले में एआई, आईओटी, और मशीन लर्निंग तकनीकी भी चावल के उत्पादन में मददगार साबित होगी। इसी की सलाह से स्मार्ट जलवायु में चावल का उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा। इरी के वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के अनुकूल उन्नत प्रजनन से नई प्राजतियों और अनुकूलित कृषि के तरीकों को विकसित करने पर लगातार काम कर रहे हैं।
वाराणसी में स्थित है संस्थान
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान वाराणसी में स्थित है. दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र में (आइसार्क) जलवायु-अनुकूल किस्मों के तेजी से विकास के लिए स्पीडब्रीड की अत्याधुनिक सुविधा भी उपलब्ध है।

निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने आगे बताया कि कहा कि दुनिया की आधी आबादी का प्रमुख भोजन चावल है। एशिया इसके उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। मगर हम जलवायु परिवर्तन, अजैविक तनाव (सूखा, जलमग्नता/लवणता) और पारंपरिक प्रबंधन क्रियाओं के साथ पारंपरिक फसल स्थापना विधियां जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इरी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन चुनौतियों का समाधान करने में लगा है।
इसके लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों का भी सहयोग कर रहा है। वाराणसी के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र में जलवायु-अनुकूल किस्मों के तेजी से विकास के लिए स्पीड ब्रीड की अति उन्नत सुविधा भी उपलब्ध कराने में लगा है।

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