प्रियंका गांधी ने किया था वादा फिर भी पुरानी पेंशन बहाली कांग्रेस के घोषणा पत्र से नदारद, कर्मचारियो में निराशा

कर्मचारी अन्य दलों के घोषणा पत्र का अध्ययन कर तय करेंगे नई रणनीति।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 04 Apr 2019, 12:28 PM IST

वाराणसी. पुरानी पेंशन योजना की बहाली के मुद्दे से कांग्रेस ने भी किनारा कस लिया है। कम से कम पार्टी के घोषणा पत्र को देख कर तो यही कहा जा रहा है। इससे प्रदेश के कर्मचारी मायूस हुए हैं। उनका कहना है कि अभी तो चुनाव शुरू भी नहीं हुए और कांग्रेस ने इतने बड़े तबके को नकार दिया है, ऐसा तब हुआ है जब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कर्मचारी नेताओं से हुई मुलाकात में वादा किया था कि वो पुरानी पेंशन बहाली को घोषणा पत्र में शामिल करवाएंगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

 

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ने दी थी चेतावनी

बता दें कि कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र जारी होने के दो दिन पहले ही सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ने बैठक कर तय किया था कि पुरानी पेंशन बहाली और पदोन्नति में आरक्षण हटाने के मुद्दे को जो पार्टी अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगी प्रदेश के 18 लाख कर्मचारी, शिक्षक और उनके परिवारीजन उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने अपना मांग पत्र कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कम्यूनिस्ट पार्टी सहित सभी पार्टी अध्यक्षों को भेजा भी था। लेकिन कांग्रेस ने उसे नजरंदाज कर दिया है।

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति कर रही अन्य दलों के घोषणा पत्र का इंतजार

कर्मचारियों में इस बात को लेकर भी मायूसी है कि उनका प्रतिनिधिमंडल जब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मिला था तो उन्होंने भी वादा किया था कि वो इस मुद्दे को घोषणा पत्र में शामिल कराएंगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस मुद्दे पर सर्वजन हिताय समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र से निराशा जरूर हुई है। उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को तो शामिल ही नहीं किया घोषणा पत्र में साथ ही हमारी दूसरी मांग, पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने के विरुद्ध जाते हुए आरक्षण देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अभी तो सिर्फ कांग्रेस का ही घोषणा पत्र आया है लिहाजा हम लोग सभी दलों के घोषणा पत्र का इंतजार कर रहे हैं, सभी के घोषणा पत्र आने के बाद नई रणनीति की घोषणा की जाएगी। इस मसले पर समिति के सदस्य 07 अप्रैल को बनारस में बैठक भी करने जा रहे हैं।

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नई पेंशन योजना लागू की थी बीजेपी ने

यहां यह भी बता दें कि 2004 में बीजेपी सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में एनपीएस को लागू किया था। उसके बाद कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार आई जो 2014 तक सरकार में रही लेकिन इस सरकार ने भी एनपीएस को हटाने की जहमत नहीं उठाई। हालांकि उस दौरान रेलेव के दोनों संगठन ने भी यूपीए सरकार पर इस मुद्दे को लेकर खास दबाव नहीं बनाया। यहां तक कि तब मजदूरों की हिमायत करने वाले वाम दलों ने भी इस मुद्दे पर कोई बड़ी पहल नहीं की। किसी श्रम संगठनों ने भी इस मुद्दे को हवा नहीं दी।

यानी एनपीएस को लेकर कांग्रेस हो या बीजेपी सभी कर्मचारी नेताओं को गुमराह ही करते रहे। सरकार किसी की रही एनपीएस को लेकर सभी का नजरिया एक सा ही रहा।

 

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